December 3, 2022

मुख्यमंत्री ने किया हाड़ौती अंचल का हवाई सर्वे: ‘नदियों में उफान के कारण हाड़ौती में बन रहे बाढ़ के हालात, इसलिए ‘ईआरसीपी’ जरूरी’

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कोटा. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुरुवार को कहा कि हाड़ौती से चम्बल, कालीसिंध, परवन नदियों का पानी व्यर्थ बहकर समुद्र में मिल जाता है। इसका सदुपयोग पूर्वी राजस्थान कैनाल परियोजना में किया जाए तो निश्चित रूप से पूर्वी राजस्थान के 13 जिले सरसब्ज होंगे। गहलोत ने गुरुवार को कोटा, बारां जिलों के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करने के बाद मीडियाकर्मियों से बातचीत के दौरान यह बात कही। मुख्यमंत्री ने कोटा व बारां में बाढ़ प्रभावित परिवारों से मुलाकात की तथा सहायता का आश्वासन दिया।
गहलोत ने कहा कि ईआरसीपी से न केवल क्षेत्र में बाढ़ से होने वाले नुकसान को रोका जा सकेगा बल्कि 13 जिलों की प्यास भी बुझेगी। पेयजल के लिए वर्तमान में इस परियोजना का क्रियान्वयन आवश्यक है। राज्य सरकार द्वारा सर्वे कराया गया है कि ईआरसीपी में व्यर्थ बहकर जा रहे पानी से भी कम मात्रा में पानी काम में लिया जाएगा।
उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि इस योजना को बिना कारण ही होल्ड पर डाला जा रहा है। जबकि हमने चंबल नदी में जा रहे हाड़ौती की नदियों के पानी का कैलकुलेशन करवाया है। धौलपुर में हमने अधिकारियों से इसका गेज करवाया है। सीएम गहलोत ने कहा कि यह प्रोजेक्ट राजस्थान और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्रियों की बैठक में समझौता के आधार पर ही बनी है।
मध्यप्रदेश ने अपने बड़े-बड़े बांध इसमें बना लिए हैं। इन बांधों में राजस्थान से होकर ही पानी जाएगा। ऐसे में मध्य प्रदेश सरकार ईआरसीपी प्रोजेक्ट पर आॅब्जेक्शन कर रही है या फिर राजनीतिक रूप से उनसे केंद्र सरकार करवा रही है, यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा 9 हजार करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया गया है। ऐसे में केन्द्र सरकार को भी आगे आकर इस परियोजना के लिए सहयोग करना चाहिए तथा इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित करना चाहिए।
जल शक्ति मंत्री पर साधा निशाना
उन्होंने बिना नाम लिए केंद्रीय जल शक्ति मंत्री को आड़े हाथों लिया। कहा- पानी का मंत्री राजस्थान से है, क्या वह अपने प्रदेश के अंदर एक ईआरसीपी योजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करवाने के लायक भी नहीं है? क्या वह प्रधानमंत्री को राजी नहीं कर सकता। केवल एक योजना में? उन्होंने यह भी सवाला उठाया, क्या स्टेट गवर्नमेंट ने योजना बनाई है? जिस एक्सपर्ट अधिकारी ने योजना बनाई वो आज पानी मंत्रालय में एडवाइजर बनकर बैठे हैं। तब क्या दिक्कत आ रही है इनको? व्यक्ति वही है जिसने योजना बनाई, वो वहां बैठे हुए हैं। इसका मतलब पूरी राजनीति हो रही है।
एयरपोर्ट पर स्वागत
Ashok Gehlot

एयरपोर्ट पर यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल, प्रभारी मंत्री परसादीलाल मीणा, विधायक भरत सिंह, रामनारायण मीणा, रविंद्र त्यागी, पंकज मेहता, पूनम गोयल, राजेन्द्र साखला, आबिद कागज़ी, शिवकांत नंदवाना, मंजू मेहरा, राजीव भारती, राम गोपाल बैरवा, नईमुद्दीन गुड्डू, सोनू कुरैशी, मौलाना फजले हक, विजय सिंह राजू, पवन मीणा, राजीव आचार्य, संदीप भाटिया समेत पार्षदगण व पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने स्वागत किया।
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