July 5, 2022

क्या है शरीर में विटामिन डी की कमी होना, जानें लक्षण और बचाव के उपाय

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 क्या है शरीर में विटामिन डी की कमी होना
बिजी लाइफस्टाइल, नेचर से बढ़ती दूरी और खान-पान में लापरवाही की वजह से आज के दौर में अधिकतर लोगों के शरीर में विटामिन डी (Vitamin D) की कमी होने लगी है। इससे न केवल बोंस कमजोर होती हैं, शरीर की इम्यूनिटी (Immunity) भी वीक हो जाती है। ऐसा आपके साथ न हो, इसके लिए आपको अवेयर रहने की जरूरत है। सनलाइट (Sunlight) या अल्ट्रावॉयलेट किरणें (UV Rays) हमारे स्वास्थ्य के लिए प्रकृति का वरदान मानी जाती हैं। सनलाइट में एक्सपोज होने पर हमारी स्किन के सेल्स में विटामिन डी का निर्माण होता है, जो हमारी हड्डियों और कैल्शियम के बीच ब्रिज का काम करता है।
स्किन के सेल्स से यह विटामिन ब्लड में पहुंचता है, लिवर और किडनी में जाकर एक्टिवेट होता है। यही वो विटामिन है, जो हमारे शरीर में कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है और हड्डियों तक पहुंचाता है। यानी हमारी हड्डियों को कैल्शियम तभी मिलता है, जब शरीर में पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी मौजूद होता है। जब हमारे शरीर मे विटामिन डी का लेवल कम हो जाता है, तब हमारे अंदर बीमारियों से लड़ने की ताकत कम हो जाती है। हड्डियां कमजोर पड़ने लगती हैं।
कमी की वजहें: हालांकि हमारे देश में सूरज की धूप की कोई कमी नहीं रहती है, फिर भी वैज्ञानिकों का मानना है कि शहरों में तकरीबन 80 प्रतिशत लोगों में विटामिन डी की कमी देखने को मिलती है। इसका प्रमुख कारण है-अनहेल्दी और बिजी लाइफस्टाइल। जिसकी वजह से हममें से कई लोग दिन भर धूप नहीं ले पाते हैं। इसके साथ ही कम फूड आइटम्स में यह पाया जाता है।
विटामिन डी का रोल: शरीर में विटामिन डी की कमी होने पर शरीर में एंटीबॉडीज के निर्माण में बाधा आती है। ये एंटीबॉडीज हमारी इम्यूनिटी को बूस्ट करने, हड्डियों की हेल्थ और शरीर में मौजूद बॉयोकेमिकल रिएक्शन को मेंटेन करने में मदद करती हैं। विटामिन डी हमारे पेट के सेल्स को सक्रिय करता है ताकि कैल्शियम और फास्फोरस का अवशोषण कर सकें। ये मिनरल्स शरीर की हड्डियों और दांतों को मजबूती प्रदान करने और हेल्दी रखने के लिए जरूरी हैं। विटामिन डी रेस्पिरेटरी सिस्टम को भी मजबूती प्रदान करता है, जिससे बार-बार होने वाले सर्दी-जुकाम को दूर करने में मदद मिलती है।
कमी से होने वाली प्रॉब्लम्स: विटामिन डी की कमी किसी भी उम्र में हो सकती है। इसकी कमी से विटामिन बी कॉम्प्लेक्स और कैल्शियम की कमी भी होने लगती है। जिससे हड्डियां कमजोर पड़ने लगती हैं और शरीर में खासकर जोड़ों में दर्द रहता है। मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, जिससे बहुत ज्यादा थकान रहना, कमजोरी महसूस होता है। इसके अलावा डाइजेशन गड़बड़ाना, मूड स्विंग होना, डिप्रेशन जैसी समस्याएं भी देखने को मिलती हैं। इसकी कमी से इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है, जिससे रेस्पिरेटरी इंफेक्शन होने की संभावना ज्यादा होती है। ज्यादा कमी होने पर ऑस्टियोपोरोसिस, आर्थराइटिस जैसी बीमारी हो सकती हैं। हार्ट डिजीज, हाइपर टेंशन, डायबिटीज, कैंसर, डिप्रेशन जैसी गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं। लेकिन जरूरत से ज्यादा विटामिन डी होने पर भी कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं जैसे-जी मिचलाना, वॉमिट आना, हड्डियों का बढ़ना, पथरी होना, अल्सर, सनबर्न, स्किन फ्लेग्जिबिलिटी कम होना, स्किन कैंसर।
तब कराएं विटामिन डी चेक: ब्लड टेस्ट से विटामिन डी की जांच की जाती है। यह टेस्ट तब कराना चाहिए, जब हड्डियों संबंधी समस्याएं हों या शरीर में लगातार थकान, दर्द महसूस हो।
ट्रीटमेंट: ब्लड लेवल टेस्ट के आधार पर व्यक्ति को ज्यादा से ज्यादा सनलाइट एक्सपोजर लेने और जरूरी सप्लीमेंट्स लेने के लिए कहा जाता है। विटामिन डी का लेवल 24 नैनोग्राम/मिली. से कम होने पर डॉक्टर सप्लीमेंट्स लेने के लिए कहते हैं। 1000 इंटरनेशनल यूनिट वाला कैप्स्यूल/सैशे रोजाना या फिर 60 हजार इंटरनेशनल यूनिट वाला कैप्स्यूल/सैशे प्रतिसप्ताह लेने के लिए दिए जाते हैं। आमतौर पर मरीज को 4-6 सप्ताह के लिए सैशे दूध में मिलाकर पीने के लिए कहा जाता है।
कारगर उपाय
प्रस्तुति- रजनी अरोड़ा
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