September 30, 2022

Health Tips: अपनी डेली लाइफ में शामिल करें ये योगासन, पेट की समस्याएं रहेंगी दूर और पाचन तंत्र बनेगा मजबूत

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Health Tips: इन दिनों मौसम बदल रहा है। ऐसे समय में ध्यान ना रखने पर पाचन तंत्र (Digestive System) से संबंधित गैस, बदहजमी, कब्ज या पेट दर्द समेत कई तरह की समस्याएं आपको परेशान कर सकती हैं। यहां हम योगा एक्सपर्ट (Yoga Expert) पुष्कल चौबे (Pushkal Choubey) से बातचीत कर आपके लिए लेकर आएं हैं कुछ योगासन, जिन्हें करने से आपका पाचन तंत्र दुरुस्त बनेगा और साथ ही साथ पाचन संबंधी समस्याएं भी दूर हो जाएंगी…
वज्रासन
इसे करने के लिए दोनों घुटनों को मोड़कर योग मैट पर इस तरह से बैठें कि आपकी पिछली जंघा और पिंडलियां चिपकी रहें और आपके नितंब दोनों एड़ियों के बीच में रहें। पैर के अंगूठे पास-पास हों। कमर एकदम सीधी रखें और अपने हाथ दोनों जंघाओं पर रखें। अब इसी अवस्था में यथाशक्ति बैठे रहें और लंबी-लंबी सांस लें। अपना ध्यान सांसों की गति पर केंद्रित रखें। पैर में दर्द या झुनझुनाहट हो तो आसन से वापस सामान्य अवस्था में आ जाएं। धीरे-धीरे आसन का समय बढ़ाएं।

लाभ- इसे करने से कब्ज से राहत मिलती है और पाचन तंत्र मजबूत होता है। पैर के पंजे और जंघाएं लचीली बनती हैं।
सावधानी- घुटनों की सर्जरी या दर्द होने पर यह आसन ना करें। बहुत अधिक देर तक बलपूर्वक ना करें।
नौकासन
सबसे पहले योग मैट पर पीठ के बल लेट जाएं। आपके हाथ जांघ के बगल में हों और आपका शरीर एक सीध में हो। अब आप सांस लेते हुए अपने सिर, पैर को 30 डिग्री पर उठाएं। अपने हाथ, पैरों की दिशा में सीधे रखें। धीरे-धीरे सांस लें और धीरे-धीरे सांस छोड़ें, इस अवस्था को अपनी सुविधानुसार बनाए रखें।

लाभ- यह आसन पेट और जंघाओं की मांसपेशियों को मजबूत करता है और पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है।
सावधानी- हृदयरोग, गर्भावस्था, मासिक धर्म, हाई बीपी जैसी परिस्थितियों में यह आसन ना करें। बगैर चिकित्सक के परामर्श के अनुसार इसे ना करें।
धनुरासन
यह आसन करने के लिए सबसे पहले मैट पर पेट के बल लेट जाएं। सांस छोड़ते हुए घुटनों को मोड़ें और अपने हाथ से टखनों को पकड़ें। सांस लेते हुए पैरों को ऊपर की ओर खींचते हुए आप अपने सिर, छाती और जांघ को ऊपर की ओर उठाएं। अपने शरीर के लचीलेपन के हिसाब से आप अपने शरीर को और ऊपर उठा सकते हैं। क्षमतानुसार आसन में रुककर फिर वापस आ जाएं।

लाभ: पाचन शक्ति बढ़ती है, आंतरिक अंगों में रक्त संचार बढ़ता है। यह आसन रीढ़ की हड्डी, पीठ, भुजाओं और जंघाओं की मजबूती, कंधे और छाती के लचीलेपन के लिए बहुत अच्छा है।
सावधानी: उच्च रक्तचाप, आंतों की सर्जरी, गर्भावस्था, अल्सर, दस्त होने पर और रीढ़ में कोई गंभीर समस्या होने पर यह आसन नहीं करना चाहिए।
रखें ध्यान
बगैर योग एक्सपर्ट से अच्छी तरह सीखे, कोई भी आसन ना करें। अगर आपको कोई शारीरिक समस्या है तो किसी भी आसन के अभ्यास से पहले चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें। वज्रासन को छोड़ कर कोई और अभ्यास पेट भरा लगने पर ना करें।
लेखक- कुमार गौरव अजीतेंदु
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