August 9, 2022

Pneumonia: बच्चों में निमोनिया के लक्षणों का जल्द लगाएं पता, जानिए कितना हो सकता है खतरनाक

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बच्चों में अक्सर निमोनिया (Pneumonia) का खतरा बना ही रहता है, उसमें भी पांच साल या उससे कम उम्र के बच्चे और खासतौर पर नवजात बच्चों में निमोनिया का संक्रमण फैलने का खतरा सबसे अधिक होता है। बच्चों में अगर निमोनिया के लक्षण दिख रहें हो तो पैरेंट्स को बचाव के सभी उपाय बरतने के साथ ही ट्रीटमेंट में देर नहीं करनी चाहिए। इस बारे में फिजिशियंस ऑफ इंडिया, प्रेसिडेंट-एकेडमी ऑफ फैमिली के डॉ. रमन कुमार ने पेरेंट्स के लिए बहुत यूजफुल सजेशंस दिए हैं।
डब्ल्यूएचओ (विश्व स्वास्थ्य संगठन) के अनुसार, निमोनिया के कारण हर बीस सेकेंड में एक बच्चे की जान जाती है और पांच साल से छोटे बच्चों में मृत्यु के 16 प्रतिशत मामले निमोनिया के कारण होते हैं। बच्चों में संक्रमण की चपेट में आने का खतरा अधिक होता है, क्योंकि उनका प्रतिरक्षा प्रणाली यानी इम्यून सिस्टम पूरी तरह विकसित नहीं होता है। जिन बच्चों को स्तनपान नहीं कराया जाता है, उनको निमोनिया की चपेट में आने का खतरा अधिक होता है।

क्या है निमोनिया
निमोनिया फेफड़ों का एक संक्रमण है। यह संक्रमण बैक्टीरिया, वायरस और फंगस के कारण होता है। इसमें एक या दोनों फेफड़ों के एयरसैक्स (एलविलोय) में सूजन आ जाती है। इन एयरसैक्स में फ्ल्यूड या पस भर सकता है, जिसके कारण बलगम वाली खांसी, बुखार, ठंड लगना और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
कैसे फैलता है संक्रमण

वायरस और बैक्टीरिया से होने वाला निमोनिया छींकने और खांसने से दूसरों में फैल सकता है। लेकिन फंगल निमोनिया का संक्रमण, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता है। वायरस और बैक्टीरिया सामान्यत: बच्चों के नाक या गले में पाए जाते हैं, जो फेफड़ों को संक्रमित कर सकते हैं, अगर वो इसे इनहेल कर लेते हैं। इसके अलावा निमोनिया रक्त के द्वारा भी फैल सकता है, विशेष रूप से जन्म के तुरंत बाद।
प्रमुख लक्षण

वायरल और बैक्टीरियल निमोनिया के लक्षण लगभग समान होते हैं। हालांकि वायरल निमोनिया (Viral Pneumonia) में बैक्टीरियल निमोनिया (Bacterial Pneumonia) की तुलना में अधिक लक्षण दिखाई देते हैं। नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों में निमोनिया के वैसे लक्षण दिखाई नहीं देते हैं, जैसे वयस्कों में दिखाई देते हैं। फिर भी कुछ लक्षण, बच्चों में निमोनिया का संकेत देते हैं। जैसे- त्वचा का रंग पीला पड़ जाना, सांस लेने में तकलीफ होना, अत्यधिक बेचैन और थका हुआ दिखाई देना, सामान्य से अधिक रोना, ठीक से स्तनपान नहीं करना या खाना नहीं खाना, उल्टी होना, निमोनिया के लक्षण गंभीर होने पर बच्चा बेहोश हो सकता है, उसे हाइपोथर्मिया हो सकता है और दौरे पड़ सकते हैं।
रिस्क फैक्टर्स

