September 25, 2022

Oral Health Day: अच्छे स्वास्थ्य के लिए दांतों का ऐसे रखें ध्यान, हमेशा रहेंगे मजबूत और निरोग

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चमकते दांत (Oral Health) हमारे अच्छे स्वास्थ्य का आधार होते हैं। इसके लिए थोड़ी-सी केयर और हाइजीनिक हैबिट्स जरूरी हैं, लेकिन ध्यान ना दिए जाने पर दांतों में प्लॉक जमा होना, सांस में बदबू, शुष्क मुंह, मसूड़ों में सूजन जैसी समस्याओं और दांतों की गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं। यही नहीं, मुंह में हुए इंफेक्शन (Mouth Infection) या बीमारी का असर हमारे शारीरिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। इससे डायबिटीज, ब्लड सेल्स डिसऑर्डर, ओरल कैंसर, कॉर्डियोवैस्कुलर संबंधी बीमारियों की चपेट में भी आप आ सकते हैं। आपके साथ ऐसा ना हो इसके लिए हमारे एक्सपर्ट मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल की सर्जन डॉ अनुसूया आपको बता रही हैं, कॉमन डेंटल प्रॉब्लम्स, इसके ट्रीटमेंट और प्रॉपर केयर के तरीके के बारें में।

ओरल प्रॉब्लम्स की वजह

ओरल प्रॉब्लम्स की बड़ी वजह, मुंह में मौजूद अनगिनत बैक्टीरिया होते हैं। ओरल हाइजीन के अभाव में ये दांतों के इनेमल और मसूड़ों को नुकसान पहुचाते हैं। दांतों की साफ-सफाई ठीक से ना होने के कारण दांतों के बीच में और गम-लाइन के आस-पास पीले रंग के प्लॉक या टार्टर की परत जमने लगती है। इंफेक्शन बढ़ने से मसूड़े में सूजन आ जाती हैं और उनमें से पस या खून बहने लगता है। दांत ठंडी-गर्म और मीठी चीजों के प्रति सेंसिटिव हो जाते हैं, कुछ भी खाने पर उनमें दर्द रहता है, मुंह से बदबू आने लगती है।
डेंटल ट्रीटमेंट्स

पेरियोडेंटाइटिस डिजीज में प्लॉक से निकलने वाला एसिड दांतों की बाहरी सख्त एनेमल परत में कैविटी बनाने लगता है। दांतों की पकड़ बनाने वाले टिशूज, हडि्डयां और जड़ कमजोर होने लगती हैं। इंफेक्शन या दंत क्षय को रोकने के लिए डेंटिस्ट सबसे पहले दांत को बचाने की कोशिश करते हैं। इसके लिए रीवाइटलाइजेशन प्रक्रिया द्वारा रूट कैनाल या रीजेनरेटिव आरसीटी ट्रीटमेंट किया जाता है। इसमें दांत के इंफेक्टेड एरिया या पल्प को निकाल देते हैं और असल दांत पर कैप लगाई जाती है। लेकिन दांत को बचा न पाने की स्थिति में आर्टिफिशियल दांत भी लगाए जाते हैं। एक साथ दो या अधिक दांतों को नुकसान पहुंचा है, तो इनके लिए डेंटिस्ट ब्रिज दांत लगाते हैं। वहीं, दांतों की सेंसिटिविटी ठीक करने के लिए डेंटिस्ट डिसेंस्टिाइजिंग टूथपेस्ट से ब्रश करने की सलाह देते हैं। डेंटिस्ट उपचार के लिए फ्लोराइड जैल ट्रीटमेंट दे सकते हैं, जिससे दांत का इनेमल मजबूत बनता है। इसके अलावा खराब दांत में फिलिंग और क्राउनिंग भी की जाती है।
ऐसे करें टीथ क्लीनिंग

दांतों की सफाई के लिए 2-2-2 का फॉर्मूला अपनाना चाहिए। यानी दिन में 2 बार सुबह-रात ब्रश करें, ब्रश कम से कम 2 मिनट तक करें और एक साल में 2 बार डेंटिस्ट को अपने दांत जरूर चेक कराएं।
-कुछ भी खाने के बाद ब्रश ना कर पाएं तो कुल्ला जरूर करें। इससे खाने के कण मुंह में नहीं रह पाएंगे।
-दांत साफ करने के लिए हमेशा फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट का इस्तेमाल करें।
-गोल ब्रिसल्स के सॉफ्ट टूथब्रश इस्तेमाल करें। अपना ब्रश 2-3 महीने में या उसके ब्रिसल्स खराब होने पर तुरंत बदल लें। खराब ब्रश दांतों की सफाई ठीक से नहीं करता है और मसूड़ों को नुकसान भी पहुंचाता है।
– बहुत दबा कर ब्रश ना करें। ब्रश को 45 डिग्री कोण पर पकड़ कर आगे-पीछे, ऊपर-नीचे, अंदर-बाहर, धीरे-धीरे घुमाते हुए हल्के हाथों से ब्रश करें। वरना गम्स खराब हो सकते हैं।
-ब्रश करने के बाद अपनी जीभ की भी सफाई करें।
-हो सके तो डेंटल फ्लॉस से भी अपने दांतों की सफाई करें। इससे दांतों के बीच प्लॉक नहीं जम पाएगी।
-ब्रश करने के बाद 6-7 बार सादे पानी से कुल्ला करके आखिर में माउथवॉश से कुल्ला जरूर करें।
लेखक- रजनी अरोड़ा

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