December 3, 2022

डॉक्टर बनकर पिता का नाम रोशन करेगा रोशन: कोविड में पिता को खोया, उन्हीं के नाम से हॉस्पिटल बनवाने का संकल्प

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कोटा. विपत्तियां आसरा छीनती हैं तो किस्मत आपके लिए दूसरा रास्ता खोलती भी है। नीट-यूजी के स्टूडेंट रोशन कुमार के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ। बिहार ईस्ट चम्पारन के नरकटिया बाजार निवासी रोशन की तकदीर कॅरियर सिटी कोटा के एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट ने रोशन कर दी। अब रोशन अपने पिता का नाम रोशन करने के लिए पढ़ेगा और गांव में उनके नाम से अस्पताल खोलेगा। रोशन ने गत वर्ष कोविड में अपने पिता को खोया था। रोशन ने नीट-यूजी में 608 अंक प्राप्त किए हैं, सामान्य श्रेणी में आल इंडिया रैंक 17286 रही और ओबीसी-एनसीएल कैटेगिरी रैंक 7192 है। दसवीं में 94 प्रतिशत और 12वीं कक्षा में 89 प्रतिशत अंक प्राप्त किए।
रोशन ने बताया कि हमारा परिवार ईस्ट चम्पारन के छोटे से गांव नरकटिया बाजार में निवास करता है। आजीविका चलाने के लिए यहां पापा विनोद गुप्ता का मेडिकल स्टोर था। मां वन्दना गुप्ता गृहिणी हैं। हम तीन भाई-बहन हैं और तीनों की पढ़ाई चल रही है। दोनों भाई-बहन मुझसे बड़े हैं। भाई आशुतोष व बहन स्नेहा बीएसई कर रहे हैं। मैंने दसवीं कक्षा तक मोतिहारी में पढ़ाई की। दसवीं में 94 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। सबकुछ अच्छा चल रहा था, मेरी पढ़ाई को देखते हुए पापा कहते थे कि तुम डॉक्टर बनना।
इसके बाद समय बदला और सबकुछ बदल गया। कोविड आया, हमारा परिवार भी इसकी चपेट में आया। दूसरी लहर में पिता संक्रमित हुए, उनकी देखभाल करते हुए मां भी संक्रमित हो गई। हमने हर कोशिश की, लेकिन पापा को नहीं बचा सके। इसके बाद हर दिन हमारे परिवार के लिए भारी होता चला गया, दुकान बंद थी और घर खर्च के लिए भी पैसे नहीं बचे, जो पैसे थे वे भी मां के इलाज में लग गए। बड़े भइया ने पढ़ाई के साथ दुकान संभाली, लेकिन मेरी पढ़ाई को लेकर पूरा परिवार चिंतित था।
तभी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की पहल पर एलन के निदेशक नवीन माहेश्वरी सर द्वारा कोविड प्रभावित परिवार के बच्चों को निशुल्क पढ़ाने की घोषणा की गई। नवीन सर का ट्वीट देखा तो भईया की जानकारी में आया और उन्होंने मुझे बोला कि तुम कोशिश कर लो। डर ये लग रहा था कि यदि थोड़ा बहुत भी पैसा लगा तो कहां से लाएंगे, क्योंकि परिवार के पास कुछ नहीं था। एलन की हेल्पलाइन पर बात की और ई-मेल पर संबंधित प्रमाणपत्र भेजे। इसके बाद मेरी फोन पर बात हुई और एलन ने पूरी मदद करने का आश्वासन देते हुए कोटा बुला लिया।
यहां मेरे परिवार का एक रुपया किसी सुविधा के लिए खर्च नहीं होने दिया। पढ़ाई, भोजन, आवास सबकुछ मुझे निशुल्क उपलब्ध करवाया गया और सामान्य बच्चों के साथ पढ़ाई करवाई गई। यही नहीं राजस्थान बोर्ड से एडमिशन और स्कूल का खर्च भी उठाया गया। मुझे कभी ऐसा अहसास भी नहीं होने दिया कि मैं अलग पढ़ रहा हूं। मैंने भी पूरी मेहनत की और पिता को याद करते हुए अपने संकल्प पर अड़ा रहा। मां से जब भी बात करता था तो बहुत याद करती थी और रोती थी। जब रिजल्ट आया तो भी मां के आंसू नहीं रूक रहे।
कार्डियोलॉजिस्ट बनना चाहता हूं
रोशन ने बताया कि मैं गांव का पहला बच्चा हूं जो एमबीबीएस करेगा। एमबीबीएस के बाद कार्डियोलॉजिस्ट बनना चाहता हूं। पिता ने मुझे डॉक्टर बनाने का सपना देखा। मैं उसी सपने को पूरा करते हुए अब उनके नाम से गांव में अस्पताल खोलना चाहता हूं।
मुझे तो विश्वास नहीं होता
रोशन की मां वन्दना गुप्ता ने बताया कि मुझे तो विश्वास नहीं हो रहा कि आज भी समाज में ऐसे लोग हैं। जब इसके पिता का निधन हुआ तो समाज के कई रंग देखने को मिले। हम सुविधाओं के लिए मोहताज भी हुए लेकिन एलन का साथ मिला जो कि जीवनभर याद रहेगा, क्योंकि रोशन की लाइफ इसी सहयोग से बनी है।
ये हमारा सौभाग्य
ये कोटा और एलन का सौभाग्य है कि ऐसे विद्यार्थियों की मदद कर पा रहे हैं। कोविड से हजारों परिवार प्रभावित हुए। हमारा छोटा सा प्रयास था, अब जिन विद्यार्थियों का कॅरियर बना है, वे दूसरों की मदद के संस्कार एलन से लेकर जा रहे हैं। यही समाज की सबसे बड़ी सेवा है। – नवीन माहेश्वरी, निदेशक, एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट।
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