August 18, 2022

Menstruation Myth: पीरियड्स को लेकर इन अफवाहों पर आप भी करते हैं भरोसा तो हो जाइए सावधान!

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महिलाओं के लिए पीरियड्स (Periods) एक सामान्य और नेचुरल प्रोसेस (Natural Process) है, लेकिन कई लोग इसे हीन भावना से भी देखते हैं। देश में आज भी कई ऐसे इलाके जिनमें पीरियड्स के दौरान लड़कियों को घर के बाहर किसी अलग से बने रूम में रहने के लिए मजबूर किया जाता है। कई लोग लड़कियों को ऐसे समय में घर की रसोई में एंटर नहीं करने देते क्योंकि उनका मानना है कि यह गन्दा खून है और पीरियड्स के वक्त लड़कियां अपवित्र होती हैं। ऐसे समय में लड़कियों को किसी भी पवित्र स्थान पर जाने आया हाथ लगाने की अनुमति नहीं दी जाती है। देश में पीरियड्स को लेकर आज भी कई तरह की अफवाहें और अवधारणाएं फैली हुई हैं।
ये उन दिनों (Periods) की बात है
पीरियड्स के सात दिनों के वक्त लड़कियों के साथ अलग तरह का व्यवहार किया जाता है, उन्हें एक कमरे में बंद रहने, सादा खाना खाने, उन दिनों के दौरान परिवार के बाकी सदस्यों की तुलना में अलग बर्तनों में खाना खाने के लिए, साधारण गलत धारणा या जागरूकता की कमी के कारण लोगों ने वर्षों से कई तरह की अजीब सी अवधारणाओं का पालन किया है। अब यह अवधारणाएं पीढ़ी दर पीढ़ी आगे भी बढ़ रही हैं। आइये आज हम आपको पीरियड्स से जुड़ी कुछ अवधारणाओं (Misconception About Periods) के बारे में बताते हैं, जो आज भी हमारे समाज का हिस्सा बनी हुई हैं।
इस बात का कोई भी प्रमाण नहीं है, यह बिल्कुल ही घिसी-पिटी और झूठी अवधारणा है। लेकिन अभी भी यह माना जाता है कि मासिक धर्म यानी पीरियड्स का खून अशुद्ध होता है और यही मुंहासों का कारण होता है। हालांकि, वैज्ञानिक रूप से कहें तो, मासिक धर्म का रक्त शरीर में बहने वाला सामान्य रक्त होता है और जहां तक ​​कि पीरियड्स के दौरान आने वाले मुंहासों का सवाल है, तो यह हार्मोन के उतार-चढ़ाव के कारण होता है। जो कि बहुत ही आम सी बात है।

प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम वास्तविक है, यह साबित हो चुका है कि मासिक धर्म शुरू होने से पहले पीएमएस हो जाता है। यह शरीर में हार्मोनल चेंज (Hormonal Changes) से संबंधित हैं। इसमें मूड खराब होना, फूला हुआ पेट, पैरों में सूजन, मतली, डिप्रेशन, चिड़चिड़ापन शामिल है, और पीरियड्स और मेंस्ट्रुअल साइकिल दो अलग चीजें हैं। पीरियड्स महिलाओं के दिन का चैन और रात की नींद के साथ-साथ उनकी भूख को भी बर्बाद कर देता है।
मेंस्ट्रुअल साइकिल लगभग 28 दिनों तक चलते हैं, कुछ साइकिल 21 दिनों तक भी चलते हैं। ओव्यूलेशन होने पर ये अवधि चक्र भी प्रभावित होते हैं। स्पर्म महिलों के जननांग के अंदर 5 से लेकर 7 दिनों तक भी रह सकता है। यही कारण है कि अगर आप अनप्रोटेक्टेड सेक्स करते हैं तो स्पर्म ओव्यूलेशन के साथ मिलने और अंडे के फर्टिलाइज होने तक रुक सकता है, जिसके परिणाम गर्भावस्था होती है। इसके अलावा, यदि कोई कंडोम का उपयोग किए बिना मासिक धर्म के दौरान यौन संबंध रखता है, तो इस समय होने वाले हार्मोनल परिवर्तनों के कारण एचआईवी एसटीआई जैसी बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है।
बता दें कि ऐसा जरूरी नहीं है कि हर महिला को पीरियड्स होते हों और हर महिला जिसे पीरियड्स होते हैं वह खुद को महिला मानती हो। ट्रांसजेंडर पुरुषों और गैर-बाइनरी लोगों को भी पीरियड्स हो सकते हैं, ठीक इसी तरह ट्रांसजेंडर महिलाओं और गैर-बाइनरी लोगों को पीरियड्स नहीं भी हो सकते हैं। यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि पीरियड्स केवल एक महिला का मुद्दा नहीं है, यह एक मानवीय मुद्दा है।
वर्जिनिटी एक सामाजिक अवधारणा है और इसका पीरियड केयर प्रोडक्ट्स जैसे टैम्पोन या मेंस्ट्रुअल कप का उपयोग करने, या संभोग या हस्तमैथुन करने से कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि यह सच है कि टैम्पोन या मेंस्ट्रुअल कप से हाइमन में खिंचाव आ सकता है, लेकिन इसका वर्जिनिटी खोने से कोई लेना-देना नहीं है। साइकिल चलाने जैसी गतिविधियों के कारण हाइमन स्वाभाविक रूप से टूट सकता है। इसलिए टैम्पोन या मेंस्ट्रुअल कप (Tampons And Menstrual Cup) का इस्तेमाल करना पूरी तरह से सुरक्षित है।
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