July 1, 2022

Kota: सीवरेज चैंबर्स ने बिगाड़ा सड़कों का हुलिया, कच्ची बस्ती जैसे हो गए कॉलोनियों के हाल

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कोटा. कोटा शहर में विकास की इबारतें अलग-अलग तरह से लिखी जा रही हैं। जहां नगर विकास न्यास, राज्य सरकार व स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शहर के मुख्य मार्ग व चौराहे तो खूबसूरत होते जा रहे हैं, लेकिन आरयूआईडीपी के तहत चल रहे सीवरेज लाइन के कार्य ने आवासीय कॉलोनियों की सड़कों का हुलिया बिगाड़ दिया है।
बेतरतीब तरीके से सड़क के बीचों-बीच छितराए हुए से चैंबर रखे जाने और बिना किसी तय लेवल के सीमेंट-कंक्रीट की सड़कें बनाने से नए कोटा शहर में आवासन मंडल और नगर विकास न्यास की ओर से विकसित सुनियोजित कॉलोनियों के रास्ते अब कई जगह तो कच्ची बस्ती जैसे दिखने लगे हैं। किसी घर के सामने सीसी रोड ऊंची तो कहीं नीची है। कहीं चैंबर सड़क से ऊपर मानो सिर निकालकर झांक रहे हैं तो कहीं सड़क में आठ से दस इंच गहरे गड्ढे में धंसे हुए हैं। दोनों की तरह के ये चैंबर गलियों में दुर्घटना का सबब भी बन गए हैं।

छोटी गलियों में तो चारपहिया वाहन निकालने में दिक्कत हो रही है। इसी के साथ सीवरेज लाइन के कार्य में आधा-अधूरा पेचवर्क लोगों के जख्मों पर नमक छिड़क रहा है। शहरवासियों का दर्द ये है कि वे इसकी शिकायत करें तो किससे करे, क्योंकि कोई सुनने वाला नहीं है। शिकायत करने पर भी इंजीनियर या आरयूआईडीपी का प्रतिनिधि मौके पर नहीं आता। कोटा शहर में आरयूआईडीपी की ओर से सीवरेज लाइनें बिछाने का कार्य किया जा रहा है। यह कार्य दो पैकेज में है। एक पैकेज के निर्माण कार्य पूरा होने की तिथि 21 जून है और दूसरे पैकेज के कार्य पूरे होने की तिथि आगामी अक्टूबर 2022 है।
सीवरेज का कार्य करा रही कंपनी के अधीन ठेकेदार सीवरेज लाइनें डालने के कार्य में लापरवाही बरत रहे हैं, जिसके चलते आए दिन हादसे भी हो रहे हैं। सीवरेज लाइन बिछाने के बाद सड़कों के सुदृढ़ीकरण व पेंच वर्क में लीपा-पोती की जा रही है। इससे आम जन काफी दुखी है। लेकिन सीवरेज कंपनी को जनता की कोई परवाह नहीं है। सीवरेज लाइनों की मॉनिटरिंग करने वाले अधिकारी भी लाइनों के डालने के बाद सड़कों की मरम्मत पर ध्यान नहीं दे रहे। जिसका खामियाजा आमजन को उठाना पड़ रहा है।

पहले सड़क के किनारे थे, अब बीच में आ गए
गलियों में सीवरेज लाइन डालने के बाद प्रॉपर्टी कनेक्शन करने के लिए चैंबर बनाए गए हैं। आवासन मंडल ने पहले सड़क के दोनों तरफ चैंबर रखे थे। अब गली के बीच में मैनलाइन का बड़ा चैम्बर लगाया है। घरों का सीवरेज मेन चैम्बर में डालने के लिए अलग-अलग चैम्बर भी बीच में बना दिए। ऐसे में गलियों में चैंबर-ही चैंबर ही नजर आ रहे हैं। कुछ जगह तो एक ही जगह पर तीन-तीन चैंबर हो गए। चैम्बर लगाने के बाद सीसी सड़कें बनाईं तो ऊंचे-नीचे चैंबरों की वजह से उसका लेवल भी गड़बड़ा गया। ऐसा लगता है चैंबर्स को कवर करने के लिए सड़क पर सीमेंट कंक्रीट को लीप-पोत दिया हो।

