December 6, 2022

Krishna Janmashtami 2022: जानिए क्यों मनाई जाती है जन्माष्टमी? क्या है इस त्यौहार का महत्व और इतिहास

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जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami 2022) हिन्दू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है, जन्माष्टमी के दिन भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। कृष्ण जी को भगवान विष्णु का आठवां अवतार माना जाता है और पूरे भारत में उनका सम्मान किया जाता है। इस वर्ष, कृष्ण जन्माष्टमी 18 और 19 अगस्त दोनों दिन मनाई जा रही है। इसे गोकुल अष्टमी (Gokulashtami) के नाम से भी जाना जाता है, यह त्योहार कृष्ण पक्ष की अष्टमी या भाद्रपद महीने के आठवें दिन पड़ता है। कहा जाता है कि भगवान कृष्ण का जन्म मथुरा की एक कालकोठरी में हुआ था। उनका जन्म माता देवकी और वासुदेव के यहां मध्यरात्रि में हुआ था। इसलिए, परंपरा के मुताबिक कृष्ण जन्माष्टमी पूजा निशिता काल में की जाती है, जो लगभग आधी रात को होती है।
जानिए जन्माष्टमी का इतिहास और महत्व (Know the history and importance of Janmashtami)
हिंदू महाकाव्यों में भगवान कृष्ण को प्रेम, करुणा और कोमलता के देवता के रूप में दिखाया जाता है। वह अपनी दैविक शक्तियों के साथ शरारतें करने और चमत्कार करने के लिए भी जाने जाते हैं। ऐसा कहा जाता है कि माता देवकी के भाई कंस ने एक आकाशवाणी सुनी थी कि माता देवकी की आठवीं संतान उसका अंत कर देगी। यहीं से कंस ने अपनी बहन देवकी और उनके पति वासुदेव को अपनी कालकोठरी में कैद कर लिया था और कृष्ण को खत्म करने की कोशिश की, लेकिन इससे पहले कि वह ऐसा कर पाता, भगवान कृष्ण को अंधेरे कालकोठरी से सुरक्षित बाहर भेज दिया गया। बाल कृष्ण के पिता वासुदेव ने एक टोकरी में भगवान को अपने सिर पर लेकर यमुना नदी को पार किया और उन्हें गोकुल में एक सुरक्षित आश्रय प्रदान किया।
जानिए कैसे मनाया जाता है जन्माष्टमी का त्यौहार (Know how the festival of Janmashtami is celebrated)
मंदिरों में जन्माष्टमी का उत्सव भोर से पहले शुरू होता है और पूरे दिन मध्यरात्रि तक चलता है, जब भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। कृष्ण भक्त कीर्तन का आयोजन करते हैं और भगवान के नाम का जाप करते हैं। भगवान कृष्ण को सजाय जाता है, उन्हें झूले में बिठाकर उनकी पूजा अर्चना की जाती है। जन्माष्टमी के दिन बहुत से लोग पूरे दिन का उपवास भी करते हैं। इस अवसर पर कई स्वादिष्ट व्यंजन भी बनाए जाते हैं। घर पर लोग अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को उत्सव में भाग लेने के लिए आमंत्रित करते हैं। “हरे कृष्ण” मंत्र का जाप किया जाता है, भगवान कृष्ण के जीवन से जुड़े रोमांचक कारनामों को भी पढ़ा और सुना जाता है। कृष्ण जन्माष्टमी के दिन लोग आधी रात के आसपास निशिता पूजा करते हैं। कृष्ण भगवान का माखन, दूध और दही आदि से आधी रात को अभिषेक किया जाता है। दही हांडी (Dahi Handi) का भी आयोजन किया जाता है जहां लोग मानव पिरामिड बनाते हैं और मक्खन और दही से भरे मिट्टी के बर्तन को तोड़कर जीत हासिल करते हैं।
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