February 6, 2023

अर्जुन व भीम अवार्ड से सम्मानित खिलाड़ी साबिर अली का हुआ निधन

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अर्जुन व भीम अवार्ड़ी साबिर अली का फाइल फोटो।

यमुनानगर। रादौर क्षेत्र के गांव नाचरौन के अर्जुन व भीम अवार्ड से सम्मानित एवं रेलवे में डिप्टी चीफ कमर्शियल मैनेजर के पद से सेवानिवृत साबिर अली (70) का नई दिल्ली रेलवे अस्पताल में निधन हो गया। वह रादौर क्षेत्र के एकमात्र अर्जुन व भीम अवार्ड से सम्मानित खिलाड़ी थे। जिनकी गिनती देश के बड़े एथलेटिक्स खिलाड़ियों में होती थी। उन्हें सोमवार को उनके पैतृक गांव नाचरौन के कब्रिस्तान में दफनाया जाएगा। उनके निधन पर निधन पर रोटरी क्लब रादौर, इनरव्हील क्लब,सिटी पार्क वेलफेयर एसोसिएशन, वेलफेयर एसोसिएशन, जाट सभा रादौर समेत विभिन्न संस्थाओं ने गहरा दुख जताया है।
हल्का रादौर विधायक डॉ. बीएल सैनी ने कहा कि अर्जुन अवार्ड विजेता साबिर अली के निधन से देश ने एक महान खिलाड़ी को हमेशा के लिए खो दिया है। जिसकी भरपाई करना संभव नहीं है। वह युवाओं के प्रेरणास्रोत थे। वह सरकार से मांग करेंगे कि सरकार उनके नाम पर रादौर क्षेत्र में खेल स्टेडियम का निर्माण करवाये। जो इस महान खिलाड़ी को एक सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
यह रहा जीवन सफर
यमुनानगर जिले के गांव नाचरौन में एक गरीब लुहार परिवार में शमसु के घर जन्मे साबिर अली ने अपनी मेहनत के बलबूते पर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया। एमएलएन कॉलेज रादौर में वह चार वर्षों तक लगातार बेस्ट एथलीट रहे। उसके बाद उन्होंने जगाधरी वर्कशाप में चतुर्थ श्रेणी की नौकरी हासिल की। उसके बाद उसने रेलवे की ओर से खेली गई प्रतियोगिताओं में बेस्ट एथलीट बनकर ट्रैफिक इंस्पेक्टर के पद पर रेलवे द्वारा पदोन्नति दी गई। उसके बाद वह लगातार दस वर्षों तक नेशनल चैंपियन रहे। 1981 में उन्हें देश की ओर से एशियाई खेलों में जापान के टोक्यो शहर में खेलने का मौका मिला। टोक्यो में उन्होंने एथलेटिक्स खेलों में गोल्ड मेडल जीता। जिसके बाद तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने उन्हें अर्जुन अवार्ड से नवाजा। 1981 मेें ही हरियाणा के राज्यपाल ने उन्हें प्रदेश का खेलों में दिया जाने वाला भीम अवार्ड देकर सम्मानित किया। काठमांडू में खेले गए साउथ एशियाई खेलों में उन्होंने दो सिल्वर मेडल जीते। इस्ट जर्मनी में खेले गए वर्ल्ड रेलवे गेम्स में उन्होंने सिल्वर मेडल जीता। चेकोस्लोवाकिया में खेले गए वर्ल्ड रेलवे गेम्स में उन्होंने सिल्वर मेडल जीता। दस साल तक वह रेलवे के बेस्ट एथलीट रहे। 1981 में ही उन्हें जर्नलिस्ट एसोसिएशन द्वारा बेस्ट एथलीट का अवार्ड दिया गया। 1983 में कुवैत में आयोजित हुए खेलों में उन्हें इंडियन टीम का कप्तान बनाया गया। 1989 में रेलवे ने उन्हें गजटेड अधिकारी नियुक्त किया। 1992 से 2000 तक वह रेलवे के चीफ कोच रहे।
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