November 27, 2022

अन्नदाता पर कुदरत का कहर: 10 से ज्यादा जिलों में फसलें चौपट, सरकार से मुआवजे की मांग

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जयपुर। मानसून अपने अंतिम पडाव में पहुंच चुका है। लौटता हुआ मानसून बीते कुछ दिनों के देश के कई राज्यों में कहर बनकर ढा रहा है। राजस्थान में भी यह नुकसानदायक साबित हो रही है। पिछले तीन दिन से पूर्वी राजस्थान में तेज बारिश का दौर जारी है। शुक्रवार से सुबह से अब तक जयपुर, अलवर, दौसा, सीकर समेत कई जिलों में 100 एमएम से ज्यादा पानी बरस चुका है। इससे 10 से ज्यादा जिलों में तैयार खरीफ की फसलें चौपट हो गई। इसे देखते हुए अब सरकार से फसल खराबे के मुआवजे की मांग कर रहे है।
5 इंच बरसा पानी
बीते 24 घंटे की रिपोर्ट देखें तो अलवर के बहरोड़ में करीब 5 इंच बरसात हुई। बहरोड़ के अलावा अलवर के ही कोटकासिम, टपूकड़ा, बहादुरगढ़, दौसा जिले के सिकराय, मंडावर, भरतपुर के नगर, पहाड़ी, नदबई, चूरू के तारागढ़, सुजानगढ़ के अलावा जयपुर के कई हिस्सों में भारी बारिश हुई। भारी बारिश का दौर जयपुर, भरतपुर, कोटा संभाग के अलावा अजमेर, पाली जिलों में जारी है।
खरीफ की फसलें चौपट
जयपुर, भरतपुर, कोटा और अजमेर संभाग के जिलों में हुई अतिवृष्टि के कारण खरीफ की फसलें खराब हो गई। बाजारा, मूंग, ज्वार की फसलें जो खेत में कटी रखी थी वह पानी में भीगकर खराब हो गई। इसके अलावा जो फसल पककर तैयार है। वह भी ज्यादा बारिश के कारण खराब हो गई। राज्यसभा सांसद किरोड़ीलाल मीणा ने राज्य सरकार से फसल खराबे की रिपोर्ट तैयार कर किसानों को जल्द से जल्द मुआवजा दिलवाने की मांग की है।

भीगने से अंकुरित हुआ बाजरा
पिछले कई दिन से रूक-रूककर बारिश हो रही है। इससे खेतों में पड़ी बाजरे की बाली में ही दाने अंकुरित होने शुरू हो गए हैं तथा मवेशियों के चारे में काम आने वाली कड़बी गलकर खराब होने के कगार पर पहुंच गई है। बाजरे की पकी हुई फसल खुले में बारिश से भीगने से चारा व दाने की गुणवत्ता खराब हो गई है। जिसके बाजार भाव कम मिलने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। ऐसे में किसान अब मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
बाजरा व तिल में 60 प्रतिशत खराबा
दौसा सहित कई जिलों में बारिश से बाजरा व तिल में 50 से 60 प्रतिशत खराबा बताया जा रहा है। हालांकि कृषि विभाग अभी इससे मानने को तैयार नहीं है। बाजरे की पकी हुई फसल खुले में बारिश से भीगने से चारा व दाने की गुणवत्ता खराब हो गई है। जिसके बाजार भाव कम मिलने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। ऐसे में किसान अब मुआवजे की मांग कर रहे हैं।


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