October 4, 2022

Travel: वाराणसी घूमने का बना रहे प्लान तो घाट के अलावा ये जगहें हैं बहुत खास

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Travel: काशी (Kashi), बनारस (Banaras) या वाराणसी (Varanasi) गंगा नदी (River Ganga) पर बसा भारत का सबसे प्राचीन शहर (Oldest City of India) है, जिसका सनातम धर्म (Sanatan Dharma) में एक खास महत्व है। अगर आप आध्यात्मिकता का अनुभव करना चाहते हैं तो ये जगह आपके लिए बेस्ट है। लगभग 2,800 सालों से बसा हुआ ये शहर सनातन धर्म के पवित्र स्थानों में से एक है। श्रद्धालु मानते हैं कि वाराणसी वह जगह है जहां वे पुनर्जन्म के चक्र से मुक्त हो सकते हैं और मृत्यु पर परमात्मा के साथ एकजुट हो सकते हैं। वाराणसी के आकर्षण का केंद्र दशाश्वमेध, अस्सी और मणिकर्णिका घाट के अलावा यहां की गलियां, दुकाने और कई जगहें ऐसी हैं, जो अपने आप में एक इतिहास समेटे हुए हैं। अपनी इस स्टोरी में हम आपको घाटों के अलावा काशी में घूमने वाली जगहों के बारे में बताएंगे…
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर (Shri Kashi Vishwanath Temple)
हिंदू तीर्थयात्री और पर्यटक समान रूप से मणिकर्णिका घाट के पास वाराणसी जंक्शन रेलवे स्टेशन से लगभग चार किलोमीटर दूर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर तक पहुंचने के लिए हजारों मील की यात्रा करते हैं। हिंदू देवता शिव को समर्पित लगभग 800 किलोग्राम शुद्ध सोने में चढ़ाया गया और इस कारण इसे “द गोल्डन टेम्पल” का उपनाम दिया गया। इस मंदिर की विशिष्ट डिजाइन ने पूरे भारत में सैकड़ों अन्य मंदिरों की आर्किटेक्ट्स को प्रेरित किया है। सुरक्षा कारणों के कारण यहां मोबाइल फोन, कैमरा आदि ले जाना मना है।

बनारस हिन्दु यूनिवर्सिटी (Banaras Hindu University)
बनारस हिन्दु विश्वविद्यालय साल 1916 में अपनी स्थापना के बाद से ही इस शहर का आकर्षण का केंद्र रहा है। यह विश्व विद्यालय 25,000 से अधिक छात्रों का घर है, जो इसे एशिया के सबसे बड़े आवासीय विश्वविद्यालयों में से एक बनाता है। अगर आप शहर की भीड़ भाड़ से बचना चाहते हैं तो आप 1,300 एकड़ के बने इस विश्वविद्यालय में कुछ देर शांति के पल बिता सकते हैं। कैंपस में नया विश्वनाथ मंदिर है, जो कि काशी विश्वनाथ मंदिर की तर्ज पर बनाया गया है।

विश्वविद्यालय के पर्यटक को परिसर में संग्रहालय, भारत कला भवन भी घूम सकते हैं। सांस्कृतिक संस्थान में पुरातत्व और कलात्मक महत्व की 100,000 से अधिक अन्य कलाकृतियों के साथ-साथ लघु चित्रों का एक शानदार संग्रह है।
श्री दुर्गा मंदिर (Shri Durga Temple)
वाराणसी के आसपास की आध्यात्मिक गतिविधियाँ केवल घाटों तक ही सीमित नहीं हैं। अस्सी घाट के पश्चिम में सिर्फ पांच मिनट की पैदल दूरी पर, श्री दुर्गा मंदिर उन हिंदुओं के लिए एक लोकप्रिय आकर्षण है जो देवी दुर्गा को श्रद्धांजलि देना चाहते हैं। ये 300 साल पुराना मंदिर लाल रंग में रंगा हुआ है। आप 300 साल पुराने मंदिर को देखने से नहीं चूक सकते – इसे ऊपर से नीचे तक चमकीले लाल रंग से रंगा गया है। इसे मंकी टेंपल भी कहते हैं, आपको उन जीवों के बारे में एक सुराग देता है जो आपको इस क्षेत्र में झूलते हुए मिल सकते हैं। आप मंदिर के बाहर पानी के कुंड पर तैरते हुए कुछ सुंदर हंसों को भी देख सकते हैं।

रामनगर का किला (Ramnagar Fort)
भारत में कुछ ही ऐसी जगहें हैं जहां पर किले न हो। देश के सबसे पुराने शहर में भी आपको एक किला मिल जाएगा। शहर के केंद्र से लगभग 14 किलोमीटर की दूरी पर आपको रामनगर का किला है। 18वीं सदी में बलुआ पत्थर से बना ये किला विंटेज ऑटोमोबाइल, विस्तृत हुक्का, प्राचीन हथियारों, गहनों से सजी सेडान कुर्सियों और एक अद्वितीय संग्रहालय के साथ एक विचित्र संग्रहालय है। इस म्यूजियम में आपको 150 साल से भी ज्यादा पुरानी एस्ट्रोनॉमिकल घड़ी भी देखने को मिलेगी। संग्रहालय में पुरातात्विक खजाने की खोज का आनंद लेने के बाद,आप किले के मंदिरों में भी घूम सकते हैं, जिनमें से एक महाभारत के लेखक वेद व्यास और अन्य महत्वपूर्ण हिंदू महाकाव्यों का सम्मान करता है।

धमेक स्तूप (Dhamek Stupa)
वाराणसी निश्चित रूप से सनातन धर्म का गढ़ है, लेकिन यहां से 12 किलोमीटर से भी कम दूर सारनाथ गांव में बौद्ध धर्म भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराता है। यहां, आपको धमेक स्तूप मिलेगा, जो एक विशाल पत्थर और ईंट की संरचना है जिसकी लंबाई 43.6 मीटर और व्यास 28 मीटर है। स्तूप का निर्माण 1,500 साल पहले एक संरचना के प्रतिस्थापन के रूप में किया गया था जो 249 ईसा पूर्व की थी। श्रद्धालुओं का मानना ​​है कि बुद्ध अपना पहला उपदेश देने के लिए धमेक स्तूप आए थे, जिन्होंने आत्मज्ञान की प्राप्ती के बाद आष्टांगिक मार्ग का खुलासा किया था। जब आप आकर्षण के चारों ओर घूमते हैं तो स्तूप की दीवारों को ढकने वाले पक्षियों, लोगों और फूलों की सुरुचिपूर्ण नक्काशी आपके मन को भा जाएगी।

सारनाथ में कई अन्य पर्यटन स्थल भी हैं। चौखंडी स्तूप जो कि एक बौद्ध मंदिर है कहते हैं कि उसका निर्माण 6वीं शताब्दी में हुआ था। सारनाथ म्यूजियम में अशोक की लॉइन कैपिटल को देख को देख सकते हैं। ये एक मूर्ति है जो 250 ईसा पूर्व में अशोक स्तंभ के ऊपर बनी हुई थी और 1950 में भारत का आधिकारिक प्रतीक बन गया। यहां से वाराणसी वापस जाने से पहले आप शांतिपूर्ण तिब्बती मंदिर में दर्शनीय स्थलों की यात्रा भी कर सकते हैं।
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