November 28, 2022

जब बापू के मुंह पर मुस्लिम युवक ने थूका… जानें महात्मा गांधी के जीवन से जुड़े अनसुने किस्से

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भारत देश को आजादी दिलाने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी (Father of the Nation Mahatma Gandhi) को पूरी दुनिया में एक महान व्यक्तित्व के रूप में याद किया जाता है। अपने आदर्शों और अहिंसा में प्रबल महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) को न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी विशेष सम्मान दिया जाता है। यू तो आपने गांधी के जीवन से जुड़े कई किस्से और कहानियां किताबों में पढ़ी होगी लेकिन आज हम आपको गांधी के जीवन के ऐसे अनसुने किस्से बताने जा रहे हैं, जो शायद ही आप जानते हों।
जब मुस्लिम युवक ने गांधी पर थूका था
बात भारत-पाकिस्तान के विभाजन (Partition of India-Pakistan) के बारे में है, जब देश में हिंदू-मुस्लिम दंगे (Hindu-Muslim Riots) चल रहे थे। तब बापू दंगों को शांत कराने के लिए बंगाल गए थे, जब गांधीजी नाराज मुस्लिम भाइयों को समझाने की कोशिश कर रहे थे, तभी एक मुस्लिम युवक ने महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) के चेहरे पर थूक दिया.. यह देखकर कांग्रेस सेवा दल के कार्यकर्ताओं ने उन्हें पकड़ लिया, तब गांधीजी ने कहा कि इन लोगों में गुस्सा है। और मुझे खुशी हैं कि किसी एक ने अपना गुस्सा थूका हैं भले ही मेरे मुंह पर ही क्यू न थूका हो। यह सुनकर मुस्लिम युवक गांधी के चरणों में गिर पड़ा और माफी मांगने लगा। साथ ही वहां चल रहे दंगे भी कम हो गए।
बचपन से थे डरपोक
अन्य बच्चों की तरह गांधीजी (Mahatma Gandhi) भी बचपन से ही बहुत शर्मीले और डरपोक स्वभाव के थे। गांधी जी को रात के अँधेरे में अपने घर जाने में डर लगता था और अगर उन्हें भूत-प्रेत की कहानियां सुनाई जातीं तो गांधी जी बहुत डर जाते थे, यह सब देखकर उनके घर में काम करने वाली नौकरी ने समझाया कि जब भी तुम्हें डर लगता है राम का नाम लेना राम का नाम लेते ही सारे डर भाग जायेगा। इस तरह गांधीजी बचपन से ही अपनी जुबान पर राम का नाम याद करने लगे और उनके डर को दूर कर दिया और राम के नाम से इतना प्यार हो गया कि आखिरी पल में भी उनकी मृत्यु के दौरान उनकी जुबा पर अंतिम शब्द राम का था।
जब चलती तरीन से फैंक दिया जूता
वही एक बार महात्मा गांधी ट्रेन में सफर कर रहे थे। तब इस दौरान उनका जूता चलती ट्रेन से नीचे गिर गया तो उन्होंने दूसरा जूता भी गाडी से निचे फैंक दिया। जब लोगों ने इसका कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि ‘एक जूता मेरे किसी काम का नहीं है अब कम से कम यह उसके काम तो आएगा।
किताबें पढने के थे शौकीन
महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) को जब भी कोई पुस्तक पसंद आती थी, वे मन लगाकर पढ़ते थे। एक बार महात्मा गांधी को एक किताब मिली जिसमें श्रवण कुमार और उनके माता-पिता की सेवा की कहानी थी। और उन्होंने फैसला किया कि वह भी श्रवण कुमार की तरह हमेशा अपने माता-पिता की सेवा करेंगे।
रोजाना 10 किमी पैदल चलते थे गांधी
इंग्लैंड में वकालत (Advocacy in England) की स्टडी के दौरान गांधी जी रोजाना 8 से 10 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। रोज 18 किमी पैदल चलते थे। इस लिहाज से गांधी जी पूरी दुनिया के दो चक्कर लगा सकते हैं।
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