December 3, 2022

Knowledge News : पुराने लोहे के पुल से हर रोज गुजरती हैं 150 से ज्यादा ट्रेनें, जानिए इसकी रोचक कहानी

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जब सबसे पुराने पुलों की बात की जाती है, तो उसमें दिल्ली (Delhi) का ‘पुराना यमुना का पुल’ जरूर शामिल होता है। जिसे कुछ लोग लोहे वाले पुल (Lohe Ka Pul) के नाम से भी जानते हैं। इस पुल को बहुत से लोगों ने हकीकत में, तो बहुत से लोगों ने फिल्मों में देखा होगा। अपनी उम्र पूरी करने के बाद भी यह यमुना पर बना लोहा का पुल, राजधानी दिल्ली में रेल व सड़क मार्ग से यातायात का मुख्य साधन है। इस पुल के ऊपर रेल लाइन, नीचे सड़क मार्ग और उससे नीचे यमुना नदी (Yamuna River) बहती है। 150 साल से ज्यादा पुराने हो चुके इस पुल पर बनी रेलवे लाइनें (Railway line) पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन, शाहदरा के रास्ते गाजियाबाद से जुड़ती हैं। इस पुल पर हर रोज 150 से ज्यादा ट्रेनें और मालगाड़ियां गुजरती हैं। पुराना और जर्जर हो जाने की वजह से ट्रेनें इससे बहुत धीमी गति से गुजरती हैं। आज हम आपको अपनी इस खबर में इसी पुल से जुड़े कुछ रोचक तथ्य के बारे में बताने वाले हैं…
1866 में हुआ था इस पुल का निर्माण
दिल्ली को कोलकाता से जोड़ने के लिए अग्रेजों ने ईस्ट इंडिया रेलवे द्वारा साल 1866 में 16,16,335 पौंड की लागत से इस पुल को बनवाया था। उस समय एक पौंड की कीमत लगभग 90 रुपये थी। इस हिसाब से इसकी लागत भारतीय मुद्रा में लगभग साढ़े 14 करोड़ रुपये होगी। उस समय सिर्फ एक ही लाइन (जिसे नॉर्थ लाइन कहते हैं) वो बनी थी। उसके बाद साल 1913 में 14,24,900 पौंड मूल्य की लागत से दूसरी लाइन (साउथ लाइन) को बनाया गया। इसमें 202.5 फीट के 12 स्पान (एक खंभे से दूसरे के बीच वाली जगह) और अंतिम दो स्पान और अंतिम दो स्पान 34.5 फीट के हैं।
700 मीटर है इस पुल की लंबाई
इस लोहे वाले पुल की लंबाई 700 मीटर है। इसकी क्षमता बढ़ाने के लिए ब्रेवेट एंड कंपनी (इंडिया) लिमिटेड ने साल 1933-34 में 23,31,396 पौंड (वर्तमान में लगभग 21 करोड़ रुपये) की लागत से इस पुल के स्टील गार्डर को बदला था। इस पुल के ढांचे को ब्रिटेन में तैयार करने के बाद इसे यहां पर लाकर स्थापित किया गया था।
बाढ़ को ध्यान में रखकर किया गया डिजाइन
आपको बता दें कि इस पुल का डिजाइन यमुना नदी में आने वाली बाढ़ को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था। उस समय यमुना नदी में खतरे के निशान का स्तर 672 फीट माना गया था। इस लोहे के पुल में कुल 11 पिलर हैं और इन सभी के फाउंडेशन का स्तर अलग-अलग है। सबसे निचला फाउंडेशन (पिलर नंबर छह ) 615 फीट पर है।
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