August 13, 2022

सेहत के लिए फायदेमंद है लीची, कैंसर से लेकर इन रोगों के लिए है रामबाण

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रस भरी लीची (lychee) का नाम सुनते ही मुंह में पानी भर आता है। इन दिनों बाजार में लीची खूब मिल रही है। लीची का छिलका उतारने पर गोल-मटोल हल्के सफेद रंग का रसीला फल स्वादिष्ट ही नहीं पौष्टिकता से भी भरपूर होता है। प्रांतीय भाषा में इसको कई नामों जैसे-लीचूर, लीसी, लीचीहन्नु और लीटची आदि से भी जाना जाता है। कई रोगों में कारगर:लीची का फल ही नहीं, इसका पेड़ और पत्तियां भी कई रोगों में कारगर होती हैं। लीची हृदय और आस्थमा(दमा) के रोगियों के लिए फायदेमंद है। लीची, कैंसर कोशिकाओं को फैलने से रोकता है। कब्ज से परेशान लोगों को इसके सेवन से राहत मिलती है। इसका सेवन शरीर में पानी का संतुलन बनाए रखने में सक्षम है।
लीची का सेवन याददाश्त के लिए भी उपयोगी है। पेट की गर्मी को शांत कर पाचनशक्ति को प्रबल करने में मददगार है। यह विटामिन सी, पोटैशियम और प्राकृतिक मिठास का खजाना है। इसमें मिलने वाले विटामिन और पोषक तत्व, शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी नियंत्रित रखते हैं। इसमें कार्बोहाइड्रेट, विटामिन ए, विटामिन बी कॉम्पलेक्स, फॉस्फोरस, आयरन जैसे पोषक तत्व भी उचित मात्रा में पाए जाते हैं। इसका उचित मात्रा में सेवन भोजन पचाने और मोटापा कम करने में मददगार होता है। दस्त, उल्टी, पेट का अल्सर, आंतरिक सूजन में भी इसका सेवन हितकर है। गुर्दे की पथरी से होने वाले दर्द में इसके सेवन से राहत मिलती है। यह हीमोग्लोबिन के स्तर को बनाए रखता है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने और पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मददगार होता है।
ऐसे करें प्रयोग
– मुंह में छाले हों, घाव हो या मुंह से बदबू आती हो तो लीची के पेड़ की छाल को उबाल कर काढ़ा बनाकर कुल्ला और गरारे करें।
– बेजान बालों को मजबूती इेने के जिए हो तो लीची के पेड़ की छाल को उबाल कर ठंडा किए काढ़े से सिर धोएं।
– अंडकोष में सूजन, दर्द के लिए इसके बीज का काढ़ा बना कर पीना हितकर है।
– जहरीले कीट, पतंगों के काटने से होने वाली जलन, दर्द से छुटकारा पाने के लिए इसके पत्तों को पीस कर प्रभावित स्थान पर लगाना लाभकारी है।
रखें ध्यान
लीची फल का सेवन ज्यादा न कर, जूस और शेक बनाकर पीना लाभकारी है। लीची का अधिक मात्रा में सेवन करना परेशानी का कारण बन सकता है। लीची शुगर का स्तर भी बढ़ा सकता है। डायबिटीज पेशेंट को ज्यादा खाने से गले में खराश, बुखार और नाक से खून भी आ सकता है। गर्भवती और दूध पिलाने वाली माताओं को इसके सेवन से दूर रहना चाहिए। लीची खाली पेट नहीं खाना चाहिए।
यहां बताए गए उक्त सभी उपाय, उपचार सामान्य हैं। कोई भी उपाय आजमाने से पहले अनुभवी वैद्य या आयुर्वेद विशेषज्ञ से सलाह अवश्य करें।
-वैद्य हरिकृष्ण पांडे ‘हरीश’
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