December 3, 2022

Tips For Sleep: रात होते ही आती है भयंकर नींद… फिर भी कुछ लोग क्यों लेते हैं Sleeping Pills का सहारा, जानिए वजह

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Amazing Facts about Sleep: रात में काम करने वालों को छोड़ दिया जाए तो आमतौर पर लोग रात में सोते हैं और दिन में जागते हैं, लेकिन क्या अपने कभी सोचा है कि लोग दिन में सोते और रात में जागते क्यों नहीं है? आखिर हमे नींद रात को ही क्यों आती है, घर के बड़े क्यों कहते हैं कि रात की नींद बहुत ज्यादा अहम होती है। आपने अक्सर ऐसा महसूस किया होगा कि शाम होते-होते आपकी बॉडी में एनर्जी कम होने लग जाती है, खैर इस तरह के सवाल तो बहुत है लेकिन इनका जवाब बहुत काम ही लोग जानते हैं। अगर आप से यह पूछा जाये तो हो सकता है कि आप कहोगे कि हमेशा से यही चला आ रहा है हमारे शरीर को इसी रूटीन (Tips For Good Sleep) की आदत है इसलिए हमे रात होते ही नींद आने लगती है और पूरे दिन काम करने के बाद हमारी एनर्जी कम हो जाती है। इस वक्त में हम बस सुकून से सोना चाहते हैं। लेकिन आपका यह जवाब कितना सही है और इसमें किन बातों को बदलने या ऐड करने की जरूरत है, इसके साथ ही हम आपको बताएंगे कि नींद ना आने पर किसी तरह की दवाई या सप्लीमेंट (Sleeping Pills and Supplements) लेना सेफ है या नहीं। आइये जानते हैं:-
क्यों रात होते ही आने लगती है भयंकर नींद?
जैसा कि हम सभी जानते हैं रात के वक्त हमारी बॉडी भले ही रिलैक्स कर रही होती है, उसमे किसी तरह की कोई मूवमेंट नहीं होती है। लेकिन हमारा दिमाग इस वक्त भी काम कर रहा होता है, दिमाग का काम पूरी बॉडी को ठीक तरह से कमांड देते हुए चलना होता है। जैसे-जैसे रात होने लगती है हमारे दिमाग में स्थित पीनियल ग्रंथि (Pineal Gland) से मेलाटोनिन (Melatonin For Good Sleep) नाम का हॉर्मोन निकलता है। यही हॉर्मोन हमारे दिमाग को शांत करते हुए और शरीर में आलस लाता है। इसी वजह से हमे नींद आने लगती है, लेकिन अगर किस वहग से इसका सीक्रेशन कम हो जाता है या रुक जाता है तब व्यक्ति नींद ना आने की समस्या का सामना करता है। जब आप इस समस्या को लेकर डॉक्टर के पास जाते हो तो वह आपकी सिचुएशन के मुताबिक आपको टैबलेट्स या सप्लीमेंट्स देते हैं। वैसे तो इन दवाइयों को देने से डॉक्टर भी परहेज करते हैं, क्योंकि कई लोग ऐसे होते हैं जो इन दवाइयों पर ही निर्भर हो जाते हैं और उन्हें इन सप्लीमेंट्स की आदत हो जाती है। उनकी इस आदत के पीछे सबसे बड़ी वजह यही होती है कि वह अपनी लाइफ में उन चीजों को अपनाने या निकालने के लिए तैयार ही नहीं होते जिनसे उनका स्लीपिंग साइकिल बेहतर हो सकता है।
नींद की दावाई खाना होता है कितना सेफ?

आजकल मॉडर्न होते समय में लोग सारी रात पार्टी करना, सुबह देर तक सोना, दोपहर में कई घंटे की नींद लेना, कैफीन का अधिक मात्रा में सेवन, बहुत अधिक स्मोकिंग करना जैसी गलत आदतों का शिकार हो रहे हैं। लोगों में नींद की कमी का यह भी एक बहुत बड़ा कारण है, अगर आप भी सोने के लिए मेलाटोनिन सप्लिमेंट्स का उपयोग कर रहे हैं तो इस बात का ध्यान रखें कि इन दवाइयों की ओवर डोज या नींद लाने के लिए इस तरह के सप्लीमेंट्स की आदत ना डालें, क्योंकि यह आपकी सेहत के लिए बहुत हानिकारक साबित हो सकते हैं। इन दवाइयों का सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें और जितनी डोज बताई गई हो, सिर्फ उतनी ही डोज का सेवन का करें। इसके साथ ही जितने समय के लिए सजेस्ट किया जाए सिर्फ उतने ही समय सेवन करें। अगर आप लापरवाही करते हुए इन दवाइयों को ज्यादा मात्रा में या फिर ज्यादा समय तक खाते हैं तो इसका असर आपकी फिजिकल और मेन्टल दोनों हेल्थ पर पड़ेगा। सप्लीमेंट के ओवर डोज से शरीर में थकान रहना, हर समय नींद आना, लो एनर्जी, सिरदर्द रहना, ब्लड प्रेशर कम होना, एंग्जाइटी की समस्या, स्ट्रेस रहना जैसी प्रॉब्लम रह सकती हैं।
स्लीपिंग पिल्स के सेवन के लिए जरूर रखें इन बातों का ख्याल

अब हम आपको बताएंगे की आप मेलाटोनिन की एक्स्ट्रा डोज तो नहीं ले रहे हैं, इसका पता ऐसे लगाएंगे। दरअसल, कुछ आम से लक्षण होते हैं जिनसे आप इस बात का पता लगा सकते हैं, जैसे कि चिड़चिड़ापन, सांस लेने में तकलीफ, मूड खराब, उदासी, पेट में ऐंठन, लूज मोशन, सीने में दर्द आदि कुछ ऐसे लक्षण हैं जो आपको ओवर डोज होने का संकेत देते हैं। अब हम आपको बताएंगे कि किस मात्रा में आप मेलाटोनिन दवाइयों का सेवन कर सकते हैं, एक दिन में 1 से लेकर 5 मिलीग्राम मेलाटोनिन का इस्तेमाल करना चाहिए। इस दवाई को हर रोज नहीं लेना है, हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक सप्ताह में 2 से 3 मेलाटोनिन टैबलेट्स लेना काफी है। यहां ध्यान रखने वाली बहुत ही अहम बात ये है कि बच्चों और बड़ों की उम्र में फर्क होता है। लसलिये उनकी डोज में अंतर होना लाजमी है, बच्चों को कोई भी दवा या सप्लीमेंट देने से पहले आप डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

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