December 6, 2022

शुभ मुहूर्त में बांध सकेंगे रक्षा सूत्र: भद्रा है, पर पाताल लोक में निवास करेगी, दोष नहीं लगेगा, आज ही मनाएं रक्षाबंधन

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12 अगस्त को त्रिमुहूर्त व्यापनी पूर्णिमा नहीं, इसलिए उस दिन नहीं मना सकते रक्षाबंधन
कोटा. रक्षाबंधन पर्व की तिथि को लेकर इस बार असमंजस की स्थिति बनी है। सावन माह की पूर्णिमा का दो दिन यानी 11 से 12 अगस्त की सुबह तक है। 11 अगस्त (गुरुवार) को सुबह से लेकर रात तक भद्राकाल होने से कुछ लोग 12 अगस्त को रक्षाबंधन मनाने की बात कह रहे हैं तो कुछ गुरुवार रात को भद्रा के बाद बचे हुए समय में ही राखी बांधकर रक्षाबंधन मनाने की तैयारी कर रहे हैं।
इस बारे में शहर के ज्योतिष के जानकारों ने स्थिति स्पष्ट कर इस असमंजस को दूर करने का प्रयास किया है। उनका कहना है कि रक्षाबंधन पर्व 11 अगस्त को ही मनाया जाना चाहिए, क्योंकि 12 अगस्त को तो पूर्णिमा सूर्योदय के बाद कुछ देर तक ही रहेगी। इस बार के भद्राकाल के बारे में उनका कहना है कि इससे हानि नहीं होगी।
ज्योतिष दर्शन बहुउद्देश्यीय अनुसंधान केंद्र के नरेन्द्र दुग्गड़ ने बताया कि श्रावण पूर्णिमा 11 अगस्त को सुबह 10 बजकर 41 मिनट से 12 अगस्त को सुबह 7.07 बजे तक रहेगी। लेकिन रक्षाबंधन के लिए श्रावण मास, पूर्णिमा व श्रवण नक्षत्र का योग होना आवश्यक माना है। श्रवण नक्षत्र गुरुवार सुबह 6.44 बजे से प्रारंभ होकर दिन व रात्रि 4.08 बजे तक रहेगा। इसलिए गुरुवार को ही रक्षाबंधन पर्व मनाना श्रेष्ठ है। गुरुवार को सुबह 10: 39 से रात 8.52 बजे तक भद्राकाल रहेगा।
इस बारे में दुग्गड़ ने कहा कि इस बार का भद्राकाल विचारणीय नहीं है। सुबह 10 बजकर 41 मिनट पर पूर्णिमा प्रारंभ होने के समय चंद्रमा मकर राशि में रहेगा। इसका अर्थ यह हुआ कि भद्रा गुरुवार को पाताल लोक में निवास करेगी। इसलिए पृथ्वी पर इसका कोई असर नहीं होगा। किसी तरह का दोष नहीं लगेगा। उल्लेखनीय है कि जय मार्तंड पंचांग के अनुसार भी जब भद्रा पाताललोक में होती है तो वह शुभ फलदायी रहती है। फिर जो लोग भद्रा को मानना ही चाहें तो रात में एक घंटे के शुभ मुहूर्त में राखी बंधवा सकते हैं।
आज रहेगा आयुष्मान, सौभाग्य और ध्वज योग
ज्योतिषाचार्य अमित जैन का कहना है कि 11 अगस्त (गुरुवार) को आयुष्मान, सौभाग्य और ध्वज योग रहेगा। साथ ही शंख, हंस और सत्कीर्ति नाम के राजयोग भी बन रहे हैं। गुरु-शनि वक्री होकर अपनी राशियों में रहेंगे। सितारों की ऐसी दुर्लभ स्थिति पिछले 200 साल में नहीं बनी। इस दिन रक्षाबंधन सुख-समृद्धि और आरोग्य देने वाला रहेगा।
उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन के लिए शास्त्रों में जो नियम बताए गए हैं, उसके अनुसार सावन यानी श्रावण पूर्णिमा के दिन भद्रा के समय का त्याग करके राखी का पर्व मनाना चाहिए। गुरुवार सुबह 10: 39 बजे से भद्रा भी लग रही है जो रात में 8.52 बजे पर समाप्त होगी। ऐसे में भद्रा समाप्त हो जाने पर रात 8.52 के बाद राखी बांधी जा सकती हैं। 12 अगस्त को त्रिमुहूर्त व्यापनी पूर्णिमा नहीं होने से रक्षाबंधन पर्व 11 अगस्त को ही मनाया जाना चाहिए।
ज्योतिषाचार्य जैन के अनुसार भद्रा का वास चाहे आकाश में रहे या स्वर्ग में, जब तक भद्रा काल पूरी तरह खत्म न हो जाए तब तक रक्षा बंधन नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों का मानना है कि 11 अगस्त को भद्रा पाताल में रहेगी। जिसका धरती पर अशुभ असर नहीं होगा। इसलिए पूरे दिन रक्षाबंधन कर सकते हैं, लेकिन किसी भी ग्रंथ या पुराण में इस बात का जिक्र नहीं है। इसलिए भद्रा के वास पर विचार ना करते हुए इसे पूरी तरह बीत जाने पर ही राखी बांधना चाहिए।
भद्राकाल को टालें, भद्रा पुच्छकाल में बांध सकते हैं राखी
जैन के अनुसार भद्रा पुच्छ काल में शाम 5 बजकर 7 मिनट से 6 बजकर 19 मिनट तक 72 मिनट के मुहूर्त में श्रवण पूजन और राखी बांधी जा सकेगी। रात 8.52 से 9.48 बजे तक ही राखी बांधना श्रेष्ठ होगा, ये 56 मिनट का मुहूर्त रहेगा। कुल मिलाकर 2 घंटे 8 मिनट का मुहूर्त रहेगा।
इस श्रेष्ठ योग में खरीदारी करना भी शुभ
ज्योतिषाचार्य जैन के अनुसार गुरुवार को बन रहे श्रेष्ठ योग में वाहन, प्रॉपर्टी, ज्वैलरी, फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक सामान और अन्य चीजों की खरीदारी से लंबे समय तक फायदा मिलेगा। साथ ही किसी भी नई शुरूआत के लिए ये दिन बहुत अच्छा रहेगा। इस दिन जॉब जॉइन करना, बड़े लेन-देन या निवेश करना फायदेमंद रहेगा। श्रवण नक्षत्र होने से पूरा दिन वाहन खरीदारी के लिए बेहद शुभ रहेगा।
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