ऊंचे-नीचे चैंबर्स से परेशानी, लोग पूछ रहे, ये कौनसी इंजीनियरिंग है?
सीवरेज लाइनों को डालने के बाद कंपनी की ओर से लाइनों के चैम्बर बनाए जा रहे हैं। इन चैम्बरों के मुंह कहीं पर सड़क से 4-5 इंच ऊंचे तो कहीं पर सड़क के लेवल से 8-10 इंच नीचे कर दिए। इस कारण कहीं वाहन चैंबर से टकराते हैं तो कहीं पर उनके गड्ढे में गिरते हैं। इस कारण दुर्घटनाएं हो रही हैं, लेकिन आरयूआईडीपी के अधिकारियों के द्वारा लाइन चैकिंग के दौरान कंपनी के ठेकेदारों को इनको ठीक करने के लिए नहीं कहा जाता।
हालात यह है कि मामूली दूरी पर एक चैम्बर सड़क से उठा हुआ है तो अगला चैम्बर सड़क में धंसा हुआ है फिर अगला चैंबर सड़क के बराबर तो फिर कोई आगे का चैम्बर सड़क से 4-5 इंच ऊंचा उठा हुआ है। दुपहिया वाहन चालक इनसे बचकर निकलने का प्रयास करते हैं तो कई बार गिर जाते हैं। अब लोग सवाल उठा रहे हैं कि आरयूआईडीपी ये कौनसी इंजीनियरिंग लाया है?, जिसमें इस तरह का बेरतरतीब का हो रहा है।
यूआईटी ने भी नई सीसी में चैंबर की जगह छोड़ दिए गड्ढे
पंचवटी नगर कुन्हाड़ी में जहां पर सीवरेज लाइन डालने के बाद मुख्य चैंबर ओर प्रॉपर्टी कनेक्शन वाले चैंबर छोड़ दिए गए।
इन चैम्बरों में प्रॉपर्टी कनेक्शन होने से पहले ही नगर विकास न्यास की ओर सीसी रोड का निर्माण कर दिया गया है। न्यास के ठेकेदार द्वारा सीसी निर्माण निर्माण के बाद मुख्य चैंबर ओर प्रॉपर्टी कनेक्शन वाले सीवरेज चैंबर के चारों ओर खाली गड्ढ़े छोड़ दिए। न्यास की ओर से बनाए रोड की ऊंचाई करीब सात-आठ इंच है।
इस तरह यहां सीवरेज चैंबर की वजह से सड़क पर गड्ढे 8 इंच तक के हैं। सड़क के बीच में मैन चैम्बर ओर साइड में प्रॉपर्टी चैम्बर होने के गड्ढे होने की वजह से फोरव्हीलर गाड़ी को सड़क से निकालने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। एक गड्ढे को बचाते हैं तो दूसरे गड्डे में टायर गिर जाते हैं। जिसके चलते गाड़ी में टूट-फूट का भी खतरा रहता है।
मरम्मत सिर्फ गड्ढे वाली जगह पर
आरयूआईडीपी की ओर से सड़कों की खुदाई के बाद उनकी मेंटेनेंस का कार्य भी संबंधित ठेकेदार कंपनी को दिया है। ठेकेदार द्वारा सीवरेज लाइनों के डालने के लिए बड़े-बड़े गहरे गड्ढे खोदने के लिए चेन माउंटेड मशीन और जेसीबी मशीन के द्वारा कार्य किया जाता है। इस कारण एक जगह गड्ढे खोदने से अगर डामर की सड़क हो तो करीब 50-60 फीट तक सड़क खराब होती है, लेकिन सीवरेज ठेकेदार कंपनी द्वारा जिस जगह पर गड्ढ़ा खोदा गया है।
उसी जगह की मेंटेनेंस की जाती है, बाकि जगह पर मशीनों को खड़ा किया गया है, या उनको इधर-उधर घुमाने के लिए खराब हुई सड़क की मरम्मत नहीं की जाती। इस कारण सीवरेज गड्ढे के आसपास की पूरी सड़कें क्षतिग्रस्त पड़ी हैं। जिसका खामियाजा भी आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। क्योंकि उन गड्ढों की मरम्मत ना तो यूआईटी/निगम कर रहा है और नाहीं सीवरेज वाले कर रहे हैं। दोनों ही आपस में एक दूूसरे के ऊपर मेंटेनेंस की जिम्मेदारी डालते है।
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