October 3, 2022

Kashmiri Pandits History: कौन हैं कश्मीरी पंडित, जिनकी आज भी हो रहीं जम्मू कश्मीर में हत्याएं

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जम्मू कश्मीर (Jammu and Kashmir) में पंडितों का इतिहास (Kashmiri Pandits History) उतना ही पुराना है, जितना की कश्मीर, लेकिन पिछले 3 दशकों में उनकी अपने घरों में वापसी नहीं हो चुकी है। ऐसे में अभी भी समय समय पर जो कश्मीरी पंडित कश्मीर की वादी में रहते हैं। उनकी हत्याएं हो रही हैं। तो ऐसे में उनके बारे में बात करना जरूरी है। ऐसे में कश्मीरी पंडित कौन थे और उनका इतिहास क्या है (जिन्हें कश्मीरी ब्राह्मण भी कहा जाता है), हम यहां इसके बारे में ही बात करने वाले हैं…

आजादी से पहले कश्मीर एक बेहद खूबसूरत जगह होने के साथ-साथ एक शांतिपूर्ण जगह हुआ करती थी और यहां की ज्यादातर आबादी कश्मीरी पंडितों की थी। इस जगह पर दूसरे देशों के कई मुस्लिम राजाओं ने भी हमला किया और इस जगह पर शासन किया। कश्मीरी पंडित दो प्रकार के होते थे, जिनमें से पहली श्रेणी के पंडितों को बनमासी कहा जाता था। इस श्रेणी में उन पंडितों को गिना जाता था, जो मुस्लिम राजाओं के शासन काल में घाटी छोड़कर बाद में वापस आकर यहां बस गए थे।

कौन हैं कश्मीरी पंडित

कहते हैं कि वृहत्तर सारस्वत ब्राह्मणों का एक समूह जम्मू-कश्मीर में ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी से यहां पर रह रहा है। ये ब्राह्मण पंच गौर समूह के हैं। वह एकमात्र कश्मीरी हिंदू जाति और राज्य के मूल निवासी थे। लेकिन तब जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों की संख्या कितनी थी और वर्तमान में कितने पंडित वहां बसे हुए हैं। इस संबंध में अलग-अलग आंकड़े हैं। साल 2016 में घाटी के अंदर रहने वाले पंडितों की संख्या 2 हजार तक बताई गई।

ये पूरे जम्मू-कश्मीर प्रांत की आबादी का केवल पांच 5 थे। इनमें शिक्षित, समृद्ध, सरकारी कामकाजों में उच्च पदों पर पंडित थे। पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू भी इसी समुदाय से ताल्लुक रखते थे। अब हम कश्मीरी पंडितों के निष्कासन के इतिहास की बात करें तो यह नरसंहार 14 सितंबर 1989 से शुरू था। इस वक्त जम्मू कश्मीर के कई हजार कश्मीरी पंडितों ने पलायन किया था।
कश्मीर में पंडितों का नरसंहार

कहते हैं कि कश्मीरी पंडितों के बुरे दिन 14 सितंबर 1989 को शुरू हुए थे। इन हत्याओं ने भी डर का माहौल लोगों के बीच पैदा किया था। भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य और वकील कश्मीरी पंडित तिलक लाल टपलू की हत्या जेकेएलएफ ने की थी। इसके बाद जस्टिस नील कांत गंजू की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई। उस दौर के अधिकांश हिंदू नेताओं की हत्या कर दी गई। जेकेएलएफ जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट है। इसे पाकिस्तान की खुफिया और सेना के इशारे पर बनाया गया था। इस कट्टरपंथी इस्लामी संगठन की स्थापना अमानुल्लाह खान और मकबूल भट्ट ने 1977 में की थी। लेकिन अभी तक कश्मीर में पंडितो की वापसी नहीं हो सकी है। लेकिन अभी भी कई कश्मीरी कैंपों में रहते हैं।

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