August 18, 2022

Health Tips: ब्रेस्ट फीड कराने वाली मदर्स रखें अपना ख्याल, एक्सपर्ट के अनुसार ये डाइट करें फॉलो

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Health Tips: डॉक्टर्स के अनुसार, ब्रेस्ट फीडिंग कराने वाली महिलाओं (Breast Feeding Mothers) को अपने डाइट के प्रति कॉन्शस (Diet Conscious) रहना जरूरी है। दरअसल, मां जो भी खाती है, उसका असर उसके शिशु पर पड़ता है। ऐसे में महिलाओं को चाहिए कि अपनी डाइट में सभी जरूरी न्यूट्रीएंट्स (Nutrients) और हेल्दी फूड्स (Healthy Foods) शामिल करें। ऐसे फूड्स से दूरी बनाएं, जो शिशु और उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक (Injurious To Health) हो सकते हैं। अगर आप भी ऐसी ही मां हैं, जो अपने शिशु को ब्रेस्ट फीडिंग करवाती हैं, तो आपके मन में भी ये सवाल होगा कि क्या खाएं क्या नहीं। हम लेकर आएं हैं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. एंड्रिला बसु (Andrilla Basu)और डाइटीशियन संगीता मिश्रा (Sangeeta Mishra) से आपके लिए कुछ डाइट टिप्स जो ब्रेस्ट फीडिंग मदर्स के लिए जरूरी है।
क्या खाएं
ब्रेस्ट फीडिंग कराने वाली मदर्स को भरपूर पोषण और ऊर्जा की जरूरत होती है। इसलिए उन्हें विटामिन और मिनरल्स से भरपूर डाइट लेनी चाहिए। केला, खरबूजा, खुबानी, अंगूर जैसे फल पोटेशियम और विटामिनों से भरपूर होते हैं। इनका सेवन जरूर करना चाहिए। कैल्शियम लेना भी फीड कराने वाली मां के लिए बहुत जरूरी होता है, जिसे दूध, चीज और दही से प्राप्त किया जा सकता है। प्रोटीन के लिए सीड्स, नट्स, दालें, पनीर खा सकती हैं। नॉनवेज खाने वाली महिलाओं को अपनी डाइट में चिकन ब्रेस्ट, सालमन और ट्यूना फिश शामिल करनी चाहिए। ये मछलियां ओमेगा 3 फैटी एसिड से भरपूर होती हैं। वेजीटेरियन महिलाओं को ओमेगा 3 फैटी एसिड के लिए अखरोट खाना चाहिए। इसके सेवन से बच्चे के मस्तिष्क का विकास भी अच्छी तरह होता है।
क्या ना खाएं
दूध पिलाने वाली मांओं को अपनी डाइट में किसी अनहेल्दी फूड्स को शामिल नहीं करना चाहिए। इस दौरान ज्यादा कैफीन, चॉकलेट आदि के सेवन से बचना चाहिए। ये बच्चे के नर्वस सिस्टम को स्टिमुलेट करके उसे चिड़चिड़ा बना सकते हैं और उसे अनिद्रा की समस्या भी हो सकती है। इसी तरह अगर मां खट्टे फल खाती है तो इससे बच्चे के पेट में गैस और अपच की समस्या हो सकती है। इसलिए इनसे भी दूरी बनाकर रखनी चाहिए। ब्रेस्ट फीडिंग की अवधि में महिला को अल्कोहल या किसी भी तरह के नशे के सेवन से भी दूर रहना चाहिए। इससे दूध की आपूर्ति कम हो सकती है। साथ ही दूध के माध्यम से शिशु तक अल्कोहल पहुंच सकता है, जिससे उसके न्यूरोलॉजिकल विकास में समस्या आती है। इतना ही नहीं अल्कोहल से बच्चे में साइकोमोटर डेवलपमेंट भी बाधित हो सकता है। साइकोमोटर विकास, बच्चे के जीवन की शुरुआत से यानी भ्रूण, नवजात अवधि, शैशव, बचपन और किशोरावस्था में भावनात्मक और सामाजिक क्षमताओं में परिवर्तन को प्रभावित करता है। इसलिए बच्चों के लिए साइकोमोटर विकास बहुत महत्वपूर्ण होता है। इसके अतिरिक्त मां को मसालेदार भोजन के सेवन से भी बचना चाहिए क्योंकि इससे बच्चे को काफी नुकसान पहुंचता है। लहसुन की गंध दूध के माध्यम से बच्चे तक पहुंचे तो हो सकता है, बच्चा दूध ना पीना चाहे। तेजपत्ते के ज्यादा सेवन से मां के दूध का उत्पादन कम हो सकता है। इसलिए इनसे भी दूरी बनाए रखना जरूरी है।
ब्रेस्ट फीडिंग के फायदे
ब्रेस्ट फीडिंग मां और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होती है। जिन बच्चों को स्तनपान का पूरा अवसर मिलता है, उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। अध्ययनों में पाया गया है कि पर्याप्त मात्रा में अपनी मां का दूध पीने वाले बच्चों में एलर्जी, एग्जिमा, ल्यूकिमिया, डायबिटीज और श्वसन संबंधी रोगों का जोखिम कम होता है। इसी प्रकार जो मां बच्चों को ब्रेस्ट फीड करवाती हैं, उनमें ब्रेस्ट और ओवेरियन कैंसर का जोखिम कम होता है। प्रेगनेंसी के दौरान मां का जो वेट गेन होता है, ब्रेस्ट फीड कराने से वो भी जल्दी ही नॉर्मल हो जाता है। ब्रेस्ट फीडिंग से मां की मानसिक सेहत पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इससे पोस्टपार्टम डिप्रेशन कम होता है, मूड अच्छा और पॉजिटिव रहता है। इतना ही नहीं ब्रेस्ट फीडिंग से मां और बच्चे के बीच बॉन्डिंग भी बढ़ती है, जिससे दोनों में ही सोशल और बिहेवियरल समस्याएं कम होती हैं।
लेखक- शिखर चंद जैन (Shikhar Chand Jain)

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