December 3, 2022

Birthday Special: 40 बरस के हुए भारत के शूटिंग किंग अभिनव बिंद्रा, पढ़ें देश के पहले गोल्डन वीर की कहानी

wp-header-logo-566.png

Happy Birthday Abhinav Bindra: अभिनव बिंद्रा (Abhinav Bindra) को किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है। वह व्यक्तिगत ओलंपिक स्वर्ण पदक (Olympic gold medal) जीतने वाले पहले और केवल दो भारतीयों में से एक हैं। भारत के ओलंपिक इतिहास को सुनहरा अध्याय देने वाले अभिनव बिंद्रा आज यानि 28 सितंबर को 40 साल के हो गए हैं। देश को ओलिंपिक खेलों में पहला व्यक्तिगत गोल्ड मेडल दिलाने वाले अभिनव बिंद्रा ने अपने करियर में हर वह कामयाबी हासिल की, जो कई लोगों के लिए महज सपना होती है। इसलिए कहना खलत नहीं होगा कि अभिनव देश के पहले गोल्डन ब्वॉय (Golden Boy) हैं। आइए बताते हैं बिंद्रा के जन्मदिन (birthday special) पर उनसे जुड़ी कुछ खास बातें…
प्रॉपर पंजाबी परिवार से हैं बिंद्रा
अभिनव बिंद्रा का जन्म एक संपन्न पंजाबी सिख परिवार में हुआ (Punjabi Sikh family) था। उन्हें बचपन से ही शूटिंग का शौक था। इसलिए उनके माता-पिता ने उनके पटियाला स्थित घर (Patiala home) में शूटिंग रेंज की व्यवस्था की थी। इस तरह उनका शूटिंग का सफर शुरू हुआ। बिंद्रा को शुरू में डॉ अमित भट्टाचार्जी और बाद में लेफ्टिनेंट कर्नल ढिल्लों ने प्रशिक्षित किया था। ये दोनों अभिनव बिंद्रा के पहले कोच थे। 15 साल की उम्र में अभिनव ने 1998 के कॉमनवेल्थ खेलों (1998 Commonwealth Games) में हिस्सा लिया था और वह इन खेलों में सबसे कम उम्र के प्रतिभागी बने थे। हालांकि तब उन्हें बड़ी सफलता हासिल नहीं थी। साल 2001 के म्यूनिख विश्व कप में 597/600 के नए जूनियर विश्व रिकॉर्ड स्कोर के साथ ब्रॉन्ज मेडल (bronze medal) जीता था। इसी साल वह राजीव गांधी खेल रत्न अवॉर्ड से सम्मानित किए गए। इसके अलावा उन्हें साल 2009 में पद्म भूषण और 2011 में सेना में मानद लेफ्टिनेंट कर्नल रैंक (Colonel rank) दी गई थी।
2010 में ग्वांग्झू एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीता
अभिनव के लिए मेडल की शुरुआत साल 2002 से हुई। साल 2002 के कॉमनवेल्थ गेम्स, 2006 के मेलबर्न, 2010 में दिल्ली और 2014 में ग्लासगो के कॉमनवेल्थ खेलों (Commonwealth Games in 2002) में स्वर्ण पदक अपने खाते में डाला। उन्होंने 10 मीटर एयर राइफल (पेयर) में स्वर्ण पदक हासिल किया था। इसके अलावा 2010 में ग्वांग्झू एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल और 2014 इंचियोन एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीता। अभिनव जागरेब वर्ल्ड चैंपियनशिप 2006 में स्वर्ण पदक हासिल कर चुके। अभिनव बिंद्रा के करियर का सबसे बेहतरीन पल 2008 में बीजिंग ओलिंपिक में आया जब उन्होंने पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल इवेंट में स्वर्ण पदक जीता और उनकी स्वर्ण पदक जीत ने ओलिंपिक में भारत के लिए 28 साल (28-year gold medal) का स्वर्ण पदक सूखा समाप्त कर दिया।
इस मेडल के लिए उन्होंने बहुत मेहनत की थी। चार साल पहले एथेंस 2004 में पदक का मौका गंवाने के बाद, अभिनव बिंद्रा ने बीजिंग में होने वाले ओलिंपिक के लिए जी जान लगा दी थी। कोच हेंज रिंकीमियर और गेब्रियल बुहल्मन का देख-रेख में अपने शूटिंग कौशल को चमकाने के लिए अभिनव बिंद्रा ने जर्मनी के डोर्टमंड में काफी समय बिताया जो उनकी जीत का सूत्रधार बने। बिंद्रा बीजिंग ओलिंपिक (Beijing Olympics) से पहले कमांडो ट्रेनिंग भी की।
अब क्या कर रहे है बिंद्रा
बीजिंग ओलिंपिक में अभिनव बिंद्रा (Abhinav Bindra) चौथे स्थान पर रहते हुए फाइनल में पहुंचे थे। गोल्ड के लिए फाइनल में क्वालिफिकेशन स्टेज में शीर्ष पर रहने वाले फिनलैंड के हेनरी हेक्किनन, अभिनव बिंद्रा (Abhinav Bindra) के सामने थे। आखिरी शॉट तक दोनों बराबरी पर थे, लेकिन महत्वपूर्ण समय पर वो बिंद्रा को टक्कर नहीं दे सके और अपने अंतिम शॉट में 9.7 स्कोर ही कर सके। इस बीच, बिंद्रा ने लगभग 10.8 का स्कोर किया और गोल्ड मेडल जीता। अभिनव की जीवनी पर एक किताब भी प्रकाशित हो चुकी है, ए शॉर्ट हिस्ट्री: माय ऑबसेसिव जर्नी टू ओलिंपिक गोल्ड नाम की इस किताब के सह लेखक रोहित बृजनाथ (Rohit Brijnath) हैं। आज बिंद्रा एक सफल बिजनेसमैन और अपनी कंपनी अभिनव फ्यूचरिस्टिक् के सीओए हैं, जो एक शूटिंग के हथियार बनाने वाली जर्मन कंपनी की डिस्ट्रीब्यूटर (weapons company) है।
© Copyrights 2021. All rights reserved.
Powered By Hocalwire

source

About Post Author