December 8, 2022

Karwa Chauth: गर्भावस्था में रख रही हैं करवा चौथ का व्रत तो इन बातों का रखें खास ख्याल, सेहत पर नहीं होगा असर

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Karwa Chauth Fasting For Pregnant Women: करवा चौथ विवाहित हिंदू (Hindu) महिलाओं द्वारा मनाए जाने वाले सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। इस त्योहार को भारत के उत्तर और पश्चिमी हिस्से में बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। हिंदू कैलेंडर के मुताबिक इस साल करवा चौथ (Karwa Chauth) का त्योहार 13 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन शादीशुदा महिलाएं (Married Women) अपने पति की लंबी उम्र और सुरक्षा के लिए पूरे दिन निर्जला व्रत (Nirjala Fast) रखती हैं। महिलाओं में करवा चौथ को लेकर खासा उत्साह देखने को मिलता है, बता दें कि कई जगहों पर यह व्रत कुंवारी कन्याएं (जिनकी सगाई हो गई हो या शादी आसपास हो) भी व्रत रखती हैं। इसी कड़ी में एक बहुत बड़ा सवाल यह भी होता है कि अगर कोई महिला गर्भवती (Pregnant Women) है तो क्या वह व्रत रख सकती है? दरअसल यह व्रत निर्जला होता है, कुछ खाना तो दूर आप इसमें पानी तक नहीं पी सकते हैं।
ऐसे में गर्भवती महिलाओं के लिए करवा चौथ का व्रत रखना खतरे से खाली नहीं होता है, इस हालत में व्रत रखना या नहीं रखना महिला कि शारीरिक स्थिति पर निर्भर करता है। अगर आप फिजिकली वीक मेहसूस कर रही हैं तो आपको ये व्रत नहीं रखना चाहिए, इससे आपको और आपके होने वाले बच्चे को बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन अगर इसके बावजूद आप व्रत रखना चाहती हैं तो आपको इस मामले में सबसे पहले आप अपने डॉक्टर से सलाह लीजिए, बताते चलें कि ऐसी कोई रिसर्च नहीं है जो महिलाओं को गर्भावस्था में व्रत रखने से रोकता हो। लेकिन यह निर्जला व्रत (Karwa Chauth) होता है और पर्याप्त मात्रा में पानी ना पीने के कारण होने वाली माता के अंदर पानी कि कमी भी हो सकती है। अगर आप गर्भावस्था (Pregnancy) में ये व्रत रख रही हैं तो निचे बताई गई कुछ बातों का ध्यान जरूर रखें :-
करवा चौथ व्रत कि शुरुआत से पहले सरगी खाई जाती है तो आप उस समय हैवी चीजें खाएं, जिससे आपको जल्दी से भूख न लग जाए। साथ ही खाना खाने के बाद दूध का एक बड़ा गिलास पीना बिल्कुल ना भूलें।

निर्जला व्रत रखने कि गलती बिल्कुल ना करें और जितनी प्यास लगे उतना पानी पीते रहें।
अगर शरीर में कमजोरी हो तो आप कुछ समय बीतने के बाद फलों और व्रत में खायी जाने वाली चीजों का सेवन कर सकते हैं, ताकि मां और शिशु को ग्लूकोज व आवश्यक तत्वों की कमी ना हो।
व्रत खोलने के बाद सरलता से पचने वाले भोजन ही ग्रहण करें और तले भोजन से जितनी हो सके दूरी बना लें।

गर्भवती महिलाओं का व्रत के दौरान कमजोरी, चक्कर या बेहाशी के कारण गिरने का भय बना रहता है, इसलिए हर परिस्थिति के लिए तैयार रहें।

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