January 30, 2023

Lionel Messi: लियोनल मेसी को रोजाना लगवाने पड़ते थे पैरों में इंजेक्शन, पढ़िये इस दुर्लभ बीमारी के बारे में

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Lionel Messi: फीफा वर्ल्डकप 2022 (FIFA World Cup 2022) में अर्जेंटीना (Argentina VS France) ने फ्रांस के खिलाफ रोमांचक मुकाबले में जीत हासिल की है। इस मोस्ट अवेटेड जीत के साथ लियोनल मेसी का अर्जेंटीना को जिताने का 36 साल का इंतजार आखिरकार पूरा हो गया। टीवी चैनल्स से लेकर सोशल मीडिया तक, हर तरफ फुटबॉल के दिग्गज खिलाड़ी मेसी सुर्खियों में बने हुए हैं। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि वर्ल्ड फुटबॉल का यह बड़ा सितारा बचपन से ही एक गंभीर और दुलर्भ बीमारी का शिकार हैं? जी हां, अगर मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो मेसी जब सिर्फ 11 साल के थे, तभी से ग्रोथ हार्मोन डिफिशिएंसी (Growth Hormone Deficiency) नाम की एक बीमारी के शिकार हैं। इस बीमारी के चलते शरीर में ग्रोथ हार्मोन की कमी हो जाती है और विकास संबंधित समस्या बढ़ जाती है।
बता दें कि फुटबॉल स्टार मेसी का इस बीमारी के इलाज के लिए लंबे समय तक इलाज भी चला है। मीडिया रिपोर्टस से पता चलता है कि मेसी जब 12 साल के थे, तब उन्हें हर रोज पैरों में हार्मोन का इंजेक्शन लगाया जाता था। डॉक्टर्स के मुताबिक, ग्रोथ हार्मोन डिफिशिएंसी बहुत ही रेयर मेडिकल सिचुएशन है। इस बीमारी से ग्रस्त बच्चों के शरीर का विकास नहीं हो पाता है। अक्सर ऐसे बच्चे कम हाइट वाले होते हैं, लेकिन अच्छी बात ये है कि इस बीमारी का इलाज संभव है, जिससे जटिलताओं को कम करने और शरीर के विकास को बढ़ावा देने में बहुत सहायता मिलती है।
आइये जानें क्या है ग्रोथ हार्मोन डिफिशिएंसी? (what is growth hormone deficiency)
इस बीमारी से ग्रस्त लोगों के शरीर में ग्रोथ हार्मोन की कमी (जीएचडी) होती है। इस कारण लोगों में हाइट न बढ़ने की समस्या सबसे ज्यादा देखी जाती है। इस बीमारी के कारण इंसान बौनेपन का शिकार हो जाता है। बता दें कि यह समस्या बच्चों में जन्म से ही होती है या इसे बाद में भी विकसित किया जा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की माने तो शरीर में कुछ कारणों से पिट्यूटरी ग्लैंड (pituitary gland) से ग्रोथ हार्मोन बनने कम हो जाते हैं। इसके लिए जेनेटिक डिफेक्ट, दिमाग की गंभीर चोट या जन्म से ही पिट्यूटरी ग्लैंड न होना आदि कई कारण हो सकते हैं।
ग्रोथ हार्मोन की कमी और जटिलताएं (Growth hormone deficiency and complications)
एक अनुमान के मुताबिक तकरीबन सात हजार नवजात में से एक में इस तरह की बीमारी का खतरा होता है। ग्रोथ हार्मोन की कमी के कारण न सिर्फ शरीर की लंबाई कम होती है, बल्कि दिमाग का विकास भी प्रभावित होता है। जैसा की हमने आपको बताया, ग्रोथ हॉर्मोन कम होने की समस्या जन्म से या फिर बाद में भी विकसित होती है। लेकिन, इस समस्या का समय पर निदान करके इलाज के माध्यमों से लक्षणों में सुधार किया जा सकता है। इन लोगों को यह समस्या होती है, उनमें शरीर की लंबाई कम रह जाना, लड़कियों में ब्रेस्ट के विकास या यौनावस्था से संबंधित कई समस्याओं को भी बढ़ा सकती है।
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