वैसे तो किसी भी बच्चे को निमोनिया हो सकता है, लेकिन कुछ बच्चों में इसकी आशंका अधिक होती है, जैसे- जन्म के शुरुआती कुछ महीने में, अगर उसको वैक्सीन न लगी हो, श्वसनतंत्र से संबंधित दूसरी समस्याएं हों, जिससे फेफड़े प्रभावित होते हैं। बच्चे के आस-पास कोई सिगरेट पीता हो, समय पूर्व जन्मा नवजात बच्चा यानी प्री-मैच्योर बेबी।
डायग्नोसिस के तरीके

एक्स-रे

छाती के एक्स-रे से यह स्पष्ट हो जाता है कि बच्चे को श्वसन तंत्र से संबंधित समस्या निमोनिया के कारण है या दूसरे संक्रमणों के कारण।
ब्लड टेस्ट

ब्लड टेस्ट, संक्रमण की पुष्टि करता है, लेकिन इससे संक्रमण के कारणों का पता नहीं चल पाता है।
स्पुटम टेस्ट

इसमें फेफड़ों से सैंपल यानी बलगम की जांच की जाती है, जिससे संक्रमण के कारण का पता चल जाता है।
पल्स ऑक्सीमेट्री

इसमें एक अंगुली पर ऑक्सीजन सेंसर लगाया जाता है, जिसे पल्स ऑक्सीमेट्री कहते हैं। इसके द्वारा यह पता लगाना संभव होता है कि फेफड़ों से पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन रक्त के प्रवाह तक पहुंच रही है या नहीं।
सीटी स्कैन

सीटी स्कैन के द्वारा फेफड़ों की एक बहुत स्पष्ट और विस्तृत तस्वीर मिल जाती है।
ब्रोंकोस्कोपी

इसमें एक लचीली नली जिसके सिरे पर कैमरा लगा होता है, इसे बच्चे के गले से होते हुए फेफड़ों में डाला जाता है। डॉक्टर इस टेस्ट को कराने का तब कहते हैं, जब निमोनिया के लक्षण गंभीर हो जाते हैं, बच्चा अस्पताल में भर्ती होता हैं और उसका शरीर एंटीबायोटिक्स के प्रति प्रतिक्रिया नहीं दे रहा होता है।
ट्रीटमेंट

निमोनिया का उपचार इस पर निर्भर करता है कि निमोनिया किस प्रकार का है, कितना गंभीर है और बच्चे का सामान्य स्वास्थ्य कैसा है? एंटीबायोटिक्स, एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल ड्रग्स का इस्तेमाल निमोनिया के उपचार के लिए किया जाता है। अधिकतर मामलों में बैक्टीरियल निमोनिया का उपचार 2-3 दिन तक लगातार एंटीबायोटिक्स (Antibiotics) लेने से हो जाता है। कफ को कम करने के लिए डॉक्टर एंटीकफ मेडिसिन देते हैं।
बचाव के उपाय

छोटे बच्चों को निमोनिया से बचाने के लिए कुछ उपाय करें-
वैक्सीनेशन (Vaccination)

निमोनिया से बचने के लिए वैक्सीन उपलब्ध है। नवजात शिशुओं से लेकर पांच साल तक के बच्चों के लिए वैक्सीन लगवा सकते हैं। डॉक्टर्स 6 माह से बड़े बच्चों के लिए फ्लू शॉट्स की सिफारिश भी करते हैं। बचपन से ही बच्चों को साफ-सफाई की आदत डालें। गंदगी के कारण श्वांस मार्ग के संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है, जो निमोनिया का कारण बन सकती है।
धूम्रपान (Smoking) न करें

धूम्रपान यानी स्मोकिंग के दौरान निकलने वाले धुएं से बच्चों के फेफड़ों की श्वसन तंत्र के संक्रमण के विरुद्ध प्राकृतिक सुरक्षा क्षमता क्षतिग्रस्त हो जाती है।
इम्यून सिस्टम (Immune System) को दुरुस्त रखें

बच्चों का इम्यून तंत्र पूरी तरह विकसित नहीं हुआ होता है। इसलिए इम्यून सिस्टम को ठीक रखने के लिए बच्चों के खाने-पीने और नींद का ध्यान रखें। अगर बच्चा छोटा है तो उसे स्तनपान जरूर कराएं।
प्रस्तुति : शमीम खान
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