January 27, 2023

मुख्यमंत्री गहलोत के आर्थिक सलाहकार के घर CBI रेड, 1688 करोड़ों की गड़बड़ी का मामला

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जयपुर। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने कथित भ्रष्टाचार के एक मामले में राजस्थान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेहद करीबी और सलाहकार पूर्व वित्त सचिव अरविंद मायाराम के आवासों पर तलाशी ली। सीबीआई की इस कार्रवाई में जांच टीम ने कुछ दस्तावेज भी जप्त किए हैं। अरविंद मायाराम के जयपुर और दिल्ली स्थित ठिकानों पर चली दिनभर की कार्रवाई के बाद सीबीआई ने कथित तौर पर एक व्यक्ति को पूछताछ के लिए हिरासत में भी लिया है।
दो थैलों में दस्तावेज लेकर घर से निकली सीबीआई
जयपुर स्थिति आवास पर चली कार्रवाई के बाद सीबीआई की टीम दो थैलों में दस्तावेज लेकर अरविंद मायाराम के घर से निकली। सीबीआई की टीम जाने के बाद अरविंद मायाराम से बातचीत की कोशिश की गई, लेकिन तब उन्होंने अपने नौकर से कहकर घर के दरवाजे पर भीतर से ताला लगवा दिया।
सीबीआई ने दर्ज की प्राथमिकी
आपराधिक षड्यंत्र और धोखाधड़ी से संबंधित भारतीय दंड संहिता की धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज की। इसके बाद 1978 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी के दिल्ली और जयपुर स्थित आवासों पर तलाशी ली गई। कुछ दिन पहले ही मायाराम कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में शामिल हुए थे एजेंसी ने वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के विभाग के मुख्य सतर्कता अधिकारी की शिकायत पर 2018 में प्रारंभिक जांच शुरू की थी।
1688 करोड़ की हेराफैरी का मामला
अरविंद मायाराम के ठिकानों पर यह कार्रवाई उनके केंद्रीय आर्थिक मामला सचिव रहने के दौरान करेंसी नोट की छपाई और उसके धागों को लेकर हुए ब्रिटेन की कंपनी के साथ करार के मामले में की गई है। इस मामले में सीबीआई के सब इंस्पेक्टर अमन राणा की तरफ से 10 जनवरी को अरविंद मायाराम और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 120 बी और 420 में मुकदमा दर्ज कराया गया है। बताया जा रहा है कि यह पूरा मामला 1688 करोड रुपए की लेनदेन और हेराफेरी से जुड़ा हुआ है।
ब्लैकलिस्टेड कंपनी को दिया ठेका
यह मामला करेंसी छापने के लिए मटेरियल सप्लाई करने वाली एक ब्लैकलिस्टेड ब्रिटिश कंपनी से जुड़ा है। कंपनी को मटेरियल की क्वालिटी घटिया होने के चलते वर्ष 2011 में ही ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया था। इसके बावजूद अरविंद मायाराम के फाइनेंस सेक्रेटरी रहते हुए बिना टेंडर प्रोसेस के कंपनी को तीन साल का एक्सटेंशन देकर नोट छापने में इस्तेमाल होने वाला कलरफुल धागा खरीदने का ऑर्डर जारी हुआ था। बताया जाता है यह ऑर्डर करीब 1688 करोड़ का था। यह खरीद 2012 में हुई जबकि कंपनी पहले से ब्लैकलिस्टेड थी।


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