October 3, 2022

Health Tips: कोरोना रिकवरी के बाद स्वास्थ्य का रखें पूरा ध्यान, हेल्दी रहने के लिए अपनाएं ये टिप्स

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Health Tips: पिछले दो सालों में कोरोना संक्रमण (Corona Infection) के कई वैरिएंट्स ने देश- दुनिया में करोड़ों लोगों को बीमार किया। इससे लाखों लोगों ने अपनी जान भी गंवाई। हाल में अपने देश में इसके ओमिक्रॉन वैरिएंट (Omicron Variant) से भी बड़ी संख्या में लोग संक्रमित हुए और कम संख्या में ही सही अभी भी लोग इससे संक्रमित हो रहे हैं। हालांकि इससे संक्रमित हुए अधिकांश लोग रिकवर (Corona Recovery) हो रहे हैं लेकिन इस वायरस को कमजोर मानकर रिकवरी के बाद लावरवाही बरतना हेल्थ के लिए नुकसानदेह हो सकता है। दरअसल, ओमिक्रॉन वैरिएंट भले ही लंग्स के अंदर नहीं जाता, लेकिन बाकी शरीर पर यह कई तरह के दुष्प्रभाव उत्पन्न कर सकता है। इसमें स्पाइक प्रोटीन का एस-1 प्रोटीन, ब्लड क्लॉटिंग और पोस्ट कोविड प्रॉब्लम्स के लिए जिम्मेदार होता है। इस प्रोटीन से उत्पन्न होने वाली टॉक्सिसिटी आगे चलकर लॉन्ग कोविड (Long Covid) या पोस्ट कोविड इलनेस (Post Covid Illness) का कारण बन सकती है। अपनी इस स्टोरी में हम आपके लिए नई दिल्ली स्थित सर गंगाराम अस्पताल के सीनियर फिजीशियन-डॉ. मोहसिन वली (Dr. Mohsin Wali) और इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल की सीनियर पल्मोनोलॉजिस्ट-डॉ. विनी कांतरू (Dr Viny Kantroo) से कोरोना रिकवरी के बाद सामने आने वाले लक्षण और उनसे बचाव के कुछ टिप्स लेकर आएं हैं। इन्हें फॉलो करके आप पोस्ट कोविज या फिर लॉन्ग कोविड जैसे समस्याओं से दूर रह कर हेल्दी रह सकते हैं।
दिख सकते हैं ये लक्षण
लॉन्ग कोविड से प्रभावित मरीज में कोरोना के कई लक्षण बने रह सकते हैं और उसे कई समस्याएं हो सकती हैं। जैसे कुछ लोगों को 2-6 सप्ताह तक थकान, कमजोरी, मांसपेशियों और सिर में दर्द, दिल की धड़कन का बढ़ जाना, सांस लेने में कठिनाई, स्किन में बदलाव आना, बाल गिरना, डायरिया, नींद में कमी जैसी समस्याएं होती हैं। कुछ लोगों का कार्डियो-पल्मोनरी प्रोफाइल प्रभावित होता है। लंग्स में ऐसे बदलाव आते हैं, जिससे उन्हें सांस लेने में दिक्कत होती है या थोड़ा-सा चलने पर सांस फूलने की समस्या होती है। हार्ट के कॉर्डिएक पैरामीटर-पेरिकराइटिस, मॉयोकराइटिस, इंडोकराइटिस में बदलाव आता है, जिससे कोरोना से रिकवर व्यक्ति की सांस फूलने लगती है। कई मामलों में व्यक्ति की ब्लड क्लॉटिंग की समस्या का पता नहीं चल पाता। ब्लड क्लॉटिंग से हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक की समस्या भी सामने आ सकती है। गैस्ट्रोएंटेस्टाइनल ट्रैक प्रभावित होने पर मरीज को पेट में दर्द, उल्टी, लूज मोशन होते हैं। मरीज में मूड स्विंग, डिप्रेशन, स्ट्रेस, ब्रेन फॉग, डर जैसी मनोवैज्ञानिक समस्याएं हो सकती हैं, जिसे पोस्ट कोविड साइकोसिस या कोविड फोबिया कहा जाता है।
कैसे होता है डायग्नोज
लॉन्ग कोविड की पहचान के लिए थ्रंबोइलास्टोग्राफी स्कैन किया जाता है, जो बहुत स्पेशलाइज लैब में किया जाता है। इससे ब्लड में छुपे हुए वायरस की जांच होती है। इसके लिए डी डाइमर, सीआरपी, ब्लड काउंट जैसे टेस्ट भी किए जाते हैं, लेकिन उनसे लॉन्ग कोविड का सटीक तरीके से पता नहीं चल पाता है।
रिकवरी के बाद रहें एक्टिव
पोस्ट कोविड कमजोरी दूर करने के लिए 108543210 नंबर याद रखें और इस पर अमल करते हुए तरह एक्टिव रहें।
लॉन्ग कोविड से बचने के उपाय
लेखक-रजनी अरोड़ा (Rajni Arora)

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