May 27, 2022

World TB Day 2022: क्यों मनाया जाता है टीबी डे, जानिए क्या है इसका इतिहास

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World TB Day 2022: हर साल 24 मार्च को पूरे विश्व में टीबी दिवस (TB Day) मनाया जाता है। क्षय रोग (TB) फेफड़ों का एक गंभीर संक्रमण (Serious Infection) है। टीबी एक बैक्टीरिया के कारण होता है जो खांसने या छींकने पर हवा में फैली हुई छोटी-छोटी बूंदो से फैलता है। जबकि ट्यूबरक्लोसिस (Tuberculosis) यानी तपेदिक शब्द 1834 में जोहान शोनेलिन (Johann Schonlein) द्वारा दिया गया था, ऐसा माना जाता है कि सीडीसी (CDC) के अनुसार, यह संक्रमण लगभग 3 मिलियन वर्षों पुराना है।
1700 के दशक में, टीबी को ‘सफेद प्लेग’ (White Plague) कहा जाता था, क्योंकि इसमें रोगी एकदम सफेद पड़ जाता है। 24 मार्च, 1882 को डॉ रॉबर्ट कोच (Dr. Robert Koch) ने टीबी पैदा करने वाले बैक्टीरिया की खोज की था। खोज के ठीक एक सदी बाद, उसी दिन विश्व टीबी दिवस (Tuberculosis Day) मनाया जाने लगा। टीबी पैदा करने वाले बैक्टीरिया से संक्रमित कई लोगों में लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। ज्यादातर लक्षण वाले लोग खांसी की शिकायत करते हैं जो दो या तीन सप्ताह से अधिक समय तक रहती है। इसमें खांसी के साथ खून या गाढ़ा बलगम होता है। इसके साथ ही इससे पीड़ित व्यक्ति को रात में पसीना आता है, थकान या कमजोरी महसूस होती है, वजन और भूख कम हो जाती है, अन्य लक्षणों में बुखार होता है।
महत्व और इस साल का थीम
संक्रामक रोग के बारे में जागरूकता बढ़ाने और वैश्विक टीबी महामारी को समाप्त करने के प्रयासों को तेज करने के लिए हर साल 24 मार्च को विश्व टीबी दिवस मनाया जाता है। 24 मार्च साल 1882 में, डॉ रॉबर्ट कोच ने घोषणा की कि उन्होंने तपेदिक का कारण बनने वाले जीवाणु की खोज की है। इस साल के टीबी डे की अगर बात करें तो इस साल विश्व टीबी दिवस 2022 की थीम ‘टीबी को समाप्त करने के लिए निवेश करें। जीवन बचाएं।’ (Invest to End TB. Save Lives.) है। ये थीम वैश्विक नेताओं द्वारा टीबी के खिलाफ लड़ाई में तेजी लाने और टीबी को समाप्त करने की प्रतिबद्धताओं को प्राप्त करने के लिए संसाधनों के निवेश की तत्काल आवश्यकता को बताती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation) के मुताबिक, यह थीम कोविड-19 (COVID-19) महामारी के संदर्भ में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जिसने टीबी के खात्में की प्रगति को खतरे में डाल दिया है। इसके साथ ही ये थीम सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज प्राप्त करने की दिशा में डब्ल्यूएचओ (WHO) के अभियान के अनुरूप रोकथाम और देखभाल के लिए समान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए रखी गई है।
इतिहास
सीडीसी के अनुसार, तपेदिक लगभग 3 मिलियन वर्ष पुराना है और विभिन्न सभ्यताओं में इसके अलग-अलग नाम थे। टीबी को प्राचीन ग्रीस में “फथिसिस” (Phthisis), प्राचीन रोम में “टैब” (Tabes) और प्राचीन हिब्रू में “स्केफेथ” (Schachepheth) कहा जाता था। 1800 के दशक में टीबी को “कंसम्पशन” (Consumption) के रूप में भी जाना जाता था। मध्य युग के दौरान, गर्दन और लिम्फ नोड्स के टीबी को “स्कोफुला” (Scofula) कहा जाता था। स्कोफुला को फेफड़ों में टीबी से अलग बीमारी माना जाता था। वहीं अगर भारत की बात करें तो टीबी रोगियों के अलगाव और उपचार के लिए पहला ओपन एयर संस्थान 1906 में अजमेर के पास तिलौनिया और हिमालय में अल्मोड़ा में 1908 में शुरू किया गया था। देश में टीबी एसोसिएशन ऑफ इंडिया के साथ देश में टीबी विरोधी आंदोलन को गति मिली, जिसकी स्थापना 1939 में हुई थी।
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