August 18, 2022

सावन माह का दूसरा सोमवार आज: कमलेश्वर धाम की अदभुत मान्यता, यहां भक्त करते हैं शिव का आलिंगन

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लखन झांझोट/लाखेरी. श्रावण मास में कमलेश्वर धाम जाने का हर शिव भक्त को इंतजार रहता है। अध्यात्म से जुडे इस धार्मिक स्थल पर दो अद्भुत शिव विराजमान है। एक शिव को भक्त अपने आलिंगन में लाकर मन की पीड़ा सुनाते है। और दूसरे शिव उन पीड़ाओं को अपने में समेट कर भक्तों को कृतार्थ कर देते हंै। यह मान्यता वर्षो चली आ रही है।
बाथेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्ध यह मंदिर कमलेश्वर परिक्षेत्र में स्थित है। यहां शिवलिंग इतना बड़ा है जो अमुमन इस क्षेत्र में नहीं मिलता। भक्तों की आस्था है कि शिव भक्तों की पीडा को मन की पुकार सुन ग्रहण करते है।
दूसरे शिवलिंग कमलेशवर महादेव मंदिर में स्थित है जो काफी प्राचीन है। मंदिर की कलात्मकता ओजस्वी है, लेकिन उससे कहीं अधिक तेज विराजमान शिव के दर्शन में झलकते है। यहां भक्त अपने शरीर ओर आत्मा के क्लेश के निवारण के लिए भगवान महादेव की आराधना करते है।
स्नान करने से होता है चर्म रोगों का नाश
श्रावण मास में यहां पूरे महीने भक्तों का मेला लगा रहता है। ऐसी मान्यता है कि यहां के कुंड में स्नान करने से चर्म रोगों का नाश हो जाता है। यूं तो मंदिर अति प्राचीन है और इस चहुंओर लावण्य लिए कलात्मक प्रतिमाएं स्थापित हैं। यहां स्थित शिलालेख पर राजा हमीर के पिता जेत्र सिंह द्वारा इस मंदिर के जीर्णोद्धार करवाने और गुजरात विजय पर कुंड का निर्माण करवाने का उल्लेख मिलता है।

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