December 3, 2022

दुख के अंधेरों को खुशियों के उजालों से भरता है Diwali का त्योहार, फेमस हस्तियों से जानिए दीपोत्सव की महत्ता

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Importance Of Diwali 2022: दीपावली का पर्व हर कोई बहुत ही उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाता है। दिवाली मनाने की वैसे तो बहुत सारी अहम वजह होती हैं, लेकिन हम सभी जो वजह अक्सर सुनते आए हैं। वह है अंधकार पर रौशनी की जीत, दिवाली के दिन हर घर और हर गली दीयों और लाइट्स से इसलिए रोशन की जाती है कि अमवस्या के इस त्योहार पर डर और अशांति का अंधेरा नहीं बल्कि खुशियों और समृद्धि की रौशनी फैली हुई हो।क्या आपने कभी सोचा है हम सभी के जीवन में दीपोत्सव का क्या महत्व है? इस त्यौहार के परंपरा-मूल्य कैसे बने रहें? इन सवालों पर जानिए जानी-मानी हस्तियों के क्या है विचार:-
अंधकार से प्रकाश में लाने वाला पर्व है दिवाली
– शोभना नारायण, कथक नृत्यांगना

मेरे लिए दिवाली का मतलब है ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ यानी कि अंधकार से प्रकाश में लाने वाला पर्व। दिवाली में लक्ष्मी पूजा का अपना विशेष महत्व है। इस दिन हम लोग पारंपरिक तरीके से लक्ष्मीजी के साथ गणेशजी की भी पूजा करते हैं, दीये जलाते हैं। एक-दूसरे को उपहार देते हैं, मुंह मीठा करवाते हैं। दिवाली के बाद भाई दूज आता है। राखी के बाद भाई-बहन का यह एक बड़ा त्यौहार है। मैं बिहार से हूं तो हमारे यहां छठ पूजा भी होती है। दिवाली को जब हम अपने परिजनों के साथ मिलकर त्यौहार मनाते हैं तो इसकी खुशी दोगुनी हो जाती है। इसके साथ ही जब हम दिल से किसी संबंध को सम्मान देते हैं तो उसमें प्रेम बढ़ता है। हम अपने बच्चों को पर्वों से जुड़ी पौराणिक कथाएं जरूर सुनाएं ताकि वे अपनी परंपरा-संस्कृति से परिचित हों, उससे जुड़ें। बचपन में ही अपने मूल्यों का बीज बोया जाना चाहिए, बड़े होने पर नहीं। बच्चे अपने घर-परिवार से ही मूल्यों को ग्रहण करते हैं। दिवाली का पर्व यही सीख देता है कि हम अपने जीवन मूल्यों को सहेजें, इन्हें भूलें नहीं।
Happy Diwali 2022
दिवाली उत्सव में हमारे जीवन की नीरसता खत्म होती है
– मालती जोशी, लेखिका

कार्तिक माह में अमावस्या के दिन दिवाली का पर्व मनाया जाता है। हमारे यहां आज भी पारंपरिक ढंग से यह त्यौहार मनाया जाता है। दिवाली पर हम लोग मिट्टी के दीये में घी डालकर जलाते हैं। हर कमरे में एक-एक दीया जरूर रखते हैं। बरसात में घर गंदा हो जाता है। दिवाली के बहाने घर की साफ-सफाई हो जाती है, रंग-रोगन भी हो जाता है। इससे घर के वातावरण में बदलाव आता है। हमारे जीवन की नीरसता खत्म होती है। दिवाली पर जब परिवार के सभी लोग इकट्ठा होते हैं, तब त्यौहार मनाने में एक अलग ही आनंद आता है। इसी बहाने एक-दूसरे से मिलना-जुलना हो जाता है, अपना सुख-दुख भी बांट लेते हैं। इससे आपस में प्रेम भी बढ़ता है। जहां तक दिवाली के रीति-रिवाजों को सहेजने की बात है तो आज के जमाने में जहां एकल परिवार हैं, पति-पत्नी दोनों काम-काजी हैं, उनके पास समय की कमी है, वे अपने बच्चों को समय नहीं दे पाते हैं। ऐसे में जरूरी है, घर के बड़े-बुजुर्ग बच्चों को अपने त्यौहारों के रीति-रिवाजों के बारे में बताएं, तभी वे त्यौहारों के महत्व के बारे में समझ सकेंगे, उसके मूल्य बचे रहेंगे।
Happy Diwali 2022
दीप जलाने का मतलब है खुशियां मनाना
– डॉ. नीतू कुमारी नूतन, लोकगीत गायिका

दीपोत्सव का त्यौहार दिवाली हमारे जीवन में बहुत महत्व रखता है। इस दिन हर घर में दीया जरूर जलाया जाता है। दिवाली पर मैं अपने घर की साफ-सफाई जरूर करती हूं। रोशनी के लिए मोमबत्ती की जगह मिट्टी के दीये जलाती हूं। हमारे यहां दिवाली के बाद छठ पूजा होती है, परिवार के लोग आपस में मिलते हैं। त्यौहार परिवार के साथ मनाना ही अच्छा लगता है। अब तो किसी के पास समय ही नहीं है। सभी अपने काम के सिलसिले में अपने शहर से दूर बाहर रहते हैं। त्यौहार पर सब एक साथ होते हैं। इससे आपसी प्रेम-लगाव बढ़ता है। यह जान लें, हम जो अपने परिवार के बीच रहकर करते हैं, हमारे बच्चे वही देखकर सीखते हैं। इसलिए अपने बच्चों को अपने रीति-रिवाज, परंपराओं और उसके पीछे छुपे संदेश के बारे में जरूर बताएं। हम उन्हें बताएं कि दिवाली पर भगवान राम सीता को लेकर अयोध्या में आए थे, उनके आने की खुशी में दीये जलाए गए थे। दीप जलाने का मतलब है, खुशियां मनाना। जब हम अंदर से आनंदित होंगे तो परिवार को भी खुशी दे पाएंगे।
Happy Diwali 2022
हम सभी के लिए मिलन का त्योहार है दिवाली
– चारूल मलिक, टीवी एक्ट्रेस

इस दौड़ती-भागती जिंदगी में हमारे पास रिश्ते निभाने के लिए वक्त ही नहीं है। लोग त्यौहार की शुभकामनाएं व्हाट्सऐप पर देते हैं। जब दूर शहर में नौकरी कर रहे बच्चे अपने माता-पिता को दिवाली की शुभकामनाएं व्हॉट्सऐप पर देते हैं तो बहुत दुख होता है। जरा सोचें, माता-पिता का चेहरा कितना खिल उठेगा, जब उनके बच्चे दिवाली पर उनसे मिलें, उनके साथ बैठकर बातें करें, अपनी मां के हाथ का लड्डू खाएं। मेरे लिए दिवाली मतलब, अपने माता-पिता, भाई-बहन और रिश्तेदार, दोस्तों के साथ वक्त बिताना है। दिवाली हम सभी के लिए मिलन का त्यौहार है, रिश्तों को मजबूत करने और गिले-शिकवे दूर करने का त्यौहार है। दिवाली में घरों की सफाई करने की परंपरा नहीं होती तो शायद हम व्यस्तता का बहाना बताकर घर की सफाई भी साल में एक बार नहीं करते। मैं तो यही कहूंगी कि दिवाली पर घर के रंग-रोगन के साथ दिल के दरवाजे भी खोल दें, सबसे प्यार से मिलें। दिवाली पर दिलों में खुशियों के दीप जरूर जलाएं। सभी को हैप्पी दिवाली..।
प्रस्तुति : संध्या रानी, पूजा सामंत
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