November 28, 2022

खार्किव से पीछे हटी रूसी सेना: प्रेसिडेंट जेलेंस्की बोले- यूक्रेन में कब्जा करने वालों के लिए जगह नहीं, सेना की वापसी सही विकल्प

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कीव/मॉस्को. रूस-यूक्रेन जंग 6 महीने से जारी है। रूसी सेना यूक्रेन पर कब्जा करने में नाकाम रही है। अब रूस कदम पीछे खींच रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले हफ्ते से खार्किव में रूस की पकड़ ढील हो रही थी। यूक्रेन की जवाबी कार्रवाई के बाद रूस ने सेना के वापस बुलाने का फैसला किया है।
रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि वो यूक्रेन के इजुम इलाके से अपने सैनिकों को वापस बुला रहे हैं। ये इलाका खार्किव में रूसी सेना के लिए एक प्रमुख बेस था। अब रूस का कहना है कि वो डोनेट्स्क पर ध्यान केंद्रित करने के लिए सेना की वापसी कर रहा है। इसी तरह की बात रूसी रक्षा मंत्रालय ने मार्च में कही थी, जब उसने कीव से सैनिकों को वापस बुला लिया था।
यूक्रेन को मिल रही सफलता
रूसी सैनिकों के पीछे हटने को यूक्रेन की जीत के रूप में देखा जा रहा है। यूक्रेनी अधिकारियों ने कहा- खार्किव इलाके में हमारे सैनिकों को बड़ी जीत मिली है। अप्रैल में रूस के सैनिकों ने इजुम पर कब्जा कर लिया था। अब हमारे सैनिकों ने इजुम को वापस लेकर रूसी सेना की बेहद जरूरी सप्लाई लाइन काट दी।
जेलेंस्की बोले- यहां से जाना सही विकल्प
यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने रूस के इस फैसले की तारीफ की है। उन्होंने कहा- पिछले कुछ दिनों में रूस ने सेना को वापस बुलाने का जो फैसला लिया है वो सही है। रूस ने ऐसा करके अपना बेस्ट साइड दिखाया है। उनके लिए यहां से भाग जाना एक अच्छा विकल्प है। यूक्रेन में कब्जा करने वालों के लिए न कभी जगह थी और न ही कभी रहेगी।
रूस-यूक्रेन जंग क्यों?
दिसंबर 2021 में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने नाटो की सदस्यता लेने का ऐलान किया था। यूक्रेन की इस घोषणा के बाद से ही रूस नाराज है। रूस नहीं चाहता है कि यूक्रेन नाटो से जुड़े। रूस यूक्रेन की सीमा से सटा देश है, इसलिए उसकी सुरक्षा के लिए यूक्रेन बेहद अहम है। रूस का मानना है कि यूक्रेन के NATO के साथ जाने का मतलब होगा रूस के धड़ से सिर का अलग होना।
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