January 29, 2023

राजपथ पर नहीं बल्कि इस जगह पर हुई थी पहली परेड, जानें Republic Day Parade का इतिहास

wp-header-logo-345.png

Where was the first Republic Day parade held: 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस (Republic Day 2023) के रूप में मनाया जाता है। इस दिन हमारे देश का संविधान लागू हुआ था। हर भारतीय घर में गणतंत्र दिवस की सुबह का आगाज टीवी के सामने बैठकर परेड शुरू होने के इंतजार के साथ होता है। बच्चे से लेकर बड़ों तक हर किसी को परेड देखने में बहुत मजा आता है। हम सभी सालों से परेड देखते आ रहे हैं, इसलिए हम ये जानते हैं कि परेड राजपथ पर होती है। लेकिन, सवाल ये उठता है कि क्या हमेशा से परेड राजपथ पर ही होती है? सबसे पहली परेड कब और कहां हुई थी? दरअसल, सच्चाई ये है कि दिल्ली में 26 जनवरी 1950 को पहली गणतंत्र दिवस की परेड राजपथ पर न होकर इर्विन स्टेडियम यानी आज के नेशनल स्टेडियम के पास हुई थी।
साल 1950 से 1954 के बीच इन जगहों पर हुई परेड
यहां जानने वाली बात ये है कि साल 1950 से 1954 के बीच दिल्ली में गणतंत्र दिवस के समारोह का आयोजन कभी इर्विन स्टेडियम, किंग्सवे कैंप, लाल किला तो कभी रामलीला मैदान में हुआ था। वहीं, राजपथ की बात करें तो साल 1955 में पहली बार गणतंत्र दिवस की परेड राजपथ पर हुई थी। सालों से चला आ रहा ये सिलसिला आज भी जारी है, अब आठ किलोमीटर की दूरी तय करने वाली यह परेड रायसीना हिल से शुरू होकर राजपथ, इंडिया गेट से गुजरती हुई लालकिला पर जाकर खत्म होती है।
बता दें कि आजादी के आंदोलन से लेकर देश में संविधान लागू होने तक 26 जनवरी की तारीख का अपना अलग महत्व रहा है। इसी दिन, जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन (Lahore session) में एक बहुत ही अहम प्रस्ताव पारित हुआ था। इस प्रस्ताव में कहा गया था कि अगर ब्रिटिश सरकार ने 26 जनवरी 1930 तक भारत को उपनिवेश का दर्जा (डोमीनियन स्टेटस) नहीं दिया, तो भारत को पूरी तरह से आजाद घोषित कर दिया जाएगा।
26 जनवरी को मनाया जाता था स्वतंत्रता दिवस?
कांग्रेस की बातों पर ध्यान ना देते हुए ब्रिटिश सरकार ने इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखाई। इसके बाद 31 दिसंबर 1929 की आधी रात को भारत की पूरी आजादी की घोषणा करते हुए यह आंदोलन सक्रिय हो गया। कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में पहली बार तिरंगा फहराया गया। इसके साथ ही आजादी मिलने से पहले ही 26 जनवरी को अनौपचारिक रूप से देश का स्वतंत्रता दिवस बन गया। यही कारण था कि कांग्रेस उस दिन से 1947 में आजादी मिलने तक, पूरे 18 साल 26 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाती रही। इसके बाद साल 1950 में देश के पहले भारतीय गवर्नर जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (Chakravarti Rajagopalachari) ने 26 जनवरी को भारत को एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य (Sovereign Democratic Republic) घोषित किया। इसके बाद भारत के पहले राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद (Dr. Rajendra Prasad) को शपथ दिलाई गई।
राजपथ पर कब से हुई थी परेड की शुरुआत?
यही वो समय था जब शपथ लेने के बाद राजेंद्र बाबू को तोपों की सलामी दी गई। आज भी राष्ट्रपति को सलामी देने की परंपरा कायम है। उस वक्त इर्विन स्टेडियम में हुई मुख्य गणतंत्र परेड को देखने के लिए तकरीबन 15 हजार लोग आए थे। तब देश के प्रथम राष्ट्रपति ने इर्विन स्टेडियम में तिरंगा फहराकर परेड की सलामी ली। उस समय हुई परेड में सशस्त्र सेना के तीनों बलों ने हिस्सा लिया था। इस परेड में नौसेना, इन्फेंट्री, कैवेलेरी रेजीमेंट, सर्विसेज रेजीमेंट के अलावा सेना के सात बैंड भी शामिल हुए थे। उस वक्त से आज तक इस ऐतिहासिक परंपरा को कायम रखा गया है। इसके बाद 1951 से गणतंत्र दिवस समारोह किंग्स-वे पर होने लगा, जिसे राजपथ और अब कर्तव्यपथ के नाम से जाना जाता है।
© Copyrights 2023. All rights reserved.
Powered By Hocalwire

source

About Post Author