February 7, 2023

Knowledge News : आखिर खाकी की जगह सफेद वर्दी क्यों पहनती है कोलकाता पुलिस, ये है खास वजह

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हमारी सुरक्षा के लिए देश की सीमाओं पर सेनाएं तैनात रहती हैं। वहीं देश के अंदर नागरिक की सुरक्षा के लिए राज्यों में पुलिस की तैनाती की जाती है। वैसे तो देश के ज्यादातर राज्यों में पुलिस की वर्दी का कलर आमतौर पर एक जैसा यानी खाकी ही होता है। लेकिन हमारे यहां एक राज्य ऐसा भी है, जहां पुलिस की वर्दी खाकी नहीं बल्कि सफेद रंग की होती हैं। जी हां, हमारी बातों से अब तक तो आप समझ ही गए होंगे कि हम पश्चिम बंगाल की बात कर रहे हैं। हालांकि आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल की पुलिस खाकी वर्दी भी पहनती है। लेकिन इसी के साथ वहां सफेद वर्दी भी पहनी जाती है।
अंग्रेजों ने शुरू की ये सफेद वर्दी
अगर आपको बंगाल में पुलिस की सफेद वर्दी पहनने की वजह जानना है तो आपको इतिहास में थोड़ा पीछे जाना होगा। दरअसल, बंगाल पुलिस की इस वर्दी का ये कलर अंग्रेजों के जमाने से चला आ रहा है। बता दें कि कोलकाता पुलिस का गठन साल 1845 में हुआ था। उसके बाद साल 1945 में देश तो आजाद हो गया, लेकिन अंग्रेज कोलकाता पुलिस पर अपनी ये निशानी छोड़ गए। बंगाल पुलिस की वर्दी का सफेद रंग अंग्रेजों ने ही चुना था।
सफेद कलर होने की खास वजह
ऐसा नहीं है कि इस सफेद कलर की वर्दी के पीछे कोई खास वजह नहीं थी। दरअसल, कोलकाता एक समुद्र के किनारे बसा हुआ राज्य है। यहां पर सालभर गर्मी और नमी रहती है। ऐसे में ब्रिटिश सरकार द्वारा सफेद कलर का चयन किया गया। सफेद कलर गर्मी को रिफ्लेक्ट करता है। इसलिए सफेद रंग की वर्दी होने से पुलिसकर्मियों को गर्मी का कम एहसास होता है। यही कारण है कि बंगाल पुलिस सफेद रंग की वर्दी पहनती है।
खाकी वर्दी को भी अंग्रेजों ने किया शुरू
बता दें कि देश भर में पुलिस की खाकी वर्दी का चलन भी अंग्रेजों ने शुरू किया था। दरअसल, पहले के समय में सफेद रंग ही वर्दी ही हुआ करती थी। लेकिन ड्यूटी के दौरान वो जल्दी गंदी हो जाती थी। इसके बाद अंग्रेजों ने वर्दी को रंगवाना शुरू कर दिया। सफेद रंग की वर्दी पर अलग-अलग रंग लगाने की वजह से जवानों की यूनिफॉर्म भी अलग-अलग रंगों की दिखने लगी थी। ऐसे में यह पहचान कर पाना मुश्किल हो जाता था कि वो शख्स पुलिस का जवान ही है। इसलिए इसी समस्या से निजात पाने के लिए अंग्रेज अफसरों ने वर्दी को खाकी रंग की बनवाई। ताकि वो जल्दी गंदा न हो और शख्स जल्दी से पहचान में भी आ जाए। सबसे पहले साल 1847 में अंग्रेज अधिकारी सर हैरी लम्सडेन ने पहली बार ऑफिशियल तौर पर खाकी वर्दी को अपनाया था।
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