October 3, 2022

Knowledge News: क्या है NDMA? जानिए कब हुई थी इसकी शुरुआत और कैसे करता है ये काम

wp-header-logo-264.png

Knowledge News: नेशनल डिसास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (National Disaster Management Authority) यानी राष्ट्रीय आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण भारतीय सरकार द्वारा संचलित एक एजेंसी है। ये एजेंसी प्राकृतिक (Natural Disaster) और मानव-निर्मित आपदाओं (Man Made Disaster) के आने पर राहत कार्य करती है, जिसमें लोगों को बचाना, उन्हें आपदा वाले स्थान से निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना और उन्हें पुनः स्थापित करने का काम भी शामिल है। एनडीएमए (NDMA) का गठन 23 दिसंबर 2005 में आपदा प्रबंधन (Disaster Management) और शमन के संबंध में नियमों, मानकों और सर्वोत्तम प्रथाओं को स्थापित करने के लिए भारत सरकार द्वारा आपदा प्रबंधन अधिनियम (Disaster Management Act) लागू करने के बाद किया गया था। यह भारत की सर्वोच्च आपदा प्रबंधन प्राधिकरण भी है।
क्या होता है आपदा प्रबन्धन
जब कोई आपदा आती है उस पल बनाई जानें वाली योजना, आयोजन, समन्वय और कार्यान्वयन उपायों को आपदा प्रबंधन कहते हैं। ये किसी भी आपदा शमन के खतरे या खतरे की रोकथाम के लिए आवश्यक हैं या फिर ये कह सकते हैं कि किसी भी आपदा के जोखिम या गंभीरता को कम करने के लिए इसकी जरूरत होती है। इसके आपदा से निपटने की तैयारी, त्वरित प्रतिक्रिया, आपदा के परिमाण का आकलन, निकासी, बचाव, राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण जैसे कई बिंदुओ पर काम करती है।
कैसे हुई शुरुआत
एनडीएमए की उत्पत्ति अगस्त 1999 में हुई जब भारत सरकार ने प्रभावी शमन तंत्र का सुझाव देते हुए आपदा प्रबंधन योजना तैयार करने के लिए सिफारिशें करने के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचपीसी) की स्थापना की। इसी उद्देश्य के लिए 2001 में गुजरात भूकंप के बाद एक समान राष्ट्रीय समिति का गठन किया गया था। पहली बार आपदा प्रबंधन पर एक पूरा चैप्टर दसवीं पंचवर्षीय योजना में शामिल किया गया था। जबकि बारहवें वित्त आयोग को आपदा प्रबंधन के लिए वित्तीय व्यवस्था की समीक्षा करने का भी काम सौंपा गया था। 2004 में हिंद महासागर में आई सुनामी के बाद सरकार ने आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 लागू किया, जिसमें एनडीएमए को संस्थागत रूप दिया गया।
एनडीएमए का ढांचा
इसका नेतृत्व भारत के प्रधान मंत्री करते हैं और इसमें अधिकतम नौ सदस्यों को शामिल किया जा सकता है। एनडीएमए के अध्यक्ष को एनडीएमए के उपाध्यक्ष को नामित करने का अधिकार है। जहां उपाध्यक्ष को कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त है वहीं इसके अन्य सदस्यों को राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त है। इसके अलावा राज्य के लिए एसडीएमए और जिले के लिए डीडीएमए विशिष्ट कार्यों के साथ का भी प्रावधान है। इसके अलावा साल 2020 के बाद से, पांच अन्य सदस्य भी इसमें शामिल हैं।
क्या है इसका विजन
एनडीएमए की ऑफिशियल वेबसाइट पर इसका विजन दिया गया है। इस विजन में लिखा है, “एक समग्र, सक्रिय, प्रौद्योगिकी संचालित और सतत विकास रणनीति द्वारा एक सुरक्षित और आपदा प्रतिरोधी भारत का निर्माण करना जिसमें सभी हितधारक शामिल हों और रोकथाम, तैयारी और शमन की संस्कृति को बढ़ावा दें।”
एनडीएमए के कार्य
एनडीएमए का प्राथमिक कार्य आपदा प्रबंधन पर नीतियां बनाना है। ये राष्ट्रीय योजना को मंजूरी देने के लिए जिम्मेदार है। एनडीएमए राष्ट्रीय योजना के अनुसार भारत सरकार के मंत्रालयों या विभागों द्वारा तैयार की गई योजनाओं को भी देखता है और उन्हें मंजूरी देने के लिए जिम्मेदार होता है। एनडीएमसी राज्य योजना तैयार करने में राज्य के अधिकारियों द्वारा पालन किए जाने वाले दिशा-निर्देशों को निर्धारित करता है।
इसी तरह की तर्ज पर, एनडीएमसी भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों या विभागों द्वारा अपनी विकास योजनाओं और परियोजनाओं में आपदा रोकथाम या इसके प्रभावों को कम करने के उपायों को शामिल करने के उद्देश्य से दिशा-निर्देशों का पालन करता है। एनडीएमसी आपदा प्रबंधन के लिए नीति और योजनाओं के प्रवर्तन और कार्यान्वयन का समन्वय करता है। एनडीएमसी आपदाओं के शमन के उद्देश्य के लिए धन के प्रावधान पर सिफारिशें भी प्रदान करता है। एनडीएमसी केंद्र सरकार के निर्देश पर बड़ी आपदाओं से प्रभावित अन्य देशों को भी सहायता प्रदान करता है।
एनडीएमसी कोई भी अतिरिक्त कदम उठा सकती है जिसे वह आपदा की रोकथाम, शमन, तत्परता और खतरनाक संकट परिदृश्यों या आपदाओं के मामले में क्षमता निर्माण के लिए आवश्यक समझे। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान के कामकाज के लिए व्यापक नीतियां और दिशानिर्देश तैयार करना भी एनडीएमसी की जिम्मेदारी है।
© Copyrights 2021. All rights reserved.
Powered By Hocalwire

source

About Post Author