January 29, 2023

Knowledge News : जानिए Bageshwar Dham के धीरू से बने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कहानी, कैसे जान लेते हैं मन की बात

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बागेश्वर धाम और उसके महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री हाल ही में सुर्खियों में बने हुए हैं। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (dhirendra shastri) पर अंधविश्वास को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया है, लेकिन उन्होंने सभी आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि उनके खिलाफ साजिश रची गई है। उन्होंने ये दावा किया कि उनके घरवापसी कार्यक्रम, जिसमें परिवर्तित हिंदुओं को वापस हिंदू धर्म में लाया जाता है, उसने कुछ लोगों को नाराज किया है। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि इन सबके पीछे धर्म का विरोध करने वालों का हाथ है। ये वही लोग हैं, जिन्होंने भगवान राम और अयोध्या के अस्तित्व का प्रमाण मांगा था। सनातनी साधुओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। जब से हमने परिवर्तित लोगों को हिंदू धर्म में फिर से लाना शुरू किया है, तब से उन लोगों को हमसे परेशानी है।
बागेश्वर धाम (bageshwar dham) के महाराज पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। उन्होंने बहुत ही कम समय में अपना नाम कमाया है। आज लाखों लोगों की भीड़ उनकी एक कथा में जुट जाती है, लेकिन क्या आप पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कहानी के बारे में जानते हैं। अगर नहीं तो चलिए हम आपको बताते हैं।
कौन है पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री
कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार धीरेंन्द्र कृष्ण शास्त्री का जन्म जुलाई 1996 में हुआ था। ये तो हम सब जानते हैं कि पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री छतरपुर जिले के प्रसिद्ध बागेश्वर धाम के पुजारी और कथावाचक हैं। उनके बारे में ये कहा जाता है कि वो बिना किसी व्यक्ति से बात किए उसकी समस्या बता देते हैं। छतरपुर जिले के गढ़ा गांव में हर मंगलवार को धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का दरबार लगाता है। जहां पर देश के विभिन्न राज्यों से लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं।
कैसा रहा शुरुआती जीवन
धीरेंद्र शास्त्री का शुरुआती जीवन गांव में ही बीता। धीरेंद्र शास्त्री के पिता राम करपाल गर्ग बेहद गरीब थे। साथ ही उनकी आमदनी भी बेहद कम थी। मां सरोज गर्ग किसी तरह से घर चलाया करती थीं। उनके पास रहने के लिए गांव में एक छोटा-सा कच्चा मकान था, जो अक्सर बारिश के मौसम में टपका करता था। ऐसे में पंडित धीरेंद्र बचपन में तमाम सुख-सुविधाओं से वंचित रहे। धीरेंद्र की बचपन से इच्छा थी कि वो वृंदावन जाकर कर्मकांड की शिक्षा लें, अध्यात्म की पढ़ाई करें। लेकिन, उनके पिता के पास उतने पैसे नहीं थे कि वो बेटे की पढ़ाई का खर्चा उठा सकें। उन्होंने 8वीं तक की पढ़ाई अपने गांव में ही की। इसके बाद वो अपने चाचा के पास गंज चले गए। वहां भी वो सिर्फ 12वीं तक ही पढ़ पाए। इसके बाद आध्यात्म और मानव सेवा में रुचि के चलते उन्होंने पढ़ाई अधूरी छोड़ दी। 14 जून 2022 को उन्हें लंदन की संसद में 3 अवॉर्ड संत शिरोमणि, वर्ल्ड बुक ऑफ लंदन और वर्ल्ड बुक ऑफ यूरोप से सम्मानित किया गया।
कैसे बने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को घर में धीरू कहा जाता था। ये तो हमने आपको पहले ही बता दिया कि धीरेंद्र शास्त्री की बचपन से ही अध्यात्म में रुचि थी। जिसके चलते वो कम उम्र में गांव-गांव जाकर कथा सुनना शुरू कर चुके थे। कुछ समय के बाद वो इस काम में निपुण हो गए। 2009 में उन्होंने पहली बार भागवत कथा अपने पास के गांव में सुनाई थी। इसके बाद धीरे-धीरे वो प्रख्यात होते गए। लोगों की और मीडिया की नजरों में वो तब आए जब उन्होंने बुलडोजर वाला विवादित बयान दिया था।
दादा से ली दीक्षा
धीरेंद्र शास्त्री के दादा भगवान दास अध्यात्मिक गुरु रहे हैं, जिनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने चित्रकूट के निर्मोही अखाड़े से दीक्षा प्राप्त की थी। फिर धीरेंद्र शास्त्री ने अध्यात्म की शुरूआती शिक्षा अपने दादा भगवान दास गर्ग से ही लेनी शुरू की। उनके दादा भी गांव में रामायण और भागवत पढ़ाया करते थे। बाद में दादाजी की तरह धीरेंद्र शास्त्री ने भी दरबार लगाना शुरू कर दिया।
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