February 6, 2023

भारत-पाकिस्तान युद्ध 1971 के हीरो रहे भैरों सिंह राठौड़ का निधन, जोधपुर एम्स में ली अंतिम सांस

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जयपुर। भारत-पाकिस्तान युद्ध के हीरो रहे भैरों सिंह राठौड़ का जोधपुर में निधन हो गया है। भैरों सिंह 1987 में बीएसएफ से सेवानिवृत्त हुए थे और इन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं कारण हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया था। राठौर 1971 युद्ध के वेटरन हैं जो उस दौरान लोंगेवाला पर तैनात थे और असाधारण पराक्रम दिखाया था। भैरो सिंह को सेना मेडल से सम्मानित किया गया था। राठौड़ के निधन से उनके गांव में शोक की लहर छा गई। बीएसएफ ने इनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि बीएसएफ उनकी, साहस और कर्तव्य के प्रति समर्पण को सलाम करता है। प्रहरी परिवार इस कठिन समय में उनके परिवार के साथ खड़ा है।
पीएम मोदी, अमित शाह, अशोक गहलोत और वसुंधरा ने जताया शोक
लोंगेवाला युद्ध के हीरो भैरोसिंह राठौड़ के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, ग्रहमंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व सीएम वसुंधरा राजेन सहित कई दिग्गज हस्तियों ने शोक जताया है। राजे ने कहा कि 1971 के युद्ध के नायक भैरों सिंह राठौड़ जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। लोंगेवाला पोस्ट पर सेना के साथ बीएसएफ की एक छोटी सी टुकड़ी का नेतृत्व करते हुए उन्होंने अपने पराक्रम से दुश्मन को परास्त कर भारत माता का मस्तक ऊँचा किया। उनकी वीरता पर हर भारतीय को हमेशा गर्व रहेगा।
जोधपुर एम्स में ली अंतिम सांस
भैरों सिंह पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे। इलाज के लिए उनको जोधपुर एम्स में भर्ती कराया गया था। वहीं पर सोमवार को दोपहर में भैरों सिंह ने अंतिम सांस ली। भैरों सिंह बेटे सवाई सिंह के अनुसार उनको 14 दिसंबर को एम्स में भर्ती कराया गया। उस वक्त उनका स्वास्थ्य बिगड़ गया और उनके शरीर के अंगों में पैरालिसिस हो गया था।
लोंगेवाला में अदम्य साहस से रचा था इतिहास
भैरों सिंह का गांव सोलंकिया तला जोधपुर से करीब 120 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। बीएसएफ में रहने के दौरान सिंह को भारत-पाक बॉर्डर पर स्थित लोंगेवाला चौकी पर तैनात किया गया था। वहां वे बीएसएफ की एक छोटी टुकड़ी को कमांड करते थे। वहां भारतीय सेना की 23 पंजाब रेजिमेंट की एक कंपनी भी तैनात थी। इन जांबाजों ने 5 दिसंबर 1971 को वहीं पर पाकिस्तानी ब्रिगेड और टैंक रेजिमेंट को नेस्तनाबूत कर दिया था।
1987 में हुए थे सेवानिवृत्त
भैरों सिंह राठौड़ 1987 में सेवानिवृत्त हुए थे। उसके बाद वे अपने गांव में ही रहने लगे थे। उम्र के इस पड़ाव में भी भैरों सिंह राठौड़ काफी एक्टिव रहते थे। एम्स में भर्ती होने के बाद बीएसएफ के अधिकारी उनके स्वास्थ्य की जानकारी ले रहे थे। राठौड़ के निधन से उनके गांव में शोक की लहर छा गई।
 


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