September 25, 2022

एम्बुलेंस से पहले चारपाई की सवारी : यहां पहुंचविहीन नहीं, मुख्य सड़क पर भी घंटों करना पड़ता है एंबुलेंस का इंतजार

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गणेश मिश्रा-बीजापुर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं का हाल जानना हो तो उन इलाकों में जाने की आवश्यकता नहीं है.. जहां स्वास्थ्य अमला नहीं पहुंच सकता। सुदूर पहुंचविहीन इलाके में भी जाने की जरूरत नहीं है। लचर स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति आजकल मुख्य सड़कों पर ही नजर आने लगी है।

यहां गंभीर अवस्था में मरीजों को लेकर परिजन और ग्रामीण घंटों एंबुलेंस और 108 जैसी सुविधाओं का इंतजार करते नजर आ जाते हैं। यहां बीमार व्यक्ति को गांव से अस्पताल या सड़क तक आने के लिए एंबुलेंस या 108 जैसी सुविधाओं से पहले अपने ही घर की चारपाई की सवारी करनी पड़ती है। जब वह चारपाई की सवारी कर मुख्य मार्ग या अन्य सड़क सुविधाओं तक पहुंचता है तब जाकर कहीं उस इलाके में पदस्थ जवानों या अन्य लोगों की मदद से ग्रामीण और मरीजों को 108 या फिर एंबुलेंस जैसी सुविधाएं मिल पाती हैं। परंतु 108 जैसे नंबरों पर डायल कर एंबुलेंस की सुविधा मांगने के घंटों बाद भी जब एंबुलेंस उस मरीज तक नहीं पहुंच पाता तब स्थिति बेहद गंभीर और नाजुक हो जाती है। ऐसा ही एक नजारा आज बासागुड़ा क्षेत्र के तररेम मार्ग पर देखा गया, जहां रात भर बीमार महिला को तकरीबन 7 किलोमीटर दूर से चारपाई में लादकर पैदल सड़क तक पहुंचाया गया और 108 को फोन करने के घंटों बाद भी इंतजार करते ही रहना पड़ा।
मीडिया की गाड़ी से पहुंचाया गया अस्पताल




हालांकि काफी देर तक एंबुलेंस का इंतजार करने के बाद जब एंबुलेंस नहीं पहुंची तो सीआरपीएफ के जवानों और मीडियाकर्मियों की मदद से मीडिया की ही गाड़ी से बीमार महिला को अस्पताल तक तो पहुंचा दिया गया। परंतु अब सवाल उस सुविधा पर खड़ा होता है, जिस सुविधा के लिए स्वास्थ्य विभाग तारीफों के पुल बांधते थकते नजर नहीं आता। आखिर वो सुविधाएं इन इलाकों में कारगर क्यों साबित नहीं हो पा रही हैं।
रातभर बीमारी की हालत में घर पर ही पड़ी रही महिला
बात बासागुड़ा इलाके की हो रही है, जहां मंगलवार को एक बुजुर्ग महिला को चारपाई में लादकर पेगड़ापल्ली सीआरपीएफ कैंप तक लाया गया था। परिजनों ने बताया कि वेको सनकी नाम की महिला देर रात अचानक बीमार पड़ गई। परंतु सुविधाएं ना होने के कारण उसे समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका, जिसे मंगलवार को कैंप तक लाया गया और वहां मौजूद जवानों ने मरीज को अस्पताल तक पहुंचाने 108 को फोन किया। परंतु करीब 1 घंटे तक जब 108 नहीं पहुंची तब जाकर स्वास्थ्य विभाग और उसकी सुविधाओं की पोल यहां खुल गई।
मरीज के अस्पताल पहुंचने के 20 मिनट बाद एंबुलेंस रवाना हुआ




विभागीय लापरवाही का इंतजार किए बिना सीआरपीएफ के जवान और मीडिया की मदद से उसे बासागुड़ा अस्पताल पहुंचाया गया। जहां इस वक्त महिला का इलाज जारी है। सबसे बड़ी लापरवाही तो तब देखी गई जब महिला को अस्पताल में दाखिल कराया गया और उसके 20 मिनट बाद 108 को आवापल्ली से मरीज को लाने के लिए रवाना किया गया।

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