November 29, 2022

84 कोस परिक्रमा वाले पहाड़ के लिए आंदोलन: जुटे 3 हजार साधु, मंत्री की साधु-संतों को धमकी

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जयपुर। राजस्थान में बढ़ते अपराध धमने का नाम नहीं ले रहे है। कांग्रेस सरकार के राज में अपराधियों के हौसल काफी बुलंद हो चुके है। प्रदेश में बीते कुछ सालों से जंगल राज कायम है। अवैध खनन व स्टोन क्रेशर हटाने को लेकर भरतपुर के डीग में 3000 साधु-संत जुट गए। कुछ समय पहले यहीं पर एक साधु ने आत्मदाह कर लिया था। अब पसोपा में एक बार फिर संत समाज के धरने-प्रदर्शन से पुलिस-प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। इस बीच, पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने संत समाज को धमकी दी कि प्रदर्शनकारी बदमाशी करेंगे तो सरकार अपने तरीके से निपटेगी।
अवैध खनन और स्टोन क्रेशर हटाने के लिए आंदोलन
संरक्षण समिति के महासचिव ब्रज दास ने कहा कि सबकी भावनाओं को देखते हुए हम यह घोषणा करते हैं कि क्रेशरों को हटाने के लिए साधु-संतों, ग्रामवासियों, कृष्ण भक्तों की ओर से एक दिसंबर से एक बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। पसोपा में जुटे संतों ने करीब डेढ़ घंटे तक धरना दिया फिर आंदोलन की चेतावनी देकर करीब 10:30 बजे केदारनाथ की ओर कूच कर गए।
बाबा की आत्मदाह के बाद भी क्रेशर नहीं हटे
श्री मान मंदिर सेवा संस्थान, गहवर वन बरसाना से शुरू चौरासी कोस की यात्रा पसोपा में रुकी थी। इसमें करीब 3000 साधु-संत शामिल थे। श्री मान मंदिर, पसोपा ट्रस्ट के कार्यकारी अध्यक्ष राधा कृष्ण शास्त्री ने डीग SDM हेमंत कुमार को ज्ञापन दिया। इसमें ब्रज क्षेत्र से संपूर्ण क्रेशर को हटाने की मांग की गई। शास्त्री ने कहा अवैध तरीके से चल रहे क्रेशरों को नहीं हटाया गया तो वह आंदोलन करेंगे। इस दौरान किसी तरह की जनहानि होती है सरकार व प्रशासन की जिम्मेदारी होगी। उनका कहना है कि अभी हमने नवंबर तक आंदोलन को स्थगित कर दिया है।
8 महीनों से नहीं सुन रही है सरकार
संत समाज के राधाकांत शास्त्री का कहना है कि सरकार ने 8 महीनों तक सुनवाई नहीं की थी। बाबा विजयदास ने आत्मदाह किया तो एक दिन में काम हो गया। पर अब भी क्रेशर नहीं हटे हैं। इस मामले में प्रशासन का कहना है कि हमने जो अवैध तरीके से अवैध खनन हो रहा था, उसको बंद करा दिया है। हमें मौके पर कोई भी क्रेशर चलता हुआ नहीं मिला। हमने अच्छे तरीके से चेक किया। इसको लेकर हमने टीमें भी गठित की हैं।
पर्यटन मंत्री ने कहा, लाइसेंस लेकर चल रहे हैं क्रेशर
इस बीच संतों के धरने-प्रदर्शन और आंदोलन की चेतावनी पर कैबिनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने कहा, आदिबद्री पर्वत को खनन मुक्त करा दिया गया, वह सरकार का वादा था। क्रेशर प्लांटों को भी सरकार बंद कराए, यह वादा नहीं है। वे लाइसेंस लेकर क्रेशर चला रहे हैं तो क्रेशर चलेंगे ही। अगर साधु-बाबाओं ने ज्यादा बदमाशी करने की कोशिश की तो फिर सरकार सरकार का काम करेगी।
अप्रिय घटना के लिए सकरार और प्रशासन जिम्मेदार
वहीं, ब्रज दास ने कहा कि 1 दिसंबर से ही साधु-संत आदिबद्री पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू करेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी साधु-संत की जिम्मेदारी हम नहीं लेते। वे स्वतंत्र होते हैं, वह कुछ भी कर सकते हैं। अगर ऐसे में कोई भी अप्रिय घटना होती है तो उसकी सारी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी।


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