November 29, 2022

देश के इन राज्यों में बदल जाता है Diwali का महत्व!, जानिए यहां कैसे और क्यों मनाई जाती है दिवाली

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Happy Diwali 2022: दीपावली (Diwali) हिन्दुओं (Hindu) के प्रमुख त्योहारों में से एक है, भारत में फेस्टिव सीजन (Festive Season) नवरात्री (Navratri) के साथ हो गयी थी। इस कड़ी में अगला नंबर अब दिवाली के त्यौहार का है जो आमतौर पर 5 दिवसीय त्योहार है और लगभग पुरे भारत में बड़ी ही धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन को लोग देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करके, मिट्टी के दीये जलाकर, मिठाई बांटकर और पटाखे फोड़कर मनाते हैं। उत्तर भारत (Diwali Tradition) के ज्यादातर राज्यों में, दिवाली का यह त्योहार भगवान राम के 14 साल के वनवास के बाद अयोध्या लौटने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। हालांकि, खुशियों और रोशनी का त्योहार देश के कई हिस्सों में अलग-अलग तरीकों से भी मनाया जाता है, साथ ही साथ यह अलग घटनाक्रमों को चिह्नित भी करता है।आइये जानते हैं देश के विभिन्न हिस्सों में दिवाली (How To Celebrate Diwali In Different State Of India) कैसे मनाई जाती है:-
Goa (गोवा): भगवान कृष्ण के लिए मनाई जाती है दिवाली
गोवा में दिवाली के अवसर पर राक्षस नरकासुर पर भगवान कृष्ण की जीत का जश्न मनाया जाता है। गोवा में दिवाली के दिन नरकासुर का पुतला बनाया जाता है जिसमें पेपर, पटाखे और घास का इस्तेमाल करते हैं। वहीं इसके उपरांत इस पुतले को यहां की सड़कों और गलियों में घुमाया जाता है। इस दिन यहां के लोग नरकासुर के पुतले को किसी मैदान में ले जाकर उसका दहन करते हैं।

West Bengal (पश्चिम बंगाल) : काली पूजा के नाम से मनाई जाती है दिवाली
पश्चिम बंगाल में दिवाली श्यामा पूजा या काली पूजा के साथ मेल खाती है, जो सूर्यास्त के बाद होती है। भक्त देवी काली को कई प्रकार की मिठाइयां, दाल, चावल और यहां तक कि मांसाहारी भोजन जैसे मछली आदि भी चढ़ाते हैं। बंगाली काली पूजा से एक दिन पहले घर पर चौदह दीये (मिट्टी के दीपक) जलाकर बुरी शक्तियों को दूर रखने के लिए भूत चतुर्दशी का अनुष्ठान भी करते हैं।

Tamil Nadu (तमिलनाडु): नरक चतुर्दशी पर मनाते हैं दिवाली
तमिलनाडु में नरक चतुर्दशी (जिस दिन उत्तर भारत छोटी दिवाली के रूप में मनाता है) को दिवाली त्योहार के मुख्य दिन के रूप में मनाया जाता है। इस दिन की शुरुआत सूर्योदय से पहले तेल स्नान से होती है, जिसमें पूरे दिन कई तरह के अनुष्ठान किए जाते हैं। तमिल लोग ‘कुथु विलाकु’ (दीपक) जलाते हैं और देवताओं को ‘नेवेद्यम’ चढ़ाते हैं। चावल के पाउडर के मिश्रण कोलम का उपयोग उत्तर भारत में रंगोली की तरह घरों के सामने डिजाइन बनाने के लिए किया जाता है।

Odisha (ओडिशा): कौंरिया काठि उत्सव
ओडिशा में दिवाली का एक बहुत ही अनोखा उत्सव है। यहां, लोग अपने पूर्वजों का स्वागत करने के लिए जूट की छड़ें जलाते हैं, माना जाता है कि दिवाली के दिन उनके पूर्वज स्वर्ग से उतरते हैं, इस उत्सव को कौंरिया काठी के नाम से जाना जाता है। जूट जलाने के बाद एक प्रार्थना की जाती है जो पूर्वजों से अंधेरे में दर्शन करने और प्रकाश पथ पर लौटने के लिए कहती है।

Gujarat (गुजरात): वर्ष के अंत का प्रतीक है दिवाली
गुजरात में दिवाली पारंपरिक वर्ष के अंत का प्रतीक है, इस प्रकार लाभ पंचम (दिवाली के पांच दिन बाद) के दिन, परिवार नए साल के लिए व्यवसाय को फिर से शुरू करने का जश्न मनाते हैं। देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने और बुरी नजर से बचाने के लिए घरों में कई अनुष्ठान किए जाते हैं।

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