July 1, 2022

शाह के लिए भेज रहे हैं चार्टर प्लेन, यहां आकर देख लें क्राइम कंट्रोल के हमारे इंतजाम: CM गहलोत

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जयपुर. राजस्थान में कांग्रेस विधायक जौहरीलाल मीणा के बेटे के खिलाफ गैंगरेप का केस दर्ज होने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। रविवार को भाजपा नेता जितेंद्र गोठवाल ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को ट्रेन का टिकट भेजकर पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए उन्हें राजस्थान आमंत्रित किया था। सोमवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस बात को लेकर पलटवार किया। गहलोत ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को चार्टर प्लेन भेजकर राजस्थान आने का न्योता दिया है।
गहलोत ने सोमवार को ट्विटर पर जारी बयान में कहा, ‘भाजपा नेता राजस्थान में क्राइम को लेकर बार-बार प्रियंका गांधी को आमंत्रित करते हैं। जबकि प्रियंका जी किसी संवैधानिक पद पर भी नहीं हैं। हम गृहमंत्री अमित शाह के लिए चार्टर प्लेन भेजकर निवेदन करना चाहेंगे कि वो राजस्थान आएं। यहां आकर प्रदेश में कानून-व्यवस्था के संबंध में किए गए नवाचारों और अपराध के खिलाफ की गई कठोर कार्रवाई की जानकारी लें, ताकि बीजेपी की ओर से फैलाए जा रहे भ्रम दूर हो सकें।
गुजरात में बढ़ रहे अपराध, राजस्थान में कम हुए
गहलोत ने एनसीआरबी के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 2020 में लॉकडाउन होने के बावजूद जब पूरे देश में विगत वर्ष की तुलना में अपराधों में 28.03% की वृद्धि हुई तब राजस्थान में 14.46% की कमी हुई। इन आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में 2020 में डकैती, लूट, अपहरण, बलात्कार, बलवा, नकबजनी, चोरी सहित सभी तरह के अपराधों में कमी आई है। इस दौरान अमित शाह के गृहराज्य गुजरात में तो अपराध में 62.29% की वृद्धि हुई। वर्ष 2021 में भी राजस्थान में 2019 की तुलना में 4.77% की कमी हुई है।
हर पीड़ित को न्याय के लिए एफआईआर को बनाया अनिवार्य
गहलोत ने कहा कि हमारी सरकार ने एफआईआर पंजीकरण अनिवार्य करने का साहस दिखाया। यह नीति लागू करते समय हमें पता था कि अपराध के आंकड़ों में बढ़ोत्तरी होगी एवं विपक्ष तथा मीडिया इस पर सवाल उठाएगा परन्तु हर पीड़ित को इंसाफ दिलाने के लिए हमने यह नीति लागू की। पहले पॉक्सो एक्ट के पीड़ित कार्रवाई ना होने के डर से मन मसोस कर रह जाते थे परन्तु अब उनका सरकार में भरोसा जागा है एवं वे एफआईआर दर्ज करवा रहे हैं। अपराधियों को सजा मिल रही है। अनिवार्य एफआईआर पंजीकरण नीति लागू होने से पूर्व महिला अपराधों की 33.4 प्रतिशत एफआईआर सीआरपीसी की धारा 156(3) २के तहत अदालतों के माध्यम से इस्तगासे के आधार पर दर्ज होती थीं परन्तु इस नीति के बाद यह संख्या सिर्फ 16% रह गई है।
दर्ज केस की जांच की अवधि में भी आई कमी
गहलोत ने यह भी बताया कि महिला अत्याचारों का अनुसंधान समय भाजपा सरकार के दौरान 2017-18 में 274 दिन हुआ करता था जो अब अब 79 दिन रह गया है। महिला अपराधों के लिए हर जिले में एडिशनल एसपी की नियुक्ति की गई है। अदालत से भी कोई अपराधी बच ना सके इसलिए लीगल आॅफिसर्स की नियुक्ति की है। इन सभी कदमों से पीड़ितों को राहत मिली है एवं अपराधियों में भय व्याप्त हुआ है।
भाजपा शासित राज्यों से बेहतर है राजस्थान की स्थिति
गहलोत ने कहा कि मैंने प्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री को पत्र लिखकर आग्रह किया कि पूरे देश में अनिवार्य एफआईआर पंजीकरण नीति लागू हो जिससे सभी प्रदेशों के असल आंकड़े सामने आ सकें, लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हुआ है। अनिवार्य एफआईआर पंजीकरण के बावजूद अपराधों में कमी दिखाता है कि प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति भाजपा शासित राज्यों से बेहतर है। हम भाजपा की तरह अपराध पर राजनीति नहीं करते अपितु अपराधियों को कठोर सजा दिलवाकर उन्हें अंजाम तक पहुंचाते हैं।
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