December 3, 2022

बीजेपी ने 'दो सीटों से दोबारा सरकार' तक का सफर तय किया, आज दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी!

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भारतीय जनता पार्टी ने दो सीटों पर सीमित रहने के बाद दो बार लगातार सरकार बनाकर राजनीति की तस्वीर बदल दी है। दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करने वाली बीजेपी की नींव आज के ही दिन 21 अक्टूबर 1951 को रखी गई थी। बीजेपी देश की पहली ऐसी गैर-कांग्रेसी पार्टी (Non-Congress Party) है, जो पिछले आठ सालों से केंद्र में पैर टिकाए है और लोगों के दिलों में राज कर रही है। इस मुकाम को हासिल करने के लिए बीजेपी को कई मुश्किल पड़ावों को पार करना पड़ा। आज देश में 300 से ज्यादा सीटों पर परचम लहराने वाली बीजेपी ने कभी ऐसे दिन भी देखे है, जब पार्टी को लोकसभा चुनाव में केवल 2 सीटे मिली थी। बीजेपी के इस सफर की शुरूआत उस वक्त हुई, जब 1951 में दिल्ली में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी (Dr. Shyama Prasad Mukhargi) ने भारतीय जनसंघ (Bhartiya jansangh) की स्थापना की थी। उस वक्त उनका चुनाव चिन्ह दीपक हुआ करता था।
1- जनसंघ से लेकर जनता पार्टी तक का सफर

1957 में हुए लोकसभा चुनाव में जनसंघ पार्टी को 4 सीटे मिली थी, वहीं साल 1962 में 14 और साल 1967 में 35 सीटें मिलीं। 1977 में कई अन्य राजनीतिक दलों ने जनसंघ पार्टी से गठबंधन किया और इस तरह इसे एक नया नाम मिला वो था- जनता पार्टी। आपातकाल के बाद साल 1977 में जब लोकसभा सभा चुनाव हुए तो पार्टी ने 295 सीटों से जीत हासिल कर के केंद्र में मोरारजी देसाई (Morarji Desai) के नेतृत्व में सरकार बनाई। उस वक्त अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) विदेशी मंत्री थे और लालकृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani) सूचना एवं प्रसारण मंत्री बने।
2- कई उतार चढ़ाव के बाद भाजपा का जन्म

केंद्र में जनता पार्टी की सरकार तो बन गई, लेकिन उसके बाद आंतरिक कलह भी बढ़ने लगी, जिससे पार्टी टूट गई। 1980 में सरकार टूटने के बाद लोकसभा चुनाव में पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बाद नई पार्टी बनने की योजना बनाई गई। जिसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में 6 अप्रैल 1980 को भारतीय जनता पार्टी (BJP) यानी भाजपा का गठन हुआ।
3- केवल 2 सीटों से भाजपा ने की शुरुआत
भाजपा के गठन के बाद जब 1984 में जब लोकसभा का चुनाव हुआ तो पार्टी को केवल 2 सीटें ही मिल पाई। इसके बाद शुरू हुआ राममंदिर आंदोलन (Ram Mandir Andolan)। इस आंदोलन ने जनता पर ऐसा असर डाला कि साल 1989 के चुनाव में 80 से अधिक सीटों पर जीत हासिल कर के भाजपा मे इतिहास रच डाला। फिर साल 1996 के चुनाव में पार्टी ने एक नया रिकॉर्ड बनाया और 161 सीट से जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और केंद्र में सरकार बनाई, लेकिन बहुमत नहीं मिले पाने के कारण लंबे समय तक नहीं टिक पाई।
4- कार्यकाल पूरा करने वाली पहली non-congress party
1968 की हार के बाद पार्टी एक बार फिर साल 1999 में सत्ता में आई और 2004 तक सत्ता में रहकर अपना कार्यकाल पूरा किया.
5- 2004 के चुनाव में फिर धराशायी हुए भाजपा

अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में साल 2004 में चुनाव लड़ा गया उस दौरान भाजपा ने शाइनिंग इंडिया (Shinning India) का नारा दिया, लेकिन जनता का समर्थन हासिल करने में चुक गई और एक बार फिर से भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा. वहीं 2009 के चुनाव में भी भाजपा को सफलता नहीं मिली। उस वक्त चुनाव भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में लड़ा गया था। साल 2004 से लेकर 2014 भाजपा के लिए बड़ी चुनौति पूर्ण रहा है। इस दौरान बीजेपी का किरदार केवल विपक्षी पार्टी तक ही सीमित था।
6- प्रचंड बहुमत के साथ बीजेपी ने किया Come Back

गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी को साल 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी का प्रमुख चेहरा बनाया गया। इस दौरान बीजेपी को जनता का भरपूर समर्थन मिला और 282 सीटों के साथ बीजेपी ने प्रचंड बहुमत के साथ पार्टी में वापसी की। यह पहली बार था जब भाजपा ने अपने दम पर सरकार बनाई और प्रचंड जीत हासिल की।
7- 2019 में तोड़ा अपना ही रिकॉर्ड

सात 2019 के लोकसभा चुनावे में भाजपा ने अपना ही रिकॉर्ड तोड़ डाला। जहां 2014 में बीजेपी को में 282 सीटें मिली थीं वहीं साल 2019 में सीट की आंकड़ा बढ़कर 303 पहुंच गया। और एक बार फिर से लोगों ने प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी को स्वीकारा।
8- 42 सालों के सफर के दौरान पार्टी को मिले 11 अध्यक्ष
पिछले 42 सालों के उतार-चढ़ाव वाले सफर में पार्टी को कुल 11 अध्यक्ष मिले है। सबसे पहले साल 1980 में अटल बिहारी वाजपेयी अध्यक्ष बने थे। वहीं वर्तमान में भाजपा के अध्यक्ष जेपी नड्डा हैं।
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