December 8, 2022

kota: अब सेटेलाइट इमेज से बनेंगे राजस्व नक्शे, कम होंगे जमीन की नापजोख के विवाद

wp-header-logo-208.png

news website
संदेश न्यूज। कोटा. डिजिटल इंडिया भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत कनवास तहसील के पीछे स्थित आंगनबाड़ी केन्द्र में सब-आॅइकाॉनिक पॉइन्ट स्थापित किया गया है। अब इसके जरिए भूमि की सेटेलाइट इमेज प्राप्त की जाएगी। इसमें जमीन की वास्तविक लंबाई-चौड़ाई का पता चल सकेगा। यह सीमा ज्ञान त्रुटिरहित और विश्वसनीय होगा। इससे जमीन की नापजोख को लेकर विवाद और संशय की स्थिति दूर होगी।
कोटा जिले कनवास क्षेत्र के उपखंड अधिकारी राजेश डागा ने भारत की महत्वाकांक्षी डीआईएलआरएमपी कार्यक्रम के तहत स्थापित इस आइकोनिक पॉइंट का शुक्रवार को निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि पूर्व में सेटलमेंट के समय राजस्व कर्मचारी झंडों के माध्यम से जरीब की सहायता से नक्शों में आने वाले परिवर्तनों को रिकॉर्ड पर लेते थे। यह कार्य बहुत लम्बा एवं श्रम साध्य होता था। नक्शे में ओवरलैपिंग की समस्या भी हो जाती थी। इससे भूमि सीमा ज्ञान के विवाद बढ़ जाते थे। नक्शों में बने खसरा की आकृति के साथ लम्बाई चौड़ाई का उल्लेख नहीं होने से भी माप संबंधी विवाद में पटवारी ‘कंघी परकार’ से ही खसरे की लम्बाई चौड़ाई निकालकर माप करता है जिससे कई बार पक्षकारों को संतुष्टि नहीं होती। इसलिए राजस्व भूमि के सर्वे, पुन: सर्वे का काम जीपीएस आधारित तकनीक से करने एवं राजस्व नक्शों को डिजिटलीकृत करने, त्रुटि रहित और विशुद्ध बनाने के लिए भू-प्रबंध विभाग ने महत्वपूर्ण कार्य प्रारंभ किया गया है। शहरीकरण, सड़क निर्माण इत्यादि कारणों से खसरों में मानवीय रूप से होने वाली सीमाज्ञान की त्रुटियों से बचने के लिए इस परियोजना के तहत खसरों का डिजिटलाइजेशन किया जाकर मानवीय त्रुटियों को दुरूस्त किया जा सकेगा।
उन्होंने बताया कि प्रथम चरण में तहसील स्तर पर पॉइंट बनाने के बाद दो दो किलोमीटर पर पाइंट स्थापित कर भूमि की सेटेलाइट इमेज प्राप्त की जाएगी। प्रत्येक राजस्व ग्राम में ग्राम सभा आयोजित कर किसानों को सर्वे परियोजना की विस्तृत रूप में जानकारी दी जाएगी। पुराने किश्तवार नक्शे को नवीन ग्रामीण खसरा नक्शा पर अधिरोपित किया जाएगा। पुराने किश्तवार नक्शे एवं धरातलीय वास्तविकता के आधार पर नए नक्शों का खसरा क्षेत्रफल, अन्तर्विविधताओं का कारण बताते हुए टिप्पणियों के साथ दर्ज किया जाएगा। डिजिटल नक्शा तैयार करने से पूर्व सभी खातेधारकों से नोटिस के माध्यम से सूचित कर जमाबंदी प्रविष्टियां एवं नवीन सर्वेक्षण उपरान्त प्रविष्टियों के साथ उसकी आराजी का सत्यापन स्वयं खातेधारक सत्यता एवं पारदर्शिता की जांच करेगा। उस नक्शे में अंकित आकृति की लम्बाई चौड़ाई या विवरण में किसी प्रकार की त्रुटि है तो कृषक अपनी आपत्ति दर्ज करा सकेगा। उससे संबंधित आपत्ति का निवारण सहायक भू-प्रबंधक अधिकारी द्वारा नि:शुल्क किया जाकर नवीन संशोधित पर्चा नोटिस दिया जाएगा।
खेतों के अन्तिम प्रारूप से पहले ग्राम का फाइनल भू नक्शा, जमाबन्दी इत्यादि को ग्रामसभा में प्रकाशित किया जाएगा। पूरे सर्वे के दौरान ग्रामवासी किसानों को साथ रखकर नक्शे तैयार करेंगे। इसके बाद ही डिजिटल रूप से ‘ई-धरती’ और ‘भू-नक्शा पोर्टल’ पर अपलोड किया जाएगा। इसके तहत भूमि के परम्परागत रूप से होने वाली सीमाज्ञान और अन्य बिन्दुओं में होने वाली त्रुटियों से बचा जा सकेगा। किसानों को राहत मिलेगी। जमीन का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जा सकेगा। किसानों को सीमाज्ञान, अन्य बिन्दुओं को लेकर होने वाले विवादों का निपटारा हो सकेगा। इस तकनीक से बने नक्शों से सीमाज्ञान आसानी से त्रुटि रहित, सटीक और विश्वसनीय हो सकेगा। किसानों के सीमाज्ञान संबंधी विवादों के कारण होने वाले विवाद कम हो जाएंगे।
Your email address will not be published. Required fields are marked *







This is the News Website by Chambal Sandesh
Rajasthan, Kota
THIS IS CHAMBAL SANDESH YOUR OWN NEWS WEBSITE

  • एजुकेशन
  • कर्नाटक
  • कोटा
  • गुजरात
  • Chambal Sandesh

    source

    About Post Author