July 1, 2022

Knowledge News: Civil Disobedience Movement की कैसे हुई थी शुरुआत और क्या था इसका प्रभाव

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Knowledge News: सविनय अवज्ञा आंदोलन (Civil Disobedience Movement) भारत को आजादी दिलाने के लिए किए गए प्रयासो में से एक ऐतिहासिक प्रयास था। कई मायनों में, सविनय अवज्ञा आंदोलन को भारत में स्वतंत्रता (Freedom in India) का मार्ग प्रशस्त करने का श्रेय दिया जाता है। यह एक बहुत महत्वपूर्ण आंदोलन (Important Movement) था क्योंकि यह शहरी क्षेत्रों में फैला एक आंदोलन था और इसमें महिलाओं और निचली जातियों के लोगों की भागीदारी देखी गई थी। यहां हम आपके लिए इस आंदोलन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारी ले कर आएं हैं।
कैसे हुई शुरुआत
सविनय अवज्ञा की शुरुआत महात्मा गांधी के नेतृत्व सन 1930 में हुई थी। सविनय अवज्ञा आंदोलन दांडी मार्च के साथ शुरू हुआ जब गांधी 12 मार्च 1930 को आश्रम के 78 अन्य सदस्यों के साथ अहमदाबाद के साबरमती आश्रम से पैदल चलकर दांडी के लिए निकले। दांडी पहुंचने के बाद, गांधी ने नमक कानून तोड़ा। उस समय नमक बनाना अवैध माना जाता था क्योंकि इस पर पूरी तरह से सरकारी एकाधिकार था। नमक सत्याग्रह के कारण पूरे देश में सविनय अवज्ञा आंदोलन को व्यापक स्वीकृति मिली। यह घटना लोगों की सरकार की नीतियों की अवहेलना का प्रतीक बन गई।
आंदोलन के प्रभाव
गांधी के नक्शेकदम पर चलते हुए, तमिलनाडु में सी. राजगोपालचारी ने त्रिचिनोपोली से वेदारण्यम तक एक समान मार्च का नेतृत्व किया। उसी समय कांग्रेस में एक प्रमुख नेता सरोजिनी नायडू ने गुजरात के दरसाना में आंदोलन का नेतृत्व किया। इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया जिसमें 300 से अधिक सत्याग्रही गंभीर रूप से घायल हो गए। जिसके नतीजे के तौर पर प्रदर्शन, हड़ताल, विदेशी सामानों का बहिष्कार और बाद में करों का भुगतान करने से इनकार कर दिया गया। इस आंदोलन में महिलाओं सहित एक लाख देशवासियों ने भाग लिया था।
ब्रिटिश सरकार की प्रतिक्रिया
साइमन कमीशन द्वारा सुधारों पर विचार करने के लिए, ब्रिटिश सरकार ने नवंबर 1930 में राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस आयोजित की। हालांकि, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा इसका बहिष्कार किया गया था। सम्मेलन में भारतीय राजा, मुस्लिम लीग, हिंदू महासभा और कुछ अन्य लोगों ने भाग लिया। लेकिन इससे कोई खास असर नहीं पड़ा। अंग्रेजों ने महसूस किया कि कांग्रेस की भागीदारी के बिना कोई वास्तविक संवैधानिक परिवर्तन नहीं होगा।
वायसराय लॉर्ड इरविन ने कांग्रेस को दूसरे राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस को शामिल होने के लिए मनाने के प्रयास किए। गांधी और इरविन एक समझौते पर पहुंचे, जिसमें सरकार उन सभी राजनीतिक कैदियों को रिहा करने पर सहमत हुई जिनके खिलाफ हिंसा का कोई आरोप नहीं था और बदले में कांग्रेस सविनय अवज्ञा आंदोलन को निलंबित कर देगी।
सविनय अवज्ञा आंदोलन का प्रभाव
सविनय अवज्ञा आंदोलन का प्रभाव दूर-दूर तक पहुंचा था। इसने ब्रिटिश सरकार के प्रति अविश्वास पैदा किया और स्वतंत्रता संग्राम की नींव रखी, और प्रचार के नए तरीके जैसे प्रभात-फेरी, पैम्फलेट आदि को लोकप्रिय बनाया। महाराष्ट्र, कर्नाटक और मध्य प्रांत में वन कानून की अवहेलना और इनकार के बाद पूर्वी भारत में ग्रामीण ‘चौकीदारी कर’ का भुगतान करने के लिए, सरकार ने दमनकारी नमक कर समाप्त कर दिया।
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