September 25, 2022

Knowledge News: मकड़ी आखिर जाला क्यों बनाती है, जानिए क्या है इसके पीछे का उद्देश्य

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Knowledge News: हर कोई जानता है कि मनुष्य और अधिकांश अन्य कशेरुकी प्रजातियां ईयरड्रम का उपयोग करके सुनते हैं जो ध्वनि तरंग दबाव को हमारे दिमाग के लिए संकेतों में बदल देते हैं। लेकिन कीड़े और आर्थ्रोपोड जैसे छोटे जानवरों के बारे में क्या? क्या वे ध्वनियों का पता लगा सकते हैं? और अगर ऐसा है तो कैसे? चलिए जानतें हैं।

वाइब्रेट हवा के माध्यम से मकड़ी तक पहुंचता है
न्यूयॉर्क (New York) की बिंगहैम्प्टन यूनिवर्सिटी (Binghampton University) के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि मकड़ी जाले की मदद से खुद को अलर्ट भी रखती हैं। इसी जाल की मदद से उन तक आवाजें पहुंचती हैं। शोधकर्ताओं (Researchers) ने दावा किया है कि यदि जाले के आसपास कोई आवाज (Sound) आती है तो एयर (हवा) में वाइब्रेट (Vibrate) पैदा होता है। ये वाइब्रेट हवा के माध्यम से मकड़ी तक पहुंच जाता है। इसके बाद मकड़ी खतरे को भापते हुए तत्काल खुद को अलर्ट कर लेती है।

मकड़ी हवा में मौजूद वाइब्रेशन को पैरों के माध्यम से पहचान लेती है
रिपोर्ट के अनुसार, शोधकर्ताओं ने कहा है कि जिस तरह से मनुष्य कान में मौजूद ईयरड्रम (Eardrum) के माध्मय से आवाज सुनता है ठीक वैसे ही मकड़ी भी ऐसा करने के लिए अपने पैरों (Spider Legs) का इस्तेमाल करती है। मकड़ी (Spider) हवा में मौजूद वाइब्रेशन को पैरों के माध्यम से पहचान लेती है।

शोधकर्ताओं ने साउंडप्रूफ कमरे का इस्तेमाल किया
रिपोर्ट के अनुसार, शोधकर्ताओं ने यह शोध ओर्ब वीवर स्पाइडर (Orb Weaver Spider) पर किया। ओर्ब वीवर स्पाइडर को बड़े जाले बनाने के लिए जाना जाता है। बताया जाता है कि इस मकड़ी (Spider- स्पाइडर) का जितना आकार होता है उससे लगभग दस हजार गुना जाला बनाने में ये सक्षम होती है। शोधकर्ताओं ने इस पर प्रयोग करने के लिए साउंडप्रूफ (Soundproof) कमरे का इस्तेमाल किया। शोध में सामने आया है कि मकड़ी लगभग 68 डेसीबल साउंड को भी रिस्पॉन्ड कर सकती है।

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