August 8, 2022

Health Tips: रिफ्रेशिंग रहने के लिए करें ग्रीन कॉफी का सेवन, मिलेंगे ढेरों फायदे

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Health Tips: आज के दौर में नॉर्मल चाय या कॉफी (Tea or Coffee) पीना लोगों की आदत में शामिल है। स्वास्थ्य को देखते हुए हर्बल (Herbal Tea) और ग्रीन-टी (Green Tea) के उपयोगकर्ताओं की भी संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है। लेकिन इसका अधिक सेवन भी स्वास्थ्य (Health) के लिए अच्छा नहीं माना जाता है। ऐसे में ग्रीन कॉफी (Green Coffee) का प्रयोग बेहतर विकल्प बनकर उभर रहा है। यद्यपि अभी ग्रीन कॉफी की तरफ लोगों का अधिक ध्यान नहीं है लेकिन यह स्वास्थ्य (Health Benefits of Green Coffee) की दृष्टि से काफी बेहतर माना जा रहा है। यहां हम आपके साथ शेयर कर रहें हैं ग्रीन कॉफी पर लखनऊ के लोहिया मेडिकल इंस्टीट्यूट के आयुर्वेदाचार्य डॉ. एस. के. पांडेय (Dr. S K Pandey) के विचार…
कई तरह से फायदेमंद
ग्रीन कॉफी अधिक मात्रा में पीने से भी स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ता है, क्योंकि इसमें कैफीन की मात्रा ना के बराबर होती है। कैफीन की मात्रा कम होने के कारण ग्रीन कॉफी कॉलेस्ट्रॉल को कम करता है। इसके अलावा दूसरे कई रोगों को भी नियंत्रित करता है। ग्रीन कॉफी बींस एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती है। ग्रीन कॉफी के बीजों में क्लोरोजेनिक एसिड पाया जाता है, जिसमें एंटी ऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं। ये शरीर को फ्री रेडिकल्स और ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस से बचाए रखने में सहायक होते हैं।
ग्रीन कॉफी हाई ब्लड प्रेशर से हार्ट अटैक, क्रोनिक किडनी फेल्योर जैसी बीमारियों को भी होने से रोकती है। ग्रीन बींस प्लेटलेट्स बनाने में मदद करता है, इससे कॉलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ता और ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है। याददाश्त बढ़ाने और मानसिक रोगों के उपचार में भी ग्रीन कॉफी काफी कारगर है। ग्रीन कॉफी में कैफीन की मात्रा काफी कम होती है, जो ध्यान, स्मृति और सर्तकता को बढ़ाकर मानसिक स्वास्थ्य में सुधर लाता है। एक शोध में पाया गया है कि ग्रीन कॉफी बींस में न्यूरोप्रोटेक्टिव गुण पाए जाते हैं, जो अल्जाइमर की समस्या को दूर करने में सहायक होते हैं। ग्रीन कॉफी शुगर की मात्रा को भी कम करने में रामबाण है। ग्रीन कॉफी में क्लोरोजेनिक एसिड पाया जाता है। इसमें हाइपोग्लाइसेमिक और एंटीडायबिटिक गुण पाए जाते हैं, जो डायबिटीज की समस्या को दूर करने में मदद करते हैं।
ऐसे बनती है ग्रीन कॉफी
कॉफी के पौधे से हरे रंग के बीजों को लेकर पहले इन्हें भूना जाता है। भूनने के बाद इन्हें पीसकर नॉर्मल कॉफी बनाई जाती है। जब बीजों को बिना भूने पीसकर पावडर बनाया जाता है, तो इसे ग्रीन कॉफी कहा जाता है। ग्रीन कॉफी बींस में भरपूर मात्रा में विटामिन और पोषक तत्व होते हैं। इसमें पाया जाने वाला एंटीओबेसिटी प्रॉपर्टी, फैट को कम स्टोर कर मोटापे और बढ़ते वजन को कम करने में भी मददगार होता है। इस गुण के कारण वजन को नियंत्रित किया जा सकता है। ग्रीन कॉफी में कैफीन की मात्रा कम होने के कारण इसका प्रतिदिन 200 से 480 एमजी तक का सेवन किया जा सकता है।
लेखक- अजेश कुमार (Ajesh Kumar)
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