December 3, 2022

Knowledge News : आखिर सर्दी में क्यों कंबल या स्वेटर में दिखती है चिंगारी, जानिए इसके पीछे की वजह

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सर्दियों (Winter) की शुरुआत हो चुकी है। लोगों को सुबह-शाम ठंड का अहसास होने लगा है। इस ठंड से बचने के लिए लोग अब तरह-तरह के उपाय करते नजर आएंगे। कोई आग जलाकर ठंड को कम करता दिखेगा, तो कोई घर से बाहर निकलते हुए स्वेटर-जैकेट का सहारा लेगा। वहीं कुछ लोग घर के अंदर कंबल में लिपटे दिखाई देंगे। सर्दियों के मौसम में आपने अक्सर एक बात पर ध्यान दिया होगा कि जब हम सर्दियों में बहुत देर बाद ऊनी कपड़े या फिर कंबल को उतारते हैं, तो उनमें से चट-चट की आवाज आती है। वहीं कई बार हमें चिंगारी (Spark) भी दिखाई देती है। क्या आप जानते हैं कि ऐसा क्यों होता है। आपमें से बहुत से लोगों का जवाब शायद ना ही होगा। तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि ऐसा क्यों होता है।
जिस तरह से जब दो बिजली के तार आपस में टकराते हैं, तो हमें चिंगारी देखने को मिलती है। ठीक उसी तरह ही स्वेटर और कंबल के साथ भी ऐसा ही होता है। इसके पीछे का साइंस तार की तरह ही है। अमेरिकी वैज्ञानिक बेंजामिन फ्रैंकलिन ने साल 1752 में बताया था कि बिजली कड़कना और कपड़ों में उत्पन्न होने वाली चिंगारी वास्तव में एक ही घटना है। हालांकि इस पर ठोस फैक्ट्स इकट्ठा करने और उन्हें साकार होने में लगभग 2000 से भी ज्यादा साल लग गए थे।
इसलिए नजर आती है चिंगारी
ठंडी के मौसम में जब हम अपने शरीर से किसी भी ऊनी वस्त्र को उतारते हैं, तब हमारी त्वचा में रगड़ के कारण बाल खड़े हो जाते हैं। फिर इसके बाद कपड़ों में एक तरीके से चार्ज इकट्ठा हो जाता है। इसके साथ ही इसमें स्टैटिक इलेक्ट्रिसिटी पैदा होती है। जब कपड़े हमारी त्वचा के संपर्क में आते हैं तो इस स्टैटिक इलेक्ट्रिसिटी की वजह से स्वेटर निकालते हुए करंट की स्थिति पैदा होती है।
उस समय कपड़े और शरीर का करंट एक तरीके से साथ में टकराता है और हमें चिंगारी सी दिखती है। इसी अट्रैक्शन और रिपल्शन के कारण हमें चट-चट की आवाज भी सुनाई देती है। आसान भाषा में कहें तो चिंगारी स्टैटिक इलेक्ट्रिसिटी की वजह से निकलती है, जो गर्म कपड़ों में इकट्ठा हो जाती है। इस तरह की आवाज सिंथेटिक या फिर ऊनी कपड़ो से ही आती है।
वहीं दूसरी तरफ जब हम सूती कपड़े पहनते है या फिर नंगे पैर फर्श पर हो तो यह आवाज नहीं आती। इसकी वजह यह है कि घर्षण से उत्पन्न बिजली नंगे पैरों से होकर फर्श में समा जाती है। इसलिए हमें चिंगारी की आवाज नहीं सुनाई देती।
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