July 5, 2022

Holi 2022 Special: रंगो के इस त्यौहार में सेहत भी है जरूरी, हेल्दी रहने के लिए इन बातों का रखें ध्यान

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Holi Health Special: बदलते मौसम में मनाया जाने वाला होली का त्योहार (Holi Festival) दिल खोलकर रंगों से खेलने, मस्ती और हुड़दंग के लिए मशहूर है। इस मौके पर तरह-तरह के पकवान (Holi Dishes) भी खूब खाए-खिलाए जाते हैं। लेकिन ऐसे में लापरवाही (Carelessness) बरतने से इंफेक्शन, एलर्जी, सर्दी-खांसी जैसी समस्याएं होने लगती हैं। साथ ही डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, अस्थमा जैसी क्रॉनिक डिजीज से जूझ रहे मरीजों की परेशानी भी बढ़ सकती है। इसलिए खान-पान को लेकर सावधानी बरतना जरूरी है। अपनी इस स्टोरी में हम आपके लिए दिल्ली के तीरथराम अस्पताल (Tirath Ram Hospital) के जनरल फिजीशयन (General Physician) डॉ. संजय अग्रवाल (Dr. Sanjay Aggarwal) से कुछ हेल्थ एडवाइस (Health Advice) लेकर आएं हैं जो आपको होली के इस बदलते मौसम में बीमारियों से बचाएंगी…
संभलकर खाएं-खिलाएं
-बाजार से मिठाई, व्यंजन मंगवाने के बजाय घर में ही व्यंजन बना सकती हैं। ऐसे व्यंजन बनाएं, जिसमें तेल-घी का इस्तेमाल नहीं करना पड़े या बहुत कम करना पड़े। कम चीनी, गुड़, स्टीविया नेचुरल शुगर या शुगर फ्री मिठाई घर पर बनानी चाहिए।
-लो कैलोरी वाली मिठाइयां जैसे रसगुल्ला, लड्डू और घर पर ही शुद्ध मावे की मिठाई बनाकर खाएं-खिलाएं।
-ठंडाई में भांग के बजाय बादाम, पिस्ता, केसर, गुलाब की पत्तियां, खरबूजे के बीज मिलाकर बनाएं। पेय में हॉट चॉकलेट, शिकंजी, लस्सी, बादाम शेक भी बना सकते हैं, जो स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए लाभकारी हैं।
-बाजार की रेडीमेड नमकीन की जगह घर में पोहा, मूंगफली और मटर से नमकीन बना सकते हैं।
इन्हें खाने से बचें
– कचौड़ी, पकौड़े, चिप्स जैसे नमकीन और फ्राइड फूड आइटम ज्यादा ना खाएं। इनमें बहुत ज्यादा चीनी, नमक और ट्रांसफैट बहुत ज्यादा मात्रा में होता है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
-कुछ लोग इस दौरान मीठे से तो परहेज करते हैं लेकिन नमकीन ज्यादा खाते हैं, जिससे कैलोरी की मात्रा, कोलेस्ट्रॉल लेवल और ब्लड प्रेशर लेवल बढ़ने का खतरा रहता है। नमक की अधिकता भी शरीर के लिए सही नहीं होती है। ज्यादा नमक खाने से शरीर में वाटर रिटेंशन हो सकता है और ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को तो नमक वाली चीजों से दूर ही रहना चाहिए।
-होली में बनने वाली भांग मिली ठंडाई भी अस्थमा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और दिल के मरीजों के लिए नुकसानदायक होती है। इससे शूगर लेवल बढ़ सकता है। भांग पीना दिल के मरीजों को पूरी तरह अवॉयड करना चाहिए, क्योंकि इससे ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ जाता है, दिल की धड़कनें बढ़ जाती हैं और कार्डिएक अरेस्ट भी हो सकता है। अस्थमा के मरीजों को सांस लेने में दिक्कत हो सकती है।
-लंबे समय से बनी मिठाइयों और व्यंजनों को खाने से बचें क्योंकि इनमें सूक्ष्म बैक्टीरिया सक्रिय हो जाते हैं, जो फूड प्वॉयजनिंग का कारण बनते हैं। कई बार लोग रंग लगे हाथों से ही पकवान खा लेते हैं, जिससे रंगों का केमिकल पेट में जाकर गड़बड़ी करता है। इसलिए ऐसा करने से भी बचना चाहिए।
-मिलावटी चीजें लिवर को नुकसान पहुंचाती हैं। इससे सूजन आ सकती है। आंतों में संक्रमण, फूड प्वॉयजनिंग, उल्टी, डायरिया जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं। मिठाइयों में इस्तेमाल किया जाने वाला सिंथेटिक दूध कैंसर का कारण बन सकता है। इनके सेवन से बचना चाहिए।
पेशेंट्स रहें एक्सट्रा कॉन्शस
अस्थमा, चेस्ट इंफेक्शन, ब्रोंकाइटिस: श्वसन संबंधी रोगियों को होली के रंगों से खासी दिक्कत होती है। गुलाल लोग हवा में उड़ाते हैं या होलिका दहन में उठने वाला धुंआ हवा में फैल जाता है। इसमें कॉपर सल्फेट, एल्यूमिनियम ब्रोमाइड, मरकरी जैसे टॉक्सिक पदार्थ होते हैं, जो नाक के रास्ते फेफड़ों तक पहुंच कर इंफेक्शन कर सकते हैं और अस्थमा को ट्रिगर कर सकते हैं, जिससे अस्थमा का अटैक आ सकता है। नाक बंद होने पर सांस लेने में मुश्किल होती है। अस्थमा के रोगियों को ऐसी जगह से दूर रहना चाहिए। बेहतर है मास्क और सिर पर कैप पहनकर होली खेलें। यथासंभव हर्बल रंगों से होली खेलें।
डायबिटीज
डायबिटीज के मरीजों को मिठाइयों या हाई कैलोरी फूड से बचना चाहिए। जो कुछ भी खाएं, उसका रिकॉर्ड रखें। मिठाई या ठंडाई का सेवन करने से उनका ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है। जरूरी हो तो शुगर फ्री या गुड़ से बनी मिठाई का सीमित मात्रा में सेवन कर सकते हैं। क्योंकि इनमें भी कार्बोहाइड्रेट और फैट होता है, जो शरीर में जाकर शुगर में बदल जाती है। हालांकि यह सामान्य चीनी की तुलना में कुछ कम हानिकारक होते हैं, इसलिए इनका भी सीमित मात्रा में सेवन करना चाहिए।
केमिकल कलर्स से रहें दूर
बाजार में मिलने वाले रंगों में कई खतरनाक केमिकल होते हैं, जो आपको बीमार कर सकते हैं। दरअसल, ऐसे रंगों से होली खेलने की वजह से यह जाने-अनजाने नाक और कान में जा सकता है। इसी तरह रंगों से सराबोर व्यक्ति गंदे हाथों से कुछ खा लें तो इससे रंग पेट में चला जाता है। ये केमिकल डायरिया, फूड प्वॉयजनिंग का कारण बन सकते हैं। इनसे वॉमिट, पेट दर्द, जलन, गैस्ट्राइटिस, सिर दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में मरीज को ओआरएस का घोल और लिक्विड डाइट बराबर लेते रहना चाहिए। स्थिति में सुधार ना हो तो डॉक्टर से सलाह लें।
प्रस्तुति : रजनी अरोड़ा (Rajni Arora)

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