November 28, 2022

Research में हुआ बड़ा खुलासा! सोशल मीडिया बन सकता है आपकी मौत की वजह… जानिए कैसे करें अपना बचाव

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Research on Social Media Addiction: आजकल के समय में सोशल मीडिया (Social Media) का इस्तेमाल कौन नहीं करता है, हर कोई अपना खाली समय अपने फोन में ही बिताना पसंद करता है। लोगों बहार घूमने, परिवार के साथ समय बिताने और दोस्तों के साथ मस्ती करने की जगह इंस्टाग्राम (Instagram) में रील्स को स्क्रॉल करना ज्यादा पसंद करते हैं। वैसे तो फोन चलाने के बहुत से नुकसान होते ही है। लोगों की आंखें कमजोर हो जाती है, एक ही पोस्चर में बैठकर गर्दन आदि में दर्द होने लगता है इसके साथ ही लोगों की स्लीप साइकिल पूरी तरह से बर्बाद हो जाती है। लेकिन इन सब चीजों के अलावा क्या अपने कभी सुना है कि किसी इंसान को सोशल मीडिया का इतना एडिक्शन (Social Media Addiction) हो गया हो की वह डिप्रेशन का शिकार हो जाए? आप आप सोच रहे होंगे ज्यादातर लोग इंस्टाग्राम, फेसबुक (Facebook) और टेलीग्राम (Telegram) जैसी चीजें डिप्रेशन से बहार आने के लिए चलाते हैं। अजनबियों से बात करते हैं, उनसे दोस्ती करते हैं और अपनी इस झूठी वर्चुअल दुनिया में खुश रहते हैं।
डिप्रेशन को मिल रहा है बढ़ावा
सोशल मीडिया के कारन होने वाले डिप्रेशन (Depression) के चलते ऑस्ट्रेलिया (Australia) की फ्लाइंडर्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इस पर एक स्टडी की और उन्होंकि स्टडी में यह निकलकर आय की सोशल मीडिया के वर्चुअल होने के कारन हमारा लोगों से सीधा कांटेक्ट या फेस तू फेस इंटरेक्शन बिल्कुल नहीं होता है। इस वर्चुअल दुनिया में सिर्फ उतना ही दीखता है जितना लोग फोटोज शेयर करके दुनिया को बताना चाहते हैं, यही वो कारण है कि कुछ लोगों को ऐसा लगने लगता है कि सामने वाले इंसान की जिंदगी कितनी अच्छी और खुशी से बीत रही है और एक मैं हूं जिसकी परेशानियां खत्म होने का नाम ही नहीं लेती हैं। ऐसे ही आप धीरे-धीरे डिप्रेशन में चले जाते हो। सोशल मीडिया हमारे शरीर को व्यावहारिक रूप से प्रभावित कर रहा है, बल्कि हमें बीमार भी बना रहा है। इससे बचने के लिए आप अपनी वर्चुअल दुनिया से बाहर निकलकर उन लोगों के साथ वक्त बिताइए जो आपके साथ हैं और आपकी केयर करते हैं। हमेश याद रखें रियल लाइफ में कोई भी इतना खुश नहीं होता जितना वो अपने सोशल मीडिया पर नजर आता है।
सोशल मीडिया बन रहा है लोगों की मौत का कारण

क्या आप जानते हैं सोशल मीडिया का एडिक्शन कई लोगों के सुसाइड (Suicide) करने के पीछे की वजह भी बनता है, निराशा के कारण लोग मौत को भी गले लगा लेते हैं। द लैंकट जर्नल में छपी एक स्टडी के मुताबिक सुसाइड करने वाले लोगों में एल्कोहल, दवाइयों की ओवरडोज और ड्रग्स करने वालों की तादाद बहुत ज्यादा है, और यह सभी चीजे सोशल मीडिया की देन है। सोशल मीडिया जिस तरहआपके लिए एक बहुत अच्छी दोस्त साबित हो सकती है ठीक उसी तरह आपकी जान की दुश्मन भी बन सकती है। इससे बचने के लिए आपको बस सतर्क रहना है और दिमाग से काम लेते हुए अपने भले के लिए फैसला लेना है। उदाहरण के लिए आप इंटरनेट में फेमस हुए ब्लू व्हेल (Blue Whale Game) जैसे सुसाइड गेम को खेलने से बचना है।
साइकोलॉजिकल ट्रीटमेंट से नहीं मिलेगा रिजल्ट

इस तरह की सुसाइडल टेंडेंसी और डिप्रेशन से झूझ रहे व्यक्ति का सर दवाइयों और साइकोलॉजिकल ट्रीटमेंट (Psychological Treatment) से इलाज नहीं किया जा सकता है। दरअसल फ्लाइंडर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर तरुण बस्तियम्पिल्लई का कहना है कि महज दावा और ट्रीटमेंट के सहारे आप इस तरह के व्यक्ति को ट्रीट करने की कोशिश कर रहे हैं तो आपको यह प्रयास रोक देना चाहिए क्यों की यह इलाज नाकाम होने वाला है, जब तक अआप उस व्यक्ति के डिप्रेशन की वजह को समझ नहीं लेते और उस इंसान के सोशल नेटवर्क की जैसे कि परिवार के लोग और उसके दोस्तों से मदद नहीं लेंगे तब तक आप ट्रीटमेंट में किसी परिणाम तक नहीं पहुंच पाएंगे।

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