August 18, 2022

वापस नहीं होगी अग्निपथ योजना: उपद्रवी नहीं बन सकेंगे अग्निवीर, सेना में अनुशासनहीनता के लिए कोई जगह नहीं

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नई दिल्ली. तीनों सेनाओं की ओर से रविवार को यह स्पष्ट किया गया कि अग्निपथ योजना का उद्देश्य सेनाओं को युवा एवं अधिक ताकतवर बनाना है और इस योजना को वापस नहीं लिया जाएगा। इसके विरोध में हिंसक प्रदर्शन करने वाले युवाओं को सेनाओं में भर्ती नहीं किया जाएगा। सभी भर्तियां इसी स्कीम के तहत होंगी।
25 हजार अग्निवीरों का पहला बैच दिसंबर में आर्मी जॉइन कर लेगा। अग्निपथ योजना के विरोध में देश भर में हो रहे उग्र तथा हिंसक आंदोलनों के मद्देनजर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के निवास पर तीनों सेनाओं के प्रमुखों की मौजूदगी में रविवार को हुई महत्वपूर्ण बैठक के बाद सैन्य मामलों के विभाग में अतिरिक्त सचिव लेफ्टिनेंट जनरल अनिल पुरी और तीनों सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारियों ने एक संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी दी।
शपथ पत्र देना होगा कि प्रदर्शन में नहीं थे शामिल
लेफ्टिनेंट जनरल अनिल पुरी ने कहा कि अग्निवीर बनने वाले अभ्यर्थियों को ये शपथपत्र देगा कि उसने कोई प्रदर्शन नहीं किया है न तोड़फोड़ की। बिना पुलिस वेरिफिकेशन के कोई सेना में शामिल नहीं होगा। सभी को लिखित में देना होगा कि वे किसी भी तरह की आगजनी/हिंसा में शामिल नहीं थे। पुरी ने कहा कि युवा फिजिकली तैयार हों, ताकि वह हमारे साथ जुड़कर ट्रेनिंग कर सकें। हमने इस योजना को लेकर हाल में हुई हिंसा का अनुमान नहीं लगाया था। अग्निपथ के विरोध में कोचिंग इंस्टीट्यूट चलाने वालों ने छात्रों को भड़काकर प्रदर्शन कराया है।
उन्होंने कहा कि फौज अनुशासन पर टिकी है, इसलिए अनुशासनहीनता की सेनाओं में कोई जगह नहीं है। सभी अग्निवीरों की पुलिस इन्क्वायरी कराई जाएगी। जगह-जगह लगे कैमरों से भी इस बात की पुष्टि की जाएगी कि इस अभ्यर्थी ने किसी भी तरह के आंदोलन में या विरोध प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लिया है। देश के युवाओं से अनुरोध किया कि वह अपना समय बर्बाद ना करें और अग्निवीर के लिए होने वाली भर्ती प्रक्रिया की तैयारी करें।
नौसेना में तैनात होंगी महिला अग्निवीर
भारतीय नौसेना की ओर से कहा गया कि 21 नवंबर से पहला नौसैनिक अग्निवीर बैच ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, आईएनएस चिल्का, ओडिशा में पहुंचना शुरू हो जाएगा। इसके लिए महिला और पुरुष दोनों अग्निवीरों को जाने की अनुमति होगी। भारतीय नौसेना के पास वर्तमान में विभिन्न भारतीय नौसेना के जहाजों पर 30 महिला अधिकारी हैं। वाइस एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने कहा कि हमने तय किया है कि अग्निपथ योजना के तहत महिलाओं की भी भर्ती होगी जिन्हें युद्धपोत पर भी तैनात किया जाएगा।
सेना की औसत उम्र 26 वर्ष तक लाने का प्रयास
लेफ्टिनेंट जनरल पुरी ने एक सवाल के जवाब में कहा कि अग्निपथ योजना विदेशों में प्रचलित विभिन्न मॉडलों का अध्ययन करने के बाद लाई गई है। भारत में इस तरह की योजना के बारे में सबसे पहले वर्ष 1989 में बातचीत शुरू हुई थी। वर्षों तक निरंतर प्रयास करने के बाद इसमें अब जाकर सफलता मिली है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1989 में सेना की औसत उम्र 30 वर्ष थी जो अभी बढ़कर 32 वर्ष हो गई है। औसत उम्र को 26 वर्ष तक लाने का सेना का टारगेट भी रहा है। नई योजना लागू होने के कुछ वर्षों बाद यह औसत उम्र 24 से 26 वर्ष तक हो जाएगी। उन्होंने कहा कि देश की रक्षा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अग्निपथ योजना को वापस नहीं लिया जाएगा। तीनों सेनाएं चाहती है कि इसके उद्देश्य पूरे होने चाहिए। दो वर्ष तक इस योजना पर खूब माथापच्ची की गई और इसके बाद अग्निपथ योजना को शुरू किया गया है।
यह रहेगी भर्ती प्रक्रिया
वायुसेना ने रविवार को ‘अग्निपथ’ योजना की डिटेल्स जारी की। जिसमें पात्रता मानक, आयु सीमा, शैक्षिक योग्यता समेत कई पहलुओं की जानकारी दी गई है। भारतीय वायु सेना में अग्निवीरों की भर्ती प्रक्रिया 24 जून से शुरू होगी जबकि 25 जून से इंडियन नेवी और 1 जुलाई से आर्मी में अग्निवीरों की भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी। 30 दिसंबर से शुरू पहले बैच की ट्रेनिंग शुरू कर दी जाएगी। ट्रेनिंग से पहले स्पेशल मेडिकल एलिजिबिलिटी की शर्तों को पूरा करना होगा और ट्रेनिंग के दौरान वर्दी पर एक स्पेशल साइन (प्रतीक चिन्ह) पहनना होगा। मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं और 12वीं पास युवा अग्निवीर बन सकते हैं। आवेदकों की आयु सीमा 17.5 वर्ष से 21 वर्ष तक तय की गई है। हालांकि इस साल के लिए अधिकतम आयु सीमा में 2 वर्ष की छूट भी मिलेगी।
4 साल तक सेवा में रहना होगा जरूरी
नोटिफिकेशन के मुताबिक, सेना में भर्ती होने वाले अग्निवीर अपनी मर्जी से 4 साल से पहले सेवाएं नहीं छोड़ सकतेष। उन्हें अपना कार्यकाल पूरा करना होगा। केवल असाधारण परिस्थितियों में ही कोई अग्निवीर चार साल से पहले सेना छोड़ सकता है। इस मामले में उसे सेवा निधि पैकेज का वही हिस्सा मिलेगा जो उसने योगदान किया है जबकि सरकारी योगदान से वंचित रहना पड़ेगा।
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