November 28, 2022

पश्चिम बंगाल में भाजपा के ‘नबन्ना चलो मार्च’ के दौरान हिंसा, पुलिस का वाहन फूंका, पथराव

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कोलकाता. पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में मंगलवार को ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ भाजपा का ‘नबन्ना चलो मार्च’ हिंसक हो गया। प्रदेशभर में भाजपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हुई। कोलकाता के लाल बाजार एरिया में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की गाड़ी फूंक दी। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने जमकर पत्थरबाजी भी की।
भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज भी करना पड़ा। पुलिस ने भाजपा कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इस दौरान कोलकाता से भाजपा पार्षद मीना पुरोहित का सिर फट गया, जिसके बाद उन्हें तत्काल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।
कई नेता हिरासत में
पुलिस ने आंदोलन का नेतृत्व कर रहेक विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी और प्रदेश अध्यक्ष सुकांता मजुमदार को भी हिरासत में लिया। हिरासत में लिए जाने के दौरान शुभेंदु अधिकारी का एक बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में शुभेंदु एक महिला पुलिस आॅफिसर से कह रहे हैं, ‘डोंट टच माय बॉडी, आई एम मेल।’ वीडियो को अभिषेक बनर्जी ने भी पोस्ट किया है।
आसनसोल से विधायक लॉकेट चटर्जी समेत कई भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी पुलिस ने डिटेन कर लिया। लॉकेट वही नेता हैं जिन्होंने आसनसोल से टीएमसी प्रत्याशी शत्रुघ्न सिन्हा के खिलाफ चुनाव लड़ा था। हालांकि वे चुनाव हार गई थीं। इसके अलावा पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राहुल सिन्हा का भी सिर में चोट आई। हालांकि देर शाम उन्हें हिरासत से छोड़ दिया गया।
पुलिस की सख्ती के बाद हुई झड़प
गौरतलब है कि भाजपा ने ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर प्रदेशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया था। इसे सचिवालय चलो मार्च (नबन्ना चलो मार्च) नाम दिया गया है। पुलिस ने प्रदर्शन के खिलाफ सख्ती दिखाई। भाजपा कार्यकर्ताओं को विभिन्न जिलों में ही पुलिस ने हिरासत में लेना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं ट्रेन और बसों से आने वाले कार्यकर्ताओं को रेलवे स्टेशन और बस टर्मिनल पर ही पुलिस ने हिरासत में लिया था। पुलिस की इस कार्रवाई का विरोध भी हुआ।
हाईकोर्ट ने तलब की रिपोर्ट
कोलकाता हाईकोर्ट ने भाजपा के आंदोलन को लेकर पश्चिम बंगाल के गृह सचिव से 19 सितंबर तक रिपोर्ट तलब की है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वे इस बात का ध्यान रखें कि प्रदर्शन के दौरान किसी भी व्यक्ति को अवैध तरीके से डिटेन नहीं किया जाए। साथ ही सार्वजनिक संपत्ति को भी किसी तरह का नुकसान न हो।
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