December 8, 2022

Ovarian Cancer: ओवेरियन कैंसर बन सकता है महिलाओं में मौत का कारण, जानिए क्या है इस गंभीर बीमारी के लक्षण

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Ovarian Cancer: पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं के अंदर ओवेरियन कैंसर (Ovarian Cancer) जैसी गंभीर बीमारी की समस्या बढ़ती ही जा रही है, ओवेरियन कैंसर एक ऐसी बीमारी है जो जेनेटिक (Genetic) भी हो सकती है। यह कैंसर इतनी तेजी से बढ़ता है कि कई बार इसके लक्षण लेट स्टेज में दिखाई देते हैं। ओवेरियन कैंसर के दौरान, सूजन, पेशाब में जलन, भूख न लगना, अनियमित पीरियड्स और वजन कम होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ओवेरियन कैंसर कई कारणों से हो सकता है, ओवेरियन कैंसर का पता तब तक नहीं लगाया जा सकता जब तक यह पेट और पेट के निचले हिस्से में फैल न जाए। इस बीमारी की शुरुआत में उपचार के सफल होने के ज्यादा चांस हैं। बता दें कि इस गंभीर बीमारी से शिकार 80 प्रतिशत महिलाओं को इस बीमारी के बारे में लंबे समय तक जानकारी ही नहीं होती है, जो आगे चलकर उनकी मौत का कारण बना सकता है।
क्या है ओवेरियन कैंसर? (What is Overian Cancer)
ओवेरियन कैंसर के कारण अंडाशय में कई छोटी-छोटी गांठ बन जाती हैं, जो धीरे-धीरे ट्यूमर में बदल जाती हैं। जानकारी के लिए बताते चलें कि ये गांठ महिला को गर्भवती होने से भी रोकती हैं। कभी-कभी यह ट्यूमर शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल जाता है, ओवेरियन कैंसर का समय पर इलाज न होने पर इंसान की मौत भी हो सकती है।
बढ़ी उम्र में गर्भावस्था
ओवेरियन कैंसर के सबसे बड़े कारणों में से एक बढ़ी उम्र के बाद गर्भावस्था है, विश्वभर में ओवेरियन कैंसर के मरीज दिन पर दिन बढ़ते जा रहे हैं। जीवनशैली और खान-पान में बदलाव के अलावा 35 साल की उम्र के बाद गर्भधारण से भी ओवेरियन कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। अधिक उम्र में गर्भधारण से गर्भाशय के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, जिससे कैंसर हो सकता है।
अधिक वजन के कारण
ओवेरियन कैंसर अधिक वजन या मोटापे के कारण भी हो सकता है, जिन महिलाओं का बॉडी मास इंडेक्स 30 से अधिक होता है उनमें कैंसर होने की संभावना अधिक होती है। मोटापे से ग्रस्त महिलाएं शारीरिक रूप से कम सक्रिय होती हैं, जिससे मासिक धर्म संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। मासिक धर्म की समस्या भी कई बार सिस्ट बनने का खतरा बढ़ा देती है।
फर्टिलिटी ट्रीटमेंट

जिन महिलाओं को गर्भधारण करने में परेशानी होती है, उन्हें फर्टिलिटी ट्रीटमेंट का सहारा लेना पड़ता है। आईवीएफ जैसे प्रजनन उपचार से कम घातक ट्यूमर का खतरा बढ़ सकता है। फर्टिलिटी ट्रीटमेंट के दौरान ली जाने वाली दवाएं शरीर को नुकसान पहुंचा सकती हैं। ये दवाएं गर्भाशय या योनि में अल्सर के गठन में मदद कर सकती हैं। डॉक्टर की सलाह के बिना इन दवाओं का सेवन हानिकारक हो सकता है।
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