January 31, 2023

Menstrual Leave: केरल यूनिवर्सिटी की अनूठी पहल, पीरियड के दौरान छात्राओं को मिलेगी 2 प्रतिशत की अतिरिक्त छुट्टी

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Menstruation Leave In Kerala University: देश का एक कॉलेज इस वक्त अपनी अनूठी पहल से चर्चा का विषय बना हुआ है। दरअसल केरल के कोचीन विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (CUSAT) ने महिलाओं के हित में एक अहम फैसला लिया है, जिसे आज तक के इतिहास में किसी भी यूनिवर्सिटी द्वारा नहीं लिया गया है। देश में पहली बार केरल के यूनिवर्सिटी ने छात्राओं को उनके मासिक धर्म यानी कि पीरियड्स के दौरान अवकाश देने की घोषणा की है।
कोचीन विश्वविद्यालय में अब कोई भी छात्रा जिनका पीरियड चल रहा है, उनको कॉलेज आने की कोई आवश्यकता नहीं है। यह फैसला मुश्किल दिनों में महिलाओं के आराम प्रदान करने के लिए लिया गया है।
केरल: कोचीन विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने प्रत्येक सेमेस्टर में महिला छात्राओं की उपस्थिति में अतिरिक्त 2% की छूट दी है। यह फैसला महिला छात्राओं के मासिक धर्म लाभ के अनुरोधों पर विचार कर लिया गया है। pic.twitter.com/Y6Wh0bdnN1
यह फैसला कोचीन विश्वविद्यालय के छात्रसंघ से मिले रिप्रेजेंटेशन के बाद में लिया गया है। 11 जनवरी 2023 को विश्वविद्यालय द्वारा अवकाश संबंधी आदेश जारी करने के दौरान यह घोषणा की गई कि कॉलेज की सभी छात्रा को प्रत्येक सेमेस्टर में 2 प्रतिशत अतिरिक्त छुट्टी दी जाएगी। इन छुट्टी को मेंसुरेशन लाइव (Menstrual Leave) कहा जाएगा।

अनिवार्य उपस्थिति में दो फीसदी की मिलेगी छूट

सभी कॉलेजों के नियमानुसार प्रत्येक सेमेस्टर में विद्यार्थियों को कम से कम 75 प्रतिशत उपस्थिति होना अनिवार्य है। ऐसा न करने वाले उम्मीदवार को परीक्षा में बैठने की इजाजत नहीं होती है। वहीं, छात्राएं अक्सर अपने पीरियड के शुरुआती तीन दिनों में हेल्थ इश्यू के कारण घर से बाहर निकलने और काम करने में असमर्थ रहती हैं। यही कारण रहता है कि प्रत्येक महीने उनकी तीन अतिरिक्त छुट्टियां हो जाती हैं। इस कारण हर साल के अटेंडेंस रिकॉर्ड में लड़कों की तुलना में लड़कियों की उपस्थिति कम रहती है।
इन तमाम पहलुओं पर गौर करने के बाद कॉलेज प्रशासन द्वारा यह फैसला लिया गया है कि सभी छात्राओं को हर महीने तीन अतिरिक्त छुट्टी मिले, जिनसे उनके अटेंडेंस पर कोई जोर न पड़े।

मासिक धर्म पर छुट्टी है जरूरी
कोचीन विश्वविद्यालय की सिंडिकेट की सदस्य डॉ. पूर्णिमा नारायणन ने बताया कि यूनिवर्सिटी ने छात्र संघ द्वारा दी गई एक मासिक धर्म याचिका पर सोच विचार करने के बाद यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने यह कहा कि महिला छात्रों के हित में कॉलेज प्रशासन की ओर से उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। इसके साथ उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में किशोर छात्राओं के हित के लिए भी इस पर सोचने की आवश्यकता है।
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