December 8, 2022

भारत ने चीन को लताड़ लगाई: कहा- श्रीलंका को मदद की जरूरत, एजेंडा न चलाएं, चीनी राजदूत का कमेंट राजनयिक शिष्टाचार का उल्लंघन

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नई दिल्ली. भारत के विरोध के बावजूद श्रीलंका के हंबनटोटा पोर्ट पर चीनी शिप ने एक हफ्ते दिन डेरा डाला। जिसको लेकर भारत ने विरोध दर्ज कराया था। बाद में इस मामले पर श्रीलंका में चीनी राजदूत की झेनहोंग ने भारत पर श्रीलंका के आंतरिक मामलों में दखल देने का आरोप लगाया। चीनी राजदूत के इस बयान पर पलटवार करते हुए भारत ने चीन को लताड़ लगाई है।
कोलंबो में इंडियन हाई कमिशन ने शनिवार को ट्वीट किया- श्रीलंका को समर्थन की जरूरत है, न कि किसी दूसरे देश के एजेंडे को पूरा करने के लिए किसी दबाव या अनावश्यक विवादों की। हाई कमिशन ने इसे राजनयिक शिष्टाचार का उल्लंघन बताया। वहीं, चीनी राजनयिक को फटकार लगाते हुए कहा कि श्रीलंका के उत्तरी पड़ोसी (भारत) के बारे में उनका रवैया उनके अपने देश के व्यवहार से प्रभावित हो सकता है।
चीनी कर्ज को लेकर भी निशाना साधा
हाई कमिशन ने कहा- हम उन्हें विश्वास दिलाते हैं कि भारत बहुत अलग है। हाई कमिशन ने चीन पर भी निशाना साधा और कहा- अपारदर्शिता और कर्ज से प्रेरित एजेंडा खासकर छोटे देशों के लिए एक बड़ी चुनौती है। हाल के घटनाओं से हमें सबक लेना चाहिए।
श्रीलंका में चीनी राजदूत की झेनहोंग ने युआन वांग 5 शिप के हंबनटोटा पहुंचने को लेकर बयान दिया था। इसमें झेनहोंग ने सीधे तौर पर भारत का नाम लिए बगैर कहा थी कुछ ताकतों की ओर से बिना किसी सबूत के सिक्योरिटी को लेकर चिंता जताना वास्तव में श्रीलंका की संप्रभुता और स्वतंत्रता में पूरी तरह हस्तक्षेप हैं। झेनहोंग ने कहा- श्रीलंका की राष्ट्रीय संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
हंबनटोटा पोर्ट पर एक हफ्ते तक मौजूद था चीनी शिप
पहले इस चीनी शिप के 11 अगस्त को हंबनटोटा पहुंचने की उम्मीद थी। भारत ने इस स्पाई शिप को लेकर श्रीलंका के सामने विरोध दर्ज कराया था। इसके बाद शिप को 16 से 22 अगस्त तक हंबनटोटा पोर्ट पर आने की अनुमति दी गई। भारत पहले ही चीन के उस बयान को खारिज कर चुका है, जिसमें कहा गया कि चीनी शिप को हंबनटोटा पोर्ट पर जाने से रोकने के लिए भारत ने श्रीलंका पर दबाव डाला। भारत ने कहा था कि श्रीलंका एक संप्रभु देश है और अपने स्वतंत्र निर्णय लेता है।
यह अनुमति इस शर्त पर दी गई थी कि वह श्रीलंका के एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन (EEZ) के भीतर ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) को चालू रखेगा और श्रीलंकाई वॉटर में कोई साइंटिफिक रिसर्च नहीं किया जाएगा। भारत को आशंका थी कि चीनी शिप के ट्रैकिंग सिस्टम श्रीलंकाई पोर्ट के रास्ते में दक्षिण भारत के प्रमुख सैन्य और परमाणु ठिकाने की जासूसी कर सकते हैं।